मतदाता सूची में नाम जोड़ने-हटाने के 8.90 लाख आवेदन… कांग्रेस ने लगाया आंकड़े छुपाने का आरोप, जीतू पटवारी ने दिया ज्ञापन

भोपाल। प्रदेश में मतदाता सूची के शुद्धीकरण के लिए चलाए गए विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआइआर) का दूसरा चरण गुरुवार को पूरा हो गया। 23 दिसंबर से 20 जनवरी तक मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने के लिए दावा-आपत्ति लिए गए। इस अवधि में नाम जोड़ने के लिए 7 लाख 95 हजार 102 और नाम हटाने के लिए 95 हजार 210 आवेदन प्राप्त हुए।

भाजपा के बूथ लेवल एजेंटों (बीएलए) ने नाम जोड़ने के लिए 4,291 और हटाने के लिए 7,867 आवेदन दिए। कांग्रेस के बीएलए ने नाम जोड़ने के लिए 359 और हटाने के लिए 45 आवेदन दिए। जिलों में व्यक्तिगत रूप से प्राप्त आवेदनों को मिलाकर यह संख्या बढ़ेगी।

प्रदेश कांग्रेस ने चुनाव आयोग पर आंकड़े छुपाने का आरोप लगाया है। साथ ही एसआइआर के काम में लगे अधिकारियों-कर्मचारियों को चेताया कि इस काम में गड़बड़ी हुई तो कोई नहीं बचा पाएगा। मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन 21 फरवरी को होगा। प्रदेश में 22 साल बाद मतदाता सूची के शुद्धीकरण के लिए विशेष गहन पुनरीक्षण कराया गया। इसमें 42 लाख से अधिक अपात्र मतदाताओं के नाम सूची से हटाकर प्रारूप सूची का प्रकाशन किया गया। पात्रों से नाम जुड़वाने और अपात्रों के नाम हटाने के लिए आवेदन लिए गए।

राजनीतिक दलों ने बूथ लेवल एजेंट नियुक्त किए और आवेदन करवाए, लेकिन इनकी संख्या मात्र 12,595 रही। हालांकि, नाम जुड़वाने और हटाने के लिए कितनी संख्या है, यह जिलों से आकंड़े आने के बाद अगले सप्ताह तक स्पष्ट हो पाएगा। वहीं, व्यक्तिगत रूप से नाम जुड़वाने के लिए 7,95,102 और हटाने के लिए 95,210 आवेदन प्राप्त हुए।

जीतू पटवारी ने की मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी से मुलाकात

उधर, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने प्रतिनिधिमंडल के साथ मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय पहुंचकर मतदाता सूची के काम में गड़बड़ी का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि 11 लाख नाम जोड़ने और साथ ही लाखों कांग्रेस समर्थक मतदाताओं के नाम हटाए जाने की शिकायतें मिली हैं। हमारे जिला अध्यक्षों ने जिला निर्वाचन अधिकारियों को ज्ञापन दिए हैं।

नियमानुसार एक व्यक्ति सीमित संख्या में ही आपत्तियां दर्ज कर सकता है, लेकिन कई जिलों से यह तथ्य सामने आए हैं कि एक ही व्यक्ति द्वारा 200-200 मतदाताओं के नाम हटवाने के लिए आपत्तियां दर्ज कराई हैं। इससे साफ है कि बीएलओ से मिलीभगत करके भाजपा के नेता व कार्यकर्ताओं द्वारा नाम हटवाने के लिए फार्म भरवाए गए। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष एवं उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की।

अधिकारियों-कर्मचारियों के चेताया

प्रदेश अध्यक्ष ने ज्ञापन देने के बाद मीडिया से चर्चा में कहा कि राजस्थान सहित कई राज्यों में भाजपा के लोग एससी-एसटी, ओबीसी और अल्पसंख्यकों के नाम कटवा रहे हैं। 95 प्रतिशत बीएलओ ईमानदारी से काम कर रहे हैं। पांच प्रतिशत भाजपा के दबाव-प्रभाव में दुरुपयोग कर रहे हैं। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि एक भी नाम गलत काटा या जोड़ा तो एफआइआर कराएंगे। सीआर (गोपनीय चरित्रावली) बिगड़ जाएगी। भविष्य के लिए कोई भाजपा नेता साथ देने नहीं आएगा, इसलिए ईमानदारी से काम करें।

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