अनिवार्य व्यवस्था:फाइनल एजेंडा भी अब विभागीय मंत्री को बिना बताए-दिखाए कैबिनेट में नहीं जाएगा

मप्र में कैबिनेट में जाने वाला फाइनल एजेंडा भी अब विभागीय मंत्रियों को बिना बताए या दिखाए आगे नहीं बढ़ेगा। यदि मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गठित पांच अपर मुख्य सचिवों की सीनियर सेक्रेटरी कमेटी भी कैबिनेट के एजेंडे में कोई बदलाव करती है तो उसकी पूरी जानकारी मंत्री को बताना और दिखाना होगा। हाल ही में हुई कैबिनेट की बैठक में दो ऐसे मामले आए, जिसके बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अफसरों के लिए यह व्यवस्था अनिवार्य कर दी।

पहले भी यह व्यवस्था थी। विभाग के प्रस्ताव को मंत्री अनुमोदित करता था। फिर प्रस्ताव को वित्त, जीएडी, लॉ और एजेंडे से जुड़े दूसरे विभाग को राय के लिए भेजा जाता था। राय मिलने के बाद सीनियर सेक्रेटरी की कमेटी (कम से कम तीन अपर मुख्य सचिव या अधिकतम 6-7 तक) कैबिनेट के एजेंडे का परीक्षण करती है।

इसके बाद कैबिनेट प्रेसी फिर मंत्री को भेजे जाने का प्रावधान है, लेकिन इसी में अधिकारी लापरवाही बरत देते थे। सीनियर सेक्रेटरी की कमेटी के द्वारा कैबिनेट के फाइनल एजेंडे में कोई बदलाव होता था तो मौखिक जानकारी मंत्री को दे देते थे। अब आगे ऐसा नहीं होगा। मंत्रालय सूत्रों का कहना है कि नगर पालिका और परिषद अध्यक्ष को अविश्वास से हटाने के फैसले में सीनियर सेक्रेटरी की कमेटी ने कुछ बदलाव किया।

विभाग की ओर से यह जानकारी सतही तौर पर मंत्री कैलाश विजयवर्गीय को पहुंचाई गई। जब एजेंडा कैबिनेट की बैठक में रखा गया, तब विभागीय मंत्री ने ही कहा कि सीनियर सैक्रेटरी की कमेटी ने अविश्वास के लिए तीन चौथाई पार्षदों की संख्या की अनिवार्यता को खत्म किया है, मुझे लगता है कि यह होना चाहिए। इसी के बाद यह सामने आया कि प्रक्रिया में कुछ कमी रह गई।

364 पदों की डिमांड पूरी की गई
इसी तरह महिला बाल विकास विभाग के पदों की स्वीकृति को लेकर भी वित्त विभाग की आपत्ति को अमान्य किया गया। मंत्री की 364 पदों की डिमांड पूरी की गई।

पिछली कैबिनेट के ये हैं दो मामले

पहला – मौखिक जानकारी ही दी थी.. सीनियर सेक्रेटरी कमेटी ने नगर पालिका अध्यक्ष-उपाध्यक्षों को अविश्वास के जरिए हटाने के दो प्रावधानों में से एक हटा दिया था। यह तीन चौथाई पार्षदों का अविश्वास की तरफ होना जरूरी था। कैबिनेट में मामला गया तो जानकारी आई कि मंत्री को मौखिक बताया गया था। जीएडी की तरफ से भी जानकारी नहीं मिली। कैबिनेट बैठक के दौरान मंत्री विश्वास सारंग ने तर्क रख दिया कि मंत्री (कैलाश विजयवर्गीय) को कैसे नहीं बताया गया। सीनियर सैक्रेटरी क्या बदलाव करते हैं मंत्री को बताना चाहिए। सीएम ने अफसरों को ताकीद करते हुए मंत्रियों की पैरवी की। कहा, कैबिनेट एजेंडे की मंत्रियों को पूरी जानकारी दी जाए।

दूसरा – पूरे पद स्वीकृत कर दिए..महिला बाल विकास विभाग 364 पद मांग रहा था। वित्त विभाग ने आपत्ति कर दी। कहा कि इसके आधे पद देने चाहिए। कैबिनेट में मामला गया। सीएम ने मंत्री की बात को तवज्जो देते हुए पूरे पद स्वीकृत कर दिए।

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