मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी ने निक्षय सूरजपुर के लिए सपथ दिलाई

सूरजपुर। क्षय रोग को समूल रूप से नष्ट करने से टीबी मुक्त भारत का निर्माण होगा। इसका पहला चरण टीबी मुक्त पंचायत से शुरू होता है।
एक हजार के जनसंख्या में तीस लोगों का जांच अनिवार्य रूप से करवाना है। इस कार्य की सफलता के लिए सामुदायिक सहभागिता और जागरूकता आवश्यक है। जब भी और जहां भी सामुदायिक बैठकें हो रही है वहां टीबी की चर्चा जरूर करें। यह बातें मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ कपीलदेव पैकरा ने एक कार्यक्रम के दौरान कहते हुए लोगों को सपथ दिलाई। जिला क्षय उन्मूलन अधिकारी डॉ जे एस आर सरूता ने कहा कि किसी भी कार्य को सफल बनाने के लिए स्वविवेक अति आवश्यक है। आप जहां भी जाये मौका का तलाश करें तथा समयानुकूल वातावरण का स्वयं निर्माण करे और अपनी काम की बातें जरूर करें। पिरामल फाऊंडेशन कुछ ऐसा ही करता है। इन्हें विशेष रूप से आमंत्रण नहीं किया जाता पर टीबी मुक्त भारत के लिए कार्य कर रहे हैं तो अपने अनुकूल माहौल बना लेते हैं जनसमस्या निवारण शिविर में भी टीबी मुक्त भारत की बातें मंच कर रहे हैं। ऐसा ही कार्य सभी को करना है।
दैनिक कार्य तो सभी को करना है परन्तु थोड़ा हटकर सोचिए। जिला कार्यक्रम समन्वयक संजीत कुमार ने कहा कि नियमित गतिविधियों का क्रम रूकना नहीं चाहिए। नि क्षय निरामय कार्यक्रम का सप्ताहिक समीक्षा राज्य और केंद्र से किया जा रहा है।
पिरामल फाऊंडेशन के जिला कार्यक्रम अधिकारी महेन्द्र तिवारी ने कहा कि अन्तरविभागीय विभागों से बेहतर समन्वय बनाएं और उसका लाभ उठायें अच्छा परिणाम आयेगा।
लेप्रा सोसायटी के रितेश गुप्ता ने कहा कि हाईरिस्क एरिया, हाईरिस्क कम्युनिटी का पहचान कर प्राथमिकता के तौर पर रणनीति बनाये।
पिरामल फाऊंडेशन के जिला कार्यक्रम समन्वयक राज नारायण द्विवेदी ने कार्यक्रम का संचालन करते हुए कहा कि समस्या का समाधान हमें स्वयं ढ़ुढ़ना होगा।
स्थानीय स्तर की परिस्थितियां अलग अलग होती। यदि कोई व्यक्ति आपकी बातें नहीं मानता या सुनना नहीं चाहता तो जिले के अधिकारी भी वहां जाकर कुछ नहीं कर सकते।
ऐसी समस्या का समाधान उसी आस-पास ढ़ुढ़ना होगा। वह व्यक्ति किसी न किसी का बातें सुनता होगा उससे उक्त व्यक्ति का काउंसलिंग करवाना सार्थक होगा।





