4 मजदूर मरे, लोग मुर्गी से ऑक्सीजन चेक करते रहे:मोमबत्ती जलाकर देखा सांस ले पाएंगे या नहीं, 2 सिलेंडर्स लेकर पटना पुलिस आई, एक्सपर्ट नहीं

पटना के बाढ़ में कुरई बाग गांव में मातम है। चार युवाओं की मौत से लोग सदमे में हैं। कई घरों में चूल्हा नहीं जला। मरने वालों में तीन भाई और एक पड़ोसी शामिल है। सभी की उम्र 22 से 30 साल थी। ये चारों बुधवार को सेप्टिक टैंक की सेंटरिंग खोलने गए थे। टंकी के अंदर गैस से दम घुटने से सभी की जान चली गई।

राजधानी से 70 किलोमीटर दूर हुए हादसे के बाद पुलिस तो पहुंची, लेकिन कोई एक्सपर्ट नहीं। न ही रेस्क्यू के लिए जरूरी संसाधन जुटाए गए। स्थानीय लोग जुगाड़ से ये चेक करते रहे कि अंदर जहरीली गैस खत्म हुई या नहीं। इसके लिए लोगों ने पहले एक मुर्गी को बांध कर लटकाया, वो मर गई।

गैस बाहर निकल जाए इसके लिए दीवार तोड़ी गई। पंखा चलाकर जहरीली गैस को कम करने की कोशिश की गई। बाद में मोमबत्ती जलाकर ऑक्सीजन चेक किया गया। मोमबत्ती नहीं बुझी तो एक ग्रामीण ने हिम्मत दिखाई और टंकी के अंदर गया। जिसके बाद चारों मजदूरों को बाहर निकाला गया। आनन-फानन सभी अस्पताल ले जाया गया, लेकिन किसी को भी बचाया नहीं जा सका।

मरने वालों में बिट्टू कुमार ( 22), भूना ( 30), पवन (25), जोगन (25) के रूप में हुई है। ये सभी मजदूर पुराई बाग के ही रहने वाले थे। परिजनों ने बताया कि सेप्टिक टैंक की सेंटरिंग खोलने के लिए सबसे पहले भोला सीढ़ी के सहारे अंदर गया, कुछ ही देर में उसकी आवाज आनी बंद हो गई। इसके बाद एक-एक कर बाकी उतरे, सभी अंदर ही फंस गए। गोपाल को अंदर जाने से लोगों ने रोका, लेकिन उसने कहा कि मेरे भाई अंदर हैं, और नीचे उतर गया।

ऑक्सीजन सिलेंडर कम भेजने का आरोप

ग्रामीणों का कहना था कि घटनास्थल पर प्रशासन ने दो ही ऑक्सीजन सिलेंडर भेजा था। जबकि जरूरत ज्यादा की थी। बाहर निकाले जाते ही सभी की मौत हो चुकी थी। किसी तरह से प्रशासन की मदद से सभी को अनुमंडल अस्पताल लाया गया। इसके बाद यहां सभी को मृत घोषित कर दिया गया। एंबुलेंस नहीं रहने के कारण दो लोगों को प्रशासन के वाहन में लोड कर अनुमंडल अस्पताल में लाया गया था। इस दौरान कुछ ग्रामीण ऑक्सीजन सिलेंडर को लेकर एसडीएम से उलझ गए। ग्रामीणों ने अधिकारियों को खरी खोटी सुनाई।

दो महीने से बंद था सेप्टिक टैंक

स्थानीय लोगों के मुताबिक पिछले दो महीने से सेप्टिक टैंक बंद था। हालांकि, सेप्टिक टैंक में कुछ छेद छोड़ दिए जाते हैं। लेकिन, इस टैंक में नहीं छोड़ा हुआ था। बुधवार को सेप्टिक टैंक खोला गया। एक-एक कर मजदूर जाते रहे और बेहोश हो कर गिर गए। अंदर पानी जमा होने की वजह से डूब कर मौत हो गई।

क्या था मामला

पटना के बाढ़ थाने के पुरायबाग में बुधवार को 4 लोग सेप्टिक टैंक की सेंटरिंग खोलने उतरे थे। मृतक पवन के भतीजे नीतीश कुमार के घर का निर्माण कार्य चल रहा था। घर का काम पूरा हो चुका था, बस टंकी की सेंटरिंग खोलना बाकी था।

बुधवार को इसी की सेंटरिंग खोली जा रही थी। चार मजदूरों की टंकी में फंसने से मौत हो गई। इनमें तीन चचेरे भाई हैं, जबकि एक पड़ोसी है। बाढ़ के कुरई बाग गांव में अरविंद कुमार के घर पर लगभग 10 फीट गहरी टंकी बनाई गई थी।

सेप्टिक टैंक में सफाई का इन बातों का रखें ध्यान

सेप्टिक टैंक की मैनुअल तरीके से सफाई या किसी अन्य कारण से खोलने पर आधा घंटा तक ढक्कन हटाकर इंतजार करना चाहिए।

जहरीली गैस है या नहीं, इसकी जांच करने के लिए माचिस की जलती हुई तीली डालकर देखना चाहिए। अगर आग लग जाए तो समझ लें गैस है।

मैनहोल को खुला छोड़ने के बाद उसमें पानी का छिड़काव करना चाहिए। टॉर्च लेना जाना भी जरूरी है

सफाई के लिए उतरे कर्मचारी मुंह पर आक्सीजन मास्क और सेफ्टी बेल्ट जरूर लगाएं। कमर में रस्सी जरूर बांधें, ताकि इमरजेंसी में ऊपर खड़ा साथी उन्हें फौरन बाहर निकाल सके।

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