बिकने जा रहा रतन टाटा का विला

नई दिल्ली: दिवंगत उद्योगपति रतन टाटा की सेशेल्स में मौजूद प्रॉपर्टी बिकने जा रही है। यह समुद्र के किनारे बना एक शानदार विला है, जो सेशेल्स के सबसे बड़े द्वीप माहे पर स्थित है। रतन टाटा ने अपनी वसीयत में इस प्रॉपर्टी को अपने सिंगापुर स्थित फंड RNT Associates के नाम कर दिया था। यह फंड भारतीय स्टार्टअप्स में निवेश करता है। प्रॉपर्टी की कीमत लगभग 85 लाख रुपये आंकी गई थी। सूत्रों के मुताबिक बंद हो चुकी टेलीकॉम कंपनी एयरसेल के फाउंडर सी. शिवशंकरन और उनके परिवार तथा साथियों ने इस प्रॉपर्टी को खरीदने में दिलचस्पी दिखाई है। उन्होंने इसके लिए 6.2 मिलियन डॉलर यानी करीब 55 करोड़ रुपये की पेशकश की है।

जब TOI ने शिवशंकरन से इस बारे में पूछा, तो उन्होंने कहा, "मुझे नहीं पता आप किस बारे में बात कर रहे हैं।" हालांकि, सूत्रों का कहना है कि बातचीत हुई है, लेकिन अभी तक कोई पक्का समझौता नहीं हुआ है। यह बात भी सामने आई है कि सेशेल्स के नागरिक बन चुके शिवशंकरन ने ही रतन टाटा को यह प्रॉपर्टी खरीदने में मदद की थी। सेशेल्स के कानून के मुताबिक सिर्फ वहां के नागरिक ही प्रॉपर्टी खरीद सकते हैं। चूंकि रतन टाटा सेशेल्स के नागरिक नहीं थे, इसलिए उन्हें एक खास छूट दी गई थी। यह छूट उनके वैश्विक उद्योगपति और परोपकारी होने के नाते दी गई थी।

सेशेल्स से पुराना रिश्ता

टाटा मोटर्स का सेशेल्स से पुराना रिश्ता रहा है। 1982 में सेशेल्स ने टाटा मोटर्स के सम्मान में एक खास डाक टिकट भी जारी किया था। 2004 के बाद कुछ समय के लिए इंडियन होटल्स (ताज) ने सेशेल्स के डेनिस आइलैंड प्रॉपर्टी का मैनेजमेंट भी संभाला था। फिलहाल टाटा मोटर्स और ताज दोनों का ही इस पूर्वी अफ्रीकी देश में कोई बिजनेस नहीं है।

हाल के इंटरव्यू में 69 वर्षीय शिवशंकरन ने रतन टाटा के साथ अपने रिश्ते के बारे में बताया था। उन्होंने कहा कि वह सात साल तक हर दिन सुबह 7:15 बजे मुंबई की बख्तावर बिल्डिंग में रतन टाटा के घर जाते थे। शिवशंकरन, रतन टाटा के परोपकारी स्वभाव और शांत व्यवहार के बहुत बड़े प्रशंसक हैं। उन्होंने एक बार बताया था कि सिंगापुर से सेशेल्स की फ्लाइट में जब एक इंजन फेल हो गया था और यात्रियों को यह चेतावनी दी गई थी कि विमान क्रैश हो सकता है। तब वह घबरा गए थे और उन्होंने अपने बेटे को अपना जीमेल पासवर्ड भेज दिया था। लेकिन टाटा बिल्कुल शांत थे। उन्होंने शिवशंकरन से कहा था, "पायलटों को उनका काम करने दो।"

कमाई का बंटवारा

उनकी दोस्ती के चलते ही शिवशंकरन ने टाटा ग्रुप के टेलीकॉम वेंचर में भी निवेश किया था। अगर यह प्रॉपर्टी डील फाइनल हो जाती है, तो इससे होने वाली कमाई को रतन टाटा एंडोमेंट फाउंडेशन और रतन टाटा एंडोमेंट ट्रस्ट के बीच बराबर बांटा जाएगा। यह फैसला बॉम्बे हाई कोर्ट ने 16 जून, 2025 के अपने आदेश में सुनाया था, जिसने वसीयत को मंजूरी दी थी।

प्रॉपर्टी की तय कीमत और शिवशंकरन परिवार/साथियों की पेशकश के बीच काफी बड़ा अंतर है। इससे पता चलता है कि वे प्रॉपर्टी के लिए ज्यादा कीमत चुकाने को तैयार हैं। सूत्रों के मुताबिक शिवशंकरन के 41 साल के बेटे सरवन शिवशंकरन भी इस मामले में शामिल हैं। वह मारलो टेक्नोलॉजीज के फाउंडर हैं। परिवार/साथियों की यह भी इच्छा है कि प्रॉपर्टी पर कोई भी अधूरा निर्माण या टैक्स का बकाया न हो

कैसे पूरी होगी डील

यह डील कैसे पूरी होगी, यह अभी साफ नहीं है। खासकर तब, जब शिवशंकरन सेशेल्स सुप्रीम कोर्ट में दिवालियापन की कार्यवाही का सामना कर रहे हैं। शिवशंकरन ने कहा था, "मेरा मामला सुप्रीम कोर्ट में चल रहा है। जब इसकी सुनवाई होगी, तो मुझे मेरे पैसे वापस मिल जाएंगे।" शिवशंकरन के पास कभी सेशेल्स में दो द्वीप और दुनिया के कई देशों में मकान थे।

उन्होंने कहा, ‘मैं गरीब नहीं हूं। भारत में बहुत से लोग सोचते हैं कि मैं गरीब हूं। नहीं, मैं कंगाल हूं।" उन्होंने स्टर्लिंग कंप्यूटर्स, डिशनेट डीएसएल इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर और फ्रेश एंड ऑनेस्ट कॉफी वेंडिंग चेन जैसे कई सफल बिजनेस खड़े किए थे। एक समय उनकी नेट वर्थ 4 अरब डॉलर से ज्यादा आंकी गई थी।

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