सौरभ शर्मा के साथी आरक्षक भी करते थे डमी पोस्टिंग, विभाग में थी धाक

ग्वालियर। मध्य प्रदेश परिवहन विभाग में आरक्षक रहे सौरभ शर्मा के साथ काम करने वाले चार साथी आरक्षक भी ट्रांसफर-पोस्टिंग के खेल में पूरी तरह सक्रिय थे। जिन-जिन चेक पोस्टों का ठेका सौरभ ने ले रखा था, ऐसी चेकपोस्टों पर प्रबंधन का काम ये साथी आरक्षक संभालते थे।

बताया जा रहा है कि सौरभ शर्मा के साथी डमी पोस्टिंग कराने में भी माहिर थे, चेक पोस्ट पर अधिकारी की तैनाती कागजों में कर दी जाती थी और मौके पर निजी व्यक्तियों से काम कराया जाता था। इस तरह वसूली के खेल को पूरे सेटअप के साथ चलाया जाता था।

परिवहन विभाग के चेक पोस्टों को चलाता था

इन चारों आरक्षक- धनंजय चौबे, हेमंत जाटव, नरेंद्र सिंह भदौरिया और गौरव पाराशर की पूरे परिवहन विभाग में धाक थी, जैसा ये चाहते थे वैसा हो जाता था। सौरभ शर्मा ने परिवहन विभाग से सेवानिवृत्ति तो ले ली थी, लेकिन इन्हीं चारों लोगों की दम पर वह परिवहन विभाग के चेक पोस्टों को चलाता था।

वॉट्सएप कॉलिंग पर करते थे बात

सौरभ शर्मा और यह चारों आरक्षकों से हमेशा आपस में वॉट्सएप कॉलिंग पर बातें करते थे। इन्होंने बातें करने के लिए पर्सनल नंबर ले रखे थे। तीन-चार वर्षो में इन चारों आरक्षकों की पद स्थापना अलग-अलग चेकपोस्टों पर रही और सौरभ से पूरा गठजोड़ था।

करोड़ों का माल बरामद किया

सौरभ विभाग से भले ही पिछले एक साल से दूर हो गया था, लेकिन वह विभाग में इन्हीं के जरिए अपने काम कराया करता था। वे चारों परिवहन विभाग में उसका प्रतिनिधित्व करते थे। बता दें कि पूर्व परिवहन आरक्षक सौरभ शर्मा के यहां लोकायुक्त की छापेमारी में करोड़ों का माल बरामद किया गया।

इसके करीबी चेतन सिंह गौर की गाड़ी जो आयकर की टीम ने पकड़ी, उसमें सोना और नकद रुपये मिले। इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय की ओर से भी केस दर्ज किया जा चुका है। इस पूरे मामले के बाद से परिवहन विभाग में हड़कंप मचा हुआ है।

सौरभ की नियुक्ति की फाइल आयुक्त ने मंगवाई

सौरभ शर्मा की अनुकंपा नियुक्ति विवादों में है, इसको लेकर लोकायुक्त की टीम भी यहां परिवहन मुख्यालय में आकर जानकारी जुटा ले गई है। परिवहन विभाग के प्रमुख डीपी गुप्ता ने सौरभ शर्मा की नियुक्ति की पूरी फाइल भोपाल मंगवाई है।

इस फाइल में नियुक्ति संबंधी दस्तावेजों की जांच की जा रही है कि कैसे सौरभ की इतनी आसानी से परिवहन विभाग में आरक्षक पद पर नियुक्ति हो गई। यह भी सामने आ चुका है कि सौरभ व उसकी मां ने नियुक्ति के दौरान जो शपथ पत्र दिए थे, उसमें झूठी जानकारी दी थी कि परिवार में कोई और सरकारी नौकरी में नहीं है।

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