भोपाल में आरजीपीवी की दादागीरी:दबाव बनाकर निजी कॉलेजों से कराता है टूर्नामेंट, जबकि जिम्मा उसका

राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (आरजीपीवी) की निजी कॉलेजों पर दादागीरी है। ये इल्जाम नहीं है। तथ्य है। वह दबाव बनाकर निजी कॉलेजों से खेल आयोजन कराता है जबकि यह जिम्मा उसका ही है। ऑल इंडिया टूर्नामेंट में जो टीमें आरजीपीवी को भेजना चाहिए वह कॉलेजों के मत्थे मढ़ रहा है। इस कारण पिछले तीन सालों से कॉलेजों के लाखों के बिल आरजीपीवी में अटके हुए हैं।

बार-बार की फरियाद करने का असर नहीं होने पर कॉलेजों ने इस बार खेल प्रतियोगिताएं कराने से ही हाथ खींच लिए। इस कारण चालू वर्ष में आरजीपीवी एक भी टूर्नामेंट आयोजित नहीं कर सकी। वहीं, खिलाड़ी खुद को ठगा सा महसूस कर रहे हैं क्योंकि वो सालाना 220 रुपए स्पोर्ट्स फीस के रूप में जमा करते हैं लेकिन उन्हें खेलने को नहीं मिल रहा है।

आरजीपीवी ने प्रदेश के सभी संभागों को सात नोडल में बांट रखा है। नोडल स्तर के टूर्नामेंट के लिए 10 हजार रुपए और फिर स्टेट टूर्नामेंट के लिए 60 हजार रुपए का बजट प्रावधान भी कर रखा है। जिस भी कॉलेज में टूर्नामेंट होते हैं ,आरजीपीवी यह राशि उसे आवंटित करती है। आरजीपीवी के कैलेंडर में 45 खेल हैं। इस तरह 45 आयोजन नोडल के और इतने ही स्टेट के होते हैं।

स्टेट टूर्नामेंट के बाद आरजीपीवी की टीम चयनित होती है। वह फिर ऑल इंडिया इंटर यूनिवर्सिटी में भाग लेने जाती है। इसमें टीमों को किट, टीए, डीए, किराया, परिवहन यह सब देना होता है। यह जिम्मेदारी आरजीपीवी को उठाना चाहिए। सभी यूनिवर्सिटी ऐसा ही करती भी हैं और कर भी रही हैं। इसका उदाहरण भोपाल की बरकतउल्ला यूनिवर्सिटी है। यह स्वयं अपनी टीम भेजती है, और सारा खर्च खुद उठाती है, लेकिन आरजीपीवी निजी कॉलेजों के मत्थे मढ़ दे रही है। पिछले तीन साल से उसने संबंधित कॉलेजों को भुगतान भी नहीं किया है।

मनमर्जी से हटाए नौ खेल

पिछले वर्ष आरजीपीवी ने मनमर्जी से 9 खेल अपने कैलेंडर से हटा दिए। संबंधित खेलों के खिलाड़ियों ने शिकायत की फिर भी ध्यान नहीं दिया गया। एथलेटिक्स के खिलाड़ियों को भी आल इंडिया इंटर यूनिवर्सिटी में जाने से यह कहकर रोक दिया कि परफार्मेंस तय मापदंड से नीचे रहा है।

वहीं, नियम कहता है कि जो स्टेट में टॉप पर रहा हो चाहे उसकी टाइमिंग और कितनी भी हो वह क्वालिफाई होता है और वह आलइंडिया खेलने का हकदार रहता है। लेकिन उसे भी रोका जा रहा है। यह हाल तब है जबकि उसने खुद का नेशनल लेवल का स्पोर्ट्स इन्फ्रास्ट्रक्चर तैयार कर रखा है। उसके पास वो सभी खेल सुविधाएं हैं, जो आल इंडिया लेवल के टूर्नामेंट के लिए जरूरी होती है।

इन कॉलेजो के रोके पेमेंट

ज्ञान सागर कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग सागर, बीएम कॉलेज आफ टेक्नोलॉजी इंदौर, लक्ष्मी नारायण कॉलेज ऑफ टेक्नोलॉजी भोपाल, मित्तल ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूट भोपाल, महाकाल इंस्टीट्यूटी ऑफ टेक्नोलॉजी उज्जैन, विंध्य इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस सतना, सागर इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नॉलाजी भोपाल, रामाकृष्ण कॉलेज सतना, माधव इंस्टीट्यूट ग्वालियर, राधारमण कॉलेज भोपाल, आईईएस ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस भोपाल, बाबूलाल ताराबाई इंस्टीट्यूट सागर, चमेली देवी इंस्टीट्यूट आफ फार्मेसी इंदौर, एसएटी आई विदिशा, जीएसआरटीएस इंदौर, व्हीएनएस भोपाल, टीआईटी भोपाल, ओरिएंटल भोपाल और एलएनसीटी भोपाल।

पेमेंट की समस्या दूर करेंगे

^हां, पिछले तीन साल से कॉलेजों के पेमेंट रुके हैं। समस्या का जल्दी हल निकल आएगा। साल भर से अफरा तफरी का माहौल रहा है। यह भी एक कारण है। मैं कोशिश कर रहा हूं कि पेमेंट हो जाए।

केटी चतुर्वेदी, डीन स्टूडेंट वेलफेयर आरजीपीवी

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