उत्तर छत्तीसगढ़ में अगले 3 दिन कोल्ड वेव का अलर्ट:अन्य जिलों में 1-3 डिग्री तक गिर सकता है तापमान

रायपुर, मौसम विभाग के मुताबिक छत्तीसगढ़ में आज से ठंड बढ़ने की संभावना है। अनुमान है कि 1 से 3 डिग्री तक पारा गिर सकता है। इसके बाद कोई विशेष बदलाव होने की संभावना नहीं है। वहीं अगले तीन दिनों तक उत्तरी छत्तीसगढ़ के कुछ इलाकों में शीतलहर का अलर्ट भी जारी किया गया है।

इसी बीच स्वास्थ्य विभाग ने एडवाइजरी जारी करते हुए कहा कि अचानक तापमान में उतार-चढ़ाव से हाइपोथर्मिया, सर्दी-जुकाम और वायरल फीवर का खतरा बढ़ सकता है, इसलिए शीतलहर के दौरान अनावश्यक बाहर न निकलें, बेहद जरूरी हो तभी यात्रा करें और पूरी तरह गर्म कपड़ों का उपयोग करें।

इस बदलते मौसम के बीच मैदानी इलाकों की स्थिति पर नजर डालें तो दुर्ग सबसे ठंडा रहा, हालांकि पिछले कुछ दिनों में यहां तापमान में बढ़ोतरी देखी गई है। न्यूनतम तापमान पांच दिनों में 10°C से बढ़कर 15.2°C तक पहुंच गया। वहीं रायपुर में भी न्यूनतम तापमान 13°C से बढ़कर करीब 16.8°C दर्ज किया गया।

पिछले 24 घंटों में राज्य का सबसे अधिक अधिकतम तापमान 31.4°C दुर्ग में और सबसे कम न्यूनतम तापमान 7.5°C अंबिकापुर में रिकॉर्ड हुआ। खास बात यह है कि 7 दिन पहले अंबिकापुर का तापमान 6°C तक पहुंच गया था, जो पिछले दस वर्षों में नवंबर में पहली बार दर्ज किया गया इतना कम स्तर है।

नवंबर महीने का ठंड का रिकॉर्ड

नवंबर महीना छत्तीसगढ़ में आमतौर पर ठंड की शुरुआत का समय होता है, लेकिन मौसम विभाग के रिकॉर्ड बताते हैं कि कभी यह महीना कड़कड़ाती ठंड लेकर आया तो कभी तेज गर्मी और बारिश का गवाह भी रहा।

मौसम विज्ञान केंद्र के पुराने आंकड़ों के अनुसार 2 नवंबर 1935 को अब तक का सबसे अधिक अधिकतम तापमान 35.6°C दर्ज किया गया था। वहीं, 22 नवंबर 1883 को सबसे कम न्यूनतम तापमान 8.3°C दर्ज हुआ था जो अब तक नवंबर महीने की सबसे ठंडी रात मानी जाती है।

बारिश के रिकॉर्ड भी बने

नवंबर में सबसे ज्यादा बारिश 1924 में हुई थी, जब पूरे महीने में 138.2 मिमी वर्षा दर्ज की गई थी। इतना ही नहीं, 2 नवंबर 1930 को 24 घंटे के भीतर 70.4 मिमी बारिश हुई थी जो इस महीने के इतिहास में अब तक का सबसे बड़ा एकदिवसीय वर्षा रिकॉर्ड है।

नवंबर का सामान्य मौसम पैटर्न

नवंबर का महीना आमतौर पर छत्तीसगढ़ (और आस-पास के इलाकों) में खुले और साफ मौसम वाला होता है। कभी-कभी आसमान थोड़ा बादलों से ढका भी रहता है। जैसे-जैसे सर्दी बढ़ने लगती है, वैसे-वैसे दिन का तापमान कम होने लगता है यानी दिन हल्के ठंडे हो जाते हैं।

इस समय हवाएं आमतौर पर धीमी और हल्की चलती हैं। अगर इस महीने बारिश होती भी है, तो वह सामान्यतः किसी चक्रवात या निम्न दबाव (Low Pressure) के कारण होती है जो अधिकतर बंगाल की खाड़ी या अरब सागर में बनकर इस क्षेत्र की ओर आते हैं।

आम तौर पर नवंबर का महीना तूफानों और ओलावृष्टि जैसी घटनाओं से लगभग मुक्त रहता है। इसलिए यह शांत और स्थिर मौसम का महीना माना जाता है।

मलेरिया फैलने का खतरा भी बढ़ा

मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मौसम में मलेरिया फैलने का खतरा भी बढ़ सकता है। पिछले कुछ दिनों से रायपुर में दिन का तापमान लगातार प्रदेश में सबसे ज्यादा रहा है। वहीं सूरज ढलते ही तापमान में गिरावट देखने को मिल रही है। ऐसे में ऑफिस जाने वाले, स्कूली बच्चों काे गर्म कपड़े साथ रखने चाहिए। ताकि अचानक तापमान गिरने का असर तबीयत पर न पड़े।

डॉक्टर बोले- सतर्क रहना जरूरी, ये मौसम बीमारी ला सकता है

डॉ विकास अग्रवाल ने (एमडी, मेडिसिन) बताया कि जिस तरह से तापमान बदल रहा है, बीमार होने का खतरा ज्यादा। खासकर ऐसे मौसम में मच्छर ज्यादा पनपते हैं, मलेरिया फैलने का खतरा ज्यादा है। ऐसे में बीमारी से बचने सतर्क रहना जरूरी है। डॉक्टर की सलाह है कि…

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