क्लेम सेटलमेंट पर भ्रामक विज्ञापन देना बंद करें बीमा कंपनियां, दावों और हकीकत में बड़ा अंतर, IRDAI की चेतावनी

नई दिल्ली: भारतीय बीमा नियामक और विकास प्राधिकरण (IRDAI) ने जनरल और हेल्थ इंश्योरेंस कंपनियों से कहा है कि वे विज्ञापनों में क्लेम सेटलमेंट के भ्रामक आंकड़े दिखाना बंद करें। साथ ही, वे मिलकर एक ऐसा स्टैंडर्ड फॉर्म्युला तैयार करें जिसे सभी कंपनियां अपनाएं। बीमा रेगुलेटर IRDAI ने कहा है कि मीडिया में ऐसे विज्ञापनों की बाढ़ आ गई है, जो ‘भ्रामक, धोखा देने वाले और नियमों के खिलाफ’ हैं। क्लेम सेटलमेंट रेश्यो इस तरह पेश किया जा रहा है मानो क्लेम बहुत ही कम रिजेक्ट होते हैं। जबकि रेगुलेटर के पास जमा किए गए असली आंकड़े कुछ और ही बयां करते हैं।
IRDAI का कहना है कि बीमा कंपनियां सेटलमेंट रेश्यो निकालने के लिए अलग-अलग परिभाषाएं इस्तेमाल करती हैं। वे अपने विज्ञापनों में रिजेक्ट किए गए या पेंडिंग क्लेम को जानबूझकर शामिल नहीं करतीं। ये आंकड़े अक्सर उनकी ऑडिटेड एनुअल रिपोर्ट में दिए गए आंकड़ों से मेल नहीं खाते।
क्या दिए कंपनियों को निर्देश
बीमा रेगुलेटर ने कंपनियों से कहा है कि वे अपने मौजूदा तरीकों की समीक्षा करें। अपनी कमियों को पहचानें और एक ऐसा साझा फॉर्म्युला तय करें जो मोटर, हेल्थ, पर्सनल एक्सीडेंट, फायर और मरीन जैसे सभी तरह के बीमा पर लागू हो सके। रेगुलेटर चाहता है कि पूरी इंडस्ट्री के लिए एक ही पैमाना हो।
बीमा कंपनियों ने बताया रिजेक्ट का कारण
बीमा कंपनियों का कहना है कि कुछ क्लेम इसलिए रिजेक्ट हो जाते हैं, क्योंकि डॉक्यूमेंट जमा करने की डेडलाइन निकल जाती है। कुछ दूसरे क्लेम कॉन्ट्रैक्ट की वाजिब शर्तों के कारण खारिज किए जाते हैं।
ग्राहक भी ध्यान दें
रेगुलेटर का कहना है कि ग्राहकों को सिर्फ सेटलमेंट रेश्यो ही नहीं देखना चाहिए। यह भी देखना चाहिए कि क्लेम में कितनी देर होती है। क्लेम किन वजहों से रिजेक्ट होते हैं और क्लेम सर्विस की पूरी क्वालिटी कैसी है। एक बार जब सबके लिए एक जैसे नियम बन जाएंगे, तो इन बातों की अलग से जांच की जाएगी।





