युजवेंद्र चहल धनश्री वर्मा तलाक: क्‍या एलि‍मनी की रकम पर लगता है टैक्‍स, गुजारा-भत्ता कैसे तय होता है?

नई दिल्‍ली: क्रिकेटर युजवेंद्र चहल और कोरियोग्राफर धनश्री वर्मा के तलाक की प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ गई है। बॉम्बे हाई कोर्ट ने बांद्रा फैमिली कोर्ट को निर्देश दिया है कि 20 मार्च तक यानी आज उनके तलाक को अंतिम रूप दे दिया जाए। कोर्ट ने आपसी सहमति और जून 2022 से उनके अलग रहने के कारण अनिवार्य छह महीने की कूलिंग-ऑफ अवधि को माफ कर दिया है। समझौते के तहत चहल धनश्री वर्मा को 4.75 करोड़ रुपये की एलीमनी (तलाक के बाद दी जाने वाली राशि) देंगे। उन्होंने पहले ही 2.37 करोड़ रुपये ट्रांसफर कर दिए हैं। बाकी रकम तलाक के बाद दी जाएगी। इस मामले ने भारत में एलि‍मनी कानूनों पर फिर से ध्यान खींचा है, खासकर कामकाजी महिलाओं के लिए।

भारत में एलि‍मनी कैसे तय होती है?

यह एक बड़ा सवाल है। एलि‍मनी को गुजारा भत्ता भी कहते हैं। यह एक कानूनी जिम्मेदारी है। इसके तहत तलाक या अलगाव के बाद पति या पत्नी को दूसरे को वित्तीय सहायता देनी होती है। पहले यह माना जाता था कि यह उन पत्नियों के लिए है जिन्होंने शादी और परिवार के लिए अपनी वित्तीय स्वतंत्रता का त्याग किया। लेकिन, अब ज्‍यादा महिलाएं काम कर रही हैं। ऐसे में इसकी भूमिका बदल रही है।

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