देश का पहला MRI, वाजपेयी की सर्जरी और अमिताभ का इलाज… टाटा की झोली में मुंबई का मशहूर अस्पताल

नई दिल्ली: देश का सबसे बड़ा औद्योगिक घराना टाटा ग्रुप हेल्थकेयर सेक्टर में अपनी पकड़ मजबूत करने जा रहा है। टाटा ग्रुप मुंबई के मशहूर ब्रीच कैंडी हॉस्पिटल में 500 करोड़ रुपये का निवेश करने की तैयारी में है। इस निवेश से टाटा ग्रुप 275 बिस्तरों वाले इस मल्टी-स्पेशलिटी अस्पताल में सबसे बड़ा फाइनेंशियल पार्टनर बन जाएगा। साथ ही टाटा ग्रुप को 14 मेंबर्स वाले मौजूदा बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज में अपने तीन प्रतिनिधि नियुक्त करने का अधिकार मिलेगा। टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन 1 अक्टूबर 2025 से ब्रीच कैंडी हॉस्पिटल ट्रस्ट के चेयरमैन बनेंगे। वह दिग्गज बैंकर दीपक पारेख की जगह लेंगे।

सूत्रों का कहना है कि अस्पताल का नाम वही रहेगा, लेकिन टाटा ब्रांड को किसी न किसी रूप में इसके साथ जोड़ा जाएगा। एक संभावना यह है कि अस्पताल का नाम Breach Candy, A Tata Sons Associate हो सकता है। इस फंडिंग से अस्पताल के बुनियादी ढांचे और तकनीक में सुधार होगा। यह अस्पताल पारंपरिक रूप से अमीर और प्रसिद्ध लोगों की पसंद रहा है। ब्रीच कैंडी के मैनेजिंग ट्रस्टी उदय किलाचंद ने कहा कि रतन टाटा का इस संस्थान से गहरा संबंध था जिसे अब टाटा ने एक तरह से औपचारिक रूप दे दिया है।

पहली एमआरआई फैसिलिटी

टाटा का मुंबई में यह हेल्थकेयर में यह तीसरा प्रोजेक्ट है। ग्रुप परेल में कैंसर रिसर्च और इलाज के लिए टाटा मेमोरियल सेंटर चला रहा है। साथ ही उसने पिछले साल महालक्ष्मी में एक पशु अस्पताल स्थापित किया था। 1998 में भारत की पहली MRI फैसिलिटी शुरू करने वाले ब्रीच कैंडी अस्पताल को 1946 में यूरोपियन हॉस्पिटल ट्रस्ट ने स्थापित कियाथा। इसे आजादी से पहले भारत में काम करने वाली यूरोपीय कंपनियों जैसे यूनिलीवर, फोर्ब्स एंड क्रॉम्प्टन ग्रीव्स से वित्तीय सहायता मिली थी। इन कंपनियों ने बोर्ड में अपने प्रतिनिधियों के माध्यम से अस्पताल के साथ संबंध बनाए रखे हैं।ब्रिटिश आर्किटेक्ट क्लाउड बैटली ने इसे 25-बेड वाले नर्सिंग होम के रूप में डिजाइन किया गया था। इसका स्वामित्व ब्रीच कैंडी हॉस्पिटल ट्रस्ट को हस्तांतरित कर दिया गया जो भारतीय ट्रस्ट अधिनियम और कंपनी अधिनियम की धारा 8 के तहत पंजीकृत है। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की घुटने की सर्जरी इसी अस्पताल में हुई थी। सुपरस्टार अमिताभ बच्चन जुलाई 1982 में फिल्म कुली की शूटिंग के दौरान जब घायल हुए थे तो उनका इलाज इसी अस्पताल में हुआ था। रिलायंस ग्रुप के संस्थापक धीरूभाई अंबानी का निधन भी जुलाई 2002 में इसी अस्पताल में हुआ था। रतन टाटा ने पिछले साल अक्टूबर में इसी हॉस्पिटल में अंतिम सांस ली थी।

कौन-कौन है ट्रस्ट में

चंद्रशेखरन के कार्यभार संभालने के बाद भी पारेख इस हॉस्पिटल के ट्रस्टी बने रहेंगे। अस्पताल के ट्रस्टियों में महिंद्रा ग्रुप के चेयरमैन आनंद महिंद्रा, गोदरेज एंड बॉयस के जमशेद गोदरेज, आदित्य बिड़ला ग्रुप के चेयरमैन कुमार बिड़ला की मां राजश्री बिड़ला, एम पल्लोनजी ग्रुप के निदेशक और टाटा ट्रस्ट के ट्रस्टी मेहली मिस्त्री, शापूरजी पल्लोनजी ग्रुप के पल्लोन मिस्त्री, हिंदुस्तान यूनिलीवर के सीईओ रोहित जावा और टीसीएस के पूर्व सीईओ एस रामादुरई शामिल हैं।

ब्रीच कैंडी के सीईओ अनिरुद्ध कोहली ने बताया कि टाटा की फंडिंग का उपयोग अस्पताल के बुनियादी ढांचे को बेहतर बनाने के लिए किया जाएगा। इसमें अत्याधुनिक उपकरण और तकनीक शामिल हैं। अस्पताल में वर्तमान में तीन इमारतें हैं और एक अतिरिक्त टावर का निर्माण करने की योजना है। अडानी ग्रुप की भी कांदिवली में 1,000 बिस्तरों वाला एक अस्पताल और मेडिकल कॉलेज बनाने की योजना है। टाटा और अडानी के रिलायंस, हिंदुजा, बिड़ला और रहेजा जैसे ग्रुप भी मुंबई की हेल्थकेयर इंडस्ट्री में एक्टिव हैं।

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