कर्मचारियों ने दौड़कर 15 मिनट में बुझाई विध्यांचल की आग:कुर्सियों और प्लॉयवुड से भरे रखे थे 342 कॉर्टून

राजधानी भोपाल में मध्यप्रदेश सरकार के तीसरे सबसे बड़े सरकारी दफ्तर विध्यांचल भवन में लगी आग से दहशत फैल गई। ये दहशत जून-23 और मार्च-24 में सतपुड़ा-वल्लभ भवन में आग लगने जैसी ही थी। कर्मचारी आग बुझाने दौड़े। गनीमत रही कि 10-15 मिनट में ही आग बुझा दी गई।
आग की खबर बेसमेंट से लेकर छठी मंजिल तक आग की ही तरह फैल गई। बिल्डिंग के अंदर धुआं भरने लगा। तभी कर्मचारी यहां रखे 4 फायर एक्सटिंगिवीशर लेकर दौड़े। इधर, पुलिस-नगर निगम को भी सूचना दी गई। आग बेकाबू होती, उससे पहले ही वह काबू में आ गई।
ऑफिस में ठसाठस रखे थे 342 कार्टून, उनमें कुर्सियां भरी विध्यांचल भवन की दूसरी मंजिल पर विमुक्त, घुमक्कड़ एवं अर्द्धघुमक्कड़ जनजाति विकास और पिछड़ा वर्ग तथा अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के प्रदेश स्तर के दफ्तर हैं। यहां पर रिनोवेशन किया जा रहा है। इसके चलते फ्लोर के एक हिस्से में कुर्सियों (ऑफिस चेयर) से भरे कार्टून और बड़ी मात्रा में प्लायवुड की शीट्स-टुकड़े रखे थे। ये कार्टून और प्लायवुड इतनी अधिक मात्रा में था कि न सिर्फ फ्लोर बल्कि छत भी ठसाठस भर गई।
जब कार्टून की गिनती की गई तो यह 10-20 नहीं बल्कि साढ़े 3 सौ से ज्यादा निकले। पुलिस फायर के एसआई बलजीत सिंह हुड्डा ने बताया, दूसरी मंजिल के दो हिस्से में कुर्सी व अन्य सामान से भरे कार्टून रखे थे। एक हिस्से में 180 और दूसरी में 80 कार्टून थे। छत पर 82 भरे हुए मिले। वहीं, 20 खाली रखे थे। इस तरह 342 भरे और 20 खाली कार्टून थे। आग फैलने पर बड़ा हादसा हो सकता था, पर आग पर समय रहते काबू में पा लिया।
धुआं उठते ही बुझाने दौड़े आग फ्लोर से छत से जाने वाले हिस्से में लगी थी। जैसे ही धुआं उठा, कर्मचारियों ने देखा और उसे बुझा दिया। बिल्डिंग की मरम्मत और देखभाल का जिम्मा संभाल रहे पीडब्ल्यूडी के इंजीनियर कमल सिंह कीर ने बताया, धुआं देखते ही दौड़ें और फैलने से पहले ही आग बुझा दी।
आग लगने की 2 वजह सामने आई विध्यांचल भवन में आग लगने की 2 वजह सामने आई है। पहली वेल्डिंग और दूसरी बीड़ी-सिगरेट की चिंगारी। छत पर कुछ मजदूर काम कर रहे थे। आग भी यहीं लगी। इसलिए आशंका जताई गई है कि मजदूर के बीड़ी-सिगरेट पीने के दौरान चिंगारी कार्टून पर गिर गई। जिससे आग लग गई।
आग लगने के बाद तुरंत सामान हटाने लगे विध्यांचल भवन में आग लगने से अफसर भी हरकत में आ गए। उन्होंने तुरंत सामान हटाने को कहा। यहां काफी देर तक दमकलें मौजूद रही। ताकि, यदि चिंगारी रहने से आग लग गई तो उसे तत्काल बुझाया जा सके।
भोपाल की सबसे पुरानी इमारतों में शामिल सतपुड़ा और विंध्याचल भवन राजधानी भोपाल की सबसे पुरानी इमारतों में शामिल हैं। साल 1982 में यह भवन तैयार हुए थे। उस वक्त सतपुड़ा भवन का निर्माण 4.61 करोड़ रुपए में हुआ था, जबकि विंध्याचल भवन का निर्माण 4.95 करोड़ रुपए में हुआ था। यहां से मध्यप्रदेश सरकार के कई अहम विभाग संचालित होते हैं। जिनमें शिक्षा, आयुष, आदिम जाति कल्याण, उद्योग, सहकारिता, कृषि, घुमक्कड़, पिछड़ा वर्ग जैसे विभाग भी शामिल हैं।
सतपुड़ा में आग से गरमा गई थी सियासत, केंद्र सरकार से मदद मांगी गई
13 जून 2023 की शाम। प्रदेश के सबसे बड़े प्रशासनिक भवन सतपुड़ा की छठीं मंजिल पर आग लग गई। आग इतनी भीषण थी कि कर्मचारियों को अपनी जान बचाने के लिए दौड़ लगाना पड़ी। भगदड़ तक मच गई और गिरने से कुछ लोग घायल भी हो गए थे। दो दिन तक आग सुलगती रही थी। तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और गृहमंत्री अमित शाह तक से मदद भी मांगी थी। वहीं, आग में कई फाइलें भी जल गई थी। इससे प्रदेश की सियासत गरमा गई थी।





