पुणे पोर्श केस- जुवेनाइल बोर्ड मेंबर्स के खिलाफ जांच होगी:महाराष्ट्र सरकार ने कमेटी बनाई, नाबालिग आरोपी को निबंध लिखने की सजा देकर छोड़ा था

पुणे पोर्श कार हादसे में नाबालिग आरोपी को जमानत देने वाले जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड के तीन सदस्यों के खिलाफ जांच होगी। महाराष्ट्र सरकार ने इनके आचरण और कार हादसे में फैसला देते वक्त नियमों का पालन किया गया या नहीं, इसकी जांच के लिए 5 सदस्यों की एक कमेटी बनाई है।

न्यूज एजेंसी PTI के मुताबिक, एक अधिकारी ने बुधवार 29 मई को बताया कि राज्य महिला एवं बाल विकास विभाग (WCD) ने पिछले हफ्ते हादसे के तुरंत बाद कमेटी का गठन किया था। डिप्टी कमिश्नर रैंक के एक अधिकारी कमेटी का नेतृत्व कर रहे हैं।

WCD कमिश्नर प्रशांत नारनवरे ने बताया कि कमेटी अगले हफ्ते तक अपनी रिपोर्ट सौंप सकती है। जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड में एक ज्यूडिशियल (न्यायिक) मजिस्ट्रेट के अलावा दो और सदस्य होते हैं, जिन्हें राज्य सरकार नियुक्त करती है।

पुणे के कल्याणी नगर इलाके में 18-19 मई की रात 17 साल के एक लड़के ने IT सेक्टर में काम करने वाले बाइक सवार युवक-युवती को टक्कर मारी थी, जिससे दोनों की मौत हो गई। घटना के 15 घंटे के भीतर जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड ने आरोपी को 7 शर्तों पर जमानत दे दी।

बोर्ड ने आरोपी को निबंध लिखने को कहा था

बोर्ड ने आरोपी को सड़क दुर्घटनाओं पर 300 शब्दों का निबंध लिखने, 15 दिनों तक ट्रैफिक पुलिस के साथ काम करने और शराब पीने की आदत के लिए काउंसिलिंग लेने को कहा था। बोर्ड के फैसले के खिलाफ पुणे पुलिस सेशन कोर्ट पहुंची।

पुलिस का कहना था नाबालिग आरोपी पर बालिग की तरह कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए, क्योंकि उसका अपराध गंभीर है। सेशन कोर्ट ने पुलिस को बोर्ड में रिव्यू पिटिशन देने को कहा। 22 मई को जुवेनाइल बोर्ड ने नाबालिग को फिर से तलब किया और उसे 5 जून तक के लिए बाल सुधार गृह भेज दिया।

इस मामले में नाबालिग के पिता, दादा, नाबालिग आरोपी की मेडिकल जांच करने वाले डॉक्टर्स और उसे शराब परोसने वाले दो पब के मालिक-मैनेजर सहित 10 लोगों को अब तक गिरफ्तार किया गया है।

नाबालिग के पिता को 21 मई और दादा को 25 मई को गिरफ्तार किया था। आरोपी का ब्लड सैंपल बदलने के आरोप में ससून अस्पताल के फॉरेंसिक मेडिसिन डिपार्टमेंट के प्रमुख डॉ तावरे, चीफ मेडिकल ऑफिसर डॉ श्रीहरि हलनोर और स्टाफ अतुल घाटकांबले को 27 मई को गिरफ्तार किया था।

डॉक्टर ने ब्लड सैंपल बदलने का आइडिया दिया था
पुलिस ने मंगलवार को बताया कि आरोपी का ब्लड सैंपल बदलने का आइडिया डॉ. तावरे का था। आरोपी के पिता विशाल अग्रवाल ने एक्सीडेंट के बाद डॉक्टर को 20 से ज्यादा बार कॉल की थी। उसने बेटे को बचाने के लिए डॉक्टर से मदद मांगी।

पुलिस के मुताबिक, ब्लड सैंपल बदले जा सकते हैं, यह कोई और नहीं सोच सकता था। यह डॉ. तावरे का ही आइडिया था। उसने आरोपी का ब्लड सैंपल किसी और से बदलवा दिया, ताकि जांच में शराब पीने की बात सामने न आए।

जांच में पता चला है कि ब्लड सैंपल बदलने के लिए डॉ. तावरे ने डॉ. हलनोर और घाटकांबले को 3 लाख रुपए दिए थे। डॉ. तावरे ने ये रुपए अपनी जेब से दिए या किसी और से लेकर दिए, इसकी जांच की जा रही है। साथ ही आरोपी का ब्लड सैंपल किसके ब्लड सैंपल से बदला गया, यह भी पता लगाया जा रहा है।

ब्लड सैंपल के हेरफेर की जांच को लेकर भी कमेटी गठित
नाबालिग आरोपी के बल्ड सैंपल में हेरफेर की जांच के लिए भी एक तीन सदस्यीय कमेटी बनाई गई है। महाराष्ट्र मेडिकल एजुकेशन के कमिश्नर राजीव निवतकर ने 27 मई को कमेटी के गठन का आदेश जारी किया। उन्होंने ससून अस्पताल के डीन डॉ. विनायक काले को जांच में सहयोग करने का आदेश दिया है।

कमेटी में जेजे ग्रुप ऑफ हॉस्पिटल्स की डीन डॉ. पल्लवी सपले, ग्रांट मेडिकल कॉलेज के फोरेंसिक मेडिसिन विभाग के प्रोफेसर डॉ. गजानन चव्हाण, छत्रपति संभाजी नगर सरकारी मेडिकल कॉलेज के स्पेशल ड्यूटी ऑफिसर डॉ. सुधीर चौधरी शामिल हैं। डॉ. पल्लवी सपले कमेटी की चेयरपर्सन हैं।

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