पाकिस्तान के इशारे पर तुर्की ने भारत के खिलाफ फिर उगला जहर, एर्दोगन के विदेश मंत्री ने संसद में उठाया कश्मीर का मुद्दा, जानें

अंकारा: तुर्की के नेताओं ने हालिया वर्षों में वैश्विक मंचों पर लगातार कश्मीर की बात की है और पाकिस्तान की तरफदारी की है। तुर्की ने एक बार फिर कश्मीर मुद्दे को उठाया है। हालांकि इस बार वैश्विक मंच नहीं बल्कि देश की संसद में कश्मीर का जिक्र हुआ है। तुर्की विदेश मंत्री हकन फिदान ने संसद में बजट सेशन में साउथ एशिया के झगड़ों पर बोलते हुए कश्मीर का जिक्र किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि कश्मीर का विवाद इंटरनेशनल कानून और बातचीत के जरिए सुलझाया जाना चाहिए।
फिदान की कश्मीर पर यह टिप्पणी तब आई, जब वह प्लानिंग और बजट कमेटी के सामने तुर्की के विदेश मंत्रालय के लिए 2026 का बजट पेश कर रहे थे। उनका भाषण मंत्रालय के बजट और विदेश नीति पर था। इसके बावजूद उन्होंने कश्मीर का जिक्र किया। ये तुर्की और एर्दोगन सरकार की पाकिस्तान में दिलचस्पी को दिखाता है। यह पाकिस्तान के इशारे पर दिया गया बयान या तुर्की की इस्लामाबाद को खुश करने की कोशिश भी हो सकती है।
भारत-पाक संघर्ष की बात
फिदान ने अपने भाषण में कहा, ‘हम इस बात पर जोर देते रहते हैं कि आपसी झगड़े, खासकर कश्मीर का मुद्दा इंटरनेशनल कानून के आधार पर बातचीत से सुलझाए जाने चाहिए। हमने देखा कि मई में भारत और पाकिस्तान ने तनाव को बातचीत से सुलझाया। कश्मीर के मुद्दे पर भी बातचीत को ही अहमियत मिलनाी चाहिए।’ तुर्की ने उसी तरह की बातें कही हैं, जो पाकिस्तान कहता रहा है।
बढ़ेगा संबंधों में तनाव!
संसद में फिदान का जानबूझकर कश्मीर का जिक्र करना भारत और तुर्की के संबंधों को और ज्यादा तनावपूर्ण बना सकता है। दोनों देशों के संबंध पहले ही ऑपरेशन सिंदूर के दौरान तुर्की की पाकिस्तान को मदद की वजह से खराब दौर में हैं। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान तुर्की खुलकर पाकिस्तान के साथ खड़ा दिखा था।
दो महीने पहले ही सितंबर में तुर्की के प्रेसिडेंट रेसेप तैयप एर्दोगन ने कश्मीर पर बयान दिया था। उन्होंने कश्मीर को एक अहम मुद्दा बताते हुए कहा था कि ये विवाद UN के प्रस्तावों के तहत और संबंधित पार्टियों के बीच बातचीत से सुलझाया जाना चाहिए। तुर्की ने हालिया समय में बांग्लादेश में भी दखल की कोशिश की है।





