सौरभ शर्मा की काली कमाई के महाराष्ट्र से जुड़े तार… छापे में ईडी को मिली 42 लाख नकदी, 12 लाख और 9.9 किग्रा चांदी

भोपाल : मध्य प्रदेश परिवहन विभाग के पूर्व आरक्षक सौरभ शर्मा की काली कमाई के तार पुणे (महाराष्ट्र) से भी जुड़ गए हैं। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की टीम ने भोपाल और ग्वालियर के अतिरिक्त पुणे में भी आठ स्थानों पर छापेमारी की थी।सूत्रों का कहना कि सौरभ के पुणे में निवेश का पता चला था। इस कारण वहां एक जगह पर छापा मारा गया। सभी जगह मिलाकर टीम को 42 लाख रुपये की नकदी मिली है। इनमें से अघोषित 12 लाख रुपये जब्त कर लिए गए हैं। बाकी 30 लाख रुपये फ्रीज किए गए हैं यानी इसके उपयोग पर रोक लगा दी गई है। जांच पूरी होने के बाद ही इस राशि को मुक्त या जब्त करने का निर्णय लिया जाएगा।
नवोदय कैंसर अस्पताल में सौरभ की अवैध कमाई का निवेश
नवोदय कैंसर अस्पताल में सौरभ की अवैध कमाई का पैसा लगे होने के संदेह में छापा मारा था। सभी जगह से ईडी निवेश ने संबंधी दस्तावेज जब्त किए थे, जिनका परीक्षण किया जा रहा है। सौरभ के विरुद्ध लोकायुक्त पुलिस में आय से अधिक संपत्ति के मामले में दर्ज एफआईआर के आधार पर ईडी ने प्रकरण कायम किया है।
इसकी जांच में ईडी को पता चला कि सौरभ ने अपने परिवार के सदस्यों और संबंधित फर्मों व कंपनियों के नाम पर करोड़ों रुपये की अनुपातहीन संपत्ति अर्जित की है।इस संदेह में जांच एजेंसी ने पहले 27 दिसंबर को भोपाल, ग्वालियर और जबलपुर में आठ स्थानों पर छापा मारा था। इसमें सौरभ और रिश्तेदारों के आवास व प्रतिष्ठान शामिल थे। इसके बाद अब दोबारा छापेमारी की।
मामले में धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के अंतर्गत ईडी जांच कर रही है। सौरभ के करीबी चेतन गौर सहित कुछ लोगों से ईडी पूछताछ की जा चुकी है। अब जांच एजेंसी को सौरभ की प्रतीक्षा है। उसे गिरफ्तार कर ईडी पूछताछ करने की तैयारी में है। उससे अहम जानकारियां मिल सकती हैं।
अभी बाकी हैं और भी बड़े खुलासे
इसके अतिरिक्त सभी जगह से 9.9 किलो चांदी भी जब्त की गई है, जिसकी कीमत नौ लाख 17 हजार आंकी गई है। तलाशी के दौरान डिजिटल डिवाइस और संपत्ति के दस्तावेज भी जब्त किए गए।
इनकी जांच में बड़ी जानकारियां सामने आ सकती हैं। ईडी ने ग्वालियर में फर्म एवं सोसायटी के पूर्व उप पंजीयक व अधिवक्ता केके अरोरा और भोपाल में कैंसर विशेषज्ञ डॉ. श्याम अग्रवाल के यहां भी छापा मारा था।
केके अरोरा को सौरभ के मौसेरे बहनोई विनय हसवानी का करीबी बताया जा रहा है। आशंका है कि सौरभ ने अपनी काली कमाई को ठिकाने लगाने के लिए इनका इस्तेमाल किया है।





