मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की रफ्तार अप्रैल में भी दमदार, बढ़ती मांग से नए ऑर्डर्स में इजाफा

नई दिल्ली: कारखानों में बने माल की अच्छी डिमांड के चलते अप्रैल में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर का दमखम बना रहा। सेक्टर की ग्रोथ कुछ नरम हुई, लेकिन कामकाजी हालात में जबरदस्त सुधार दिखा। इसमें पिछले साढ़े तीन वर्षों में दूसरा सबसे तेज सुधार दर्ज किया गया। बड़ी हुई डिमांड के चलते कंपनियों ने बड़े पैमाने पर कच्चे माल की खरीद की। अप्रैल में HSBC इंडिया मैन्युफैक्चरिंग परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (PMI) 58.8 पर आ गया, जो मार्च में 59.1 पर था। मार्च का लेवल पिछले 16 वर्षों का हाई था PMI का आंकड़ा 50 से ऊपर रहने का मतलब ग्रोथ होता है। इससे नीचे के आंकड़े से सुस्ती का पता चलता है।

HSBC में चीफ इंडिया इकॉनमिस्ट प्रांजल भंडारी ने कहा कि डिमांड मजबूत रहने से उत्पादन बढ़ा, हालांकि मार्च के मुकाबले कुछ सुस्ती रही। अप्रैल में मैन्युफैक्चरर्स के माल के लिए देसी-विदेशी खरीदारों के बीच अच्छी डिमांड रही। सर्वे रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों ने इस साल अभी के मुकाबले ज्यादा उत्पादन का अनुमान दिया है। अप्रैल में बिजनेस कॉन्फिडेंस भी इस उम्मीद पर मजबूत हुआ कि डिमांड अच्छी बनी रहेगी। मौजूदा डिमांड और आने वाले दिनों में इसमें संभावित बढ़ोतरी को देखते हुए कंपनियों ने मौजूदा वित्त वर्ष की पहली तिमाही की शुरुआत में और स्टाफ हायर किया। भंडारी ने कहा, ‘सप्लायरों के डिलीवरी टाइम में सुधार हुआ। इससे खरीदारी बढ़ी। इसके अलावा आने वाले दिनों के बेहतर रहने के अनुमान को देखते हुए कंपनियों ने कर्मचारियों को संख्या बढ़ाई।’

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