भोपाल में बदलेगा 54 साल पुराना सायरन सिस्टम:मॉकड्रिल के दौरान बुधवार को शहर के कई इलाकों में नहीं सुनाई दिया था

युद्ध या आपात स्थिति में लोगों को सतर्क करने के लिए भोपाल में नया सायरन सिस्टम लगाया जाएगा। यह सायरन शहर के प्रमुख स्थानों और बाजारों में लगाया जाएगा। इसका पूरा कंट्रोल प्रशासन के पास होगा। यह सिस्टम कंट्रोल एंड कमांड सेंटर से जुड़ा रहेगा।

बुधवार को हुई मॉक ड्रिल में सभी इलाकों में सायरन नहीं सुनाई दिए। इसी कारण यह फैसला लिया गया है। कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह ने बताया कि इस पर पुलिस कमिश्नर से बैठक कर जल्द निर्णय होगा। गौरतलब है कि भोपाल में 1971 में पाक से युद्ध के समय लगाया गया सायरन सिस्टम अब दम तोड़ चुका है। सायरन सिस्टम पूरे शहर में एक साथ ऑपरेट हो सकेगा। इससे एक सेकंड में ही लोगों को इमरजेंसी की सूचना मिल जाएगी। लोगों को जागरुक करने के लिए अभियान चलाया जाएगा।

स्कूल-कॉलेज में छात्र-छात्राओं को सायरन का मतलब और व्यवहार की जानकारी दी जाएगी। मॉक ड्रिल में कई जगह लाइट बंद नहीं हुई। इसलिए सिस्टम को और बेहतर बनाया जाएगा। भेल और अन्य फैक्ट्रियों को भी सायरन सिस्टम से जोड़ा जा सकता है। इसके साथ आईटीएम के पब्लिक अनाउंसमेंट सिस्टम का भी उपयोग किया जाएगा। स्कूल-कॉलेज में इसके लिए जागरुकता अभियान भी चलाया जाएगा।

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