4 साल में एमपी से 47 हजार बच्चियां गायब:इंदौर के बाणगंगा और लसूड़िया में सबसे ज्यादा मिसिंग

बेटी के घर से जाने के 15 दिन तक कुछ खाया ही नहीं। काम पर भी जाना बंद कर दिया था। दूसरे बच्चों का ध्यान रखना है, इसलिए अब कंपनी में काम कर रही हूं। हमने इंदौर में आसपास उसकी तलाश की, लेकिन पता नहीं चला। उसके पास फोन भी नहीं है।

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ये कहना है इंदौर की रेखा (बदला हुआ नाम) का, रेखा की बेटी करीब एक महीने पहले घर से बिना बताए चली गई। लेकिन आज तक उसका कोई पता नहीं चल सका है। बेटी की याद में मां आज भी रो रही है। माता-पिता ने बताया कि जिसके साथ वह पहले गई थी उस पर केस दर्ज कराया था। जिस दिन वह गई उसके तीन दिन बाद वह जेल से बाहर आने वाला था।

इंदौर में तो वह हमारे पास बहुत अच्छे से रह रही थी। 8वीं के बाद उसने पढ़ाई नहीं की। मैं अपने बच्चे का एडमिशन कराने स्कूल गई थी। पिता काम पर गए थे। उसने कुछ बोला भी नहीं और चली गई। हमारी बेटी कहीं भी रहे, बस हमें ये पता चल जाए कि वह वहां ठीक है। अगर वह दूसरी जगह भी रहना चाहती है तो हमे कोई दिक्कत भी नहीं है।

दूसरी बार उसे कहा ढूंढें, कहां जाएं, किससे पूछें। सबसे बड़ी दिक्कत तो ये है कि ढूंढें तो ढूंढें कहां। मोबाइल नंबर भी नहीं है। हमारे सामने किसी से बात भी नहीं करती थी…।

प्रदेश में सबसे ज्यादा गुमशुदगी के मामले इंदौर से

प्रदेश का ये पहला मामला नहीं है जब कोई बच्ची अचानक ही घर से लापता हुई हो और वर्षों तो उसका कोई सुराग न मिले। दरअसल, विधानसभा में कांग्रेस विधायक सचिन यादव द्वारा पूछे गए सवाल में चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं।

विधायक यादव के सवालों पर मिले जवाब के मुताबिक मप्र में बीते साढे़ चार सालों में करीब 58 हजार से ज्यादा बच्चे गुम हुए हैं। इनमें 47 हजार बेटियां और 11 हजार बेटे गायब हुए हैं। बच्चों के गुम होने की जो जानकारी विधानसभा में दी गई है। उसमें ये सामने आया है कि सबसे ज्यादा बच्चे इंदौर से गायब हो रहे हैं।

इंदौर शहर के जिन थानों से बच्चे गायब हो रहे हैं उनमें, बाणगंगा थाना क्षेत्र से सबसे ज्यादा 449 बेटियां गुम हुई हैं। दूसरे नंबर पर लसूडिया से 250, चंदन नगर से 220, आजाद नगर से 178, द्वारका पुरी से 168 बेटियां गुम हुई हैं। बच्चियों के गुम होने के मामले में धार जिला दूसरे नंबर पर है।

लसूडिया थाना क्षेत्र के राहुल गांधी नगर में रहने वाले एक परिवार की 16 साल की बेटी घर से अचानक लापता हो गई। परिवार ने इंदौर के साथ ही जिस गांव में वे रहते थे, वहां भी उसकी तलाश की, लेकिन बेटी का पता नहीं चला।

हालत ये हो गई कि बेटी के गम में माता-पिता का खाना और काम पर जाना तक छूट गया था। उसे लापता हुए 1 महीना हो गए। मजबूरी में माता-पिता दोनों ही अपने-अपने काम पर जाने तो लगे, लेकिन उनकी आंखें हमेशा बेटी को तलाशती रहती हैं।

पुलिस ने शिकायत दर्ज करने से मना किया लापता बच्ची के पिता ने बताया कि उनकी बेटी की उम्र 16 साल है। उसके लापता होने का बाद उसे जहां-जहां संभव हो सकता था वहां उसकी तलाश की, लेकिन उसका पता नहीं चला। रिश्तेदारों के यहां भी पूछ लिया। जब उसका कहीं पता नहीं चला तो मैं पुलिस की मदद लेने के लिए थाने गया।

रात में पुलिस ने कहा कि सुबह मकान मालिक को लेकर आना। सुबह मकान मालिक के साथ पहुंचा तो पुलिस ने हमारी रिपोर्ट लिखी। पुलिस वालों ने कहा कि हम आपकी बेटी को तलाशने की कोशिश करेंगे। अगर आपको पता चले तो हमें भी बताना। हम भी तलाश कर रहे है, आप भी तलाश करो। पिता ने कहा-

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दो-तीन दिन पहले भी मैं थाने गया था। पुलिसवालों ने कहा कि हम कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने पूछा कि किसी पर शंका है क्या ? हमने कहा कि हमको पता हो तो हम बताएं न।

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एक बार पहले भी गई थी, इस बार कहीं पता नहीं परिवार ने बताया कि रंगपंचमी के दौरान हम गांव में थे। तब भी वह कहीं लापता हो गई थी। कुछ दिनों बाद उसका पता चला। उसने ही फोन कर बताया था। जिसके बाद हम उसे वापस लेकर आए। जिसके साथ गई थी, उसकी शिकायत थाने में की थी। इसके बाद हम इंदौर आ गए। यहां पर वह अच्छे से रह रही थी। फिर अचानक वह 5 जुलाई को वह लापता हो गई।

पिता ने बताया कि हमें उसी पर शंका है, लेकिन हमने वहां भी पता किया, पर उसका पता नहीं चला। बेटी जिस दिन गई उस दिन मैं ड्यूटी पर गया था। सुबह घर पर कोई नहीं था, पत्नी भी काम पर गई थी। ड्यूटी से आया तो कमरे का गेट खुला हुआ था।

काफी देर बाद भी नहीं आई तो पत्नी को कॉल करके पूछा उसे भी जानकारी नहीं थी। आसपास तलाश की, लेकिन उसका पता नहीं चला। एक जगह सीसीटीवी कैमरे में देखा तो वह जाते हुए दिखी, लेकिन वहां से कहां गई उसका पता नहीं चला। मेरे 4 बच्चे हैं। 3 लड़की और 1 लड़का है। जो बेटी लापता हुई है, वह दूसरे नंबर की है।

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