1988 से 2004, 16 साल का अंतर और ‘क्रिकेट के भगवान’ सचिन तेंदुलकर के दो रिकॉर्ड शतक

मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर ने अपने करियर में दर्जनों रिकॉर्ड बनाए थे, लेकिन 11 दिसंबर के दिन की उस रिकॉर्ड बुक में खास अहमियत है। इस दिन सचिन की जिंदगी में एक नहीं 16 साल के अंतराल में दो बार खास कारनामे दर्ज हुए थे। इनमें से एक ने क्रिकेट की दुनिया में एक दिग्गज के आगमन की खबर दी थी, तो दूसरी बार उन्होंने अपने ‘महामानव’ होने की सूचना एक खास शतक से सभी तक पहुंचाई थी।
साल 1988 में बनाया था अपना पहले फर्स्ट क्लास 100
सचिन तेंदुलकर की जिंदगी में 11 दिसंबर का दिन सबसे पहले साल 1988 में यादगार बना था, जब उन्होंने महज 15 साल की उम्र में अपना पहला फर्स्ट क्लास 100 ठोका था। सचिन तेंदुलकर ने मुंबई के लिए खेलते हुए गुजरात के खिलाफ वानखेडे स्टेडियम में नॉटआउट 100 रन की पारी खेली थी। गुजरात की टीम पहली पारी में 140 रन पर आउट हो गई थी, जिसके जवाब में मुंबई ने 6 विकेट पर 394 रन बनाकर पारी घोषित की थी। इस पारी में ए. सिप्पी ने 127 रन बनाए थे, जबकि चौथे नंबर पर बल्लेबाजी करने उतरे सचिन ने नॉटआउट 100 रन बनाए थे। इसके साथ ही नंबर-4 पोजीशन हमेशा के लिए उन्होंने अपनी बना ली थी।
भारत के सबसे युवा फर्स्ट क्लास सेंचुरियन बने
सचिन तेंदुलकर अपनी इस 100 रन की पारी के साथ ही भारत के लिए फर्स्ट क्लास क्रिकेट में सबसे कम उम्र में शतक लगाने वाले बल्लेबाज बन गए थे। यह रिकॉर्ड अब 14 साल के वैभव सूर्यवंशी तोड़ सकते हैं, जो बिहार के लिए रणजी ट्रॉफी में 93 रन के स्कोर तक तो पहुंच चुके हैं। गुजरात ने उस मैच की दूसरी पारी में 306 रन बनाए थे। मुंबई की टीम को जीत के लिए महज 53 रन बनाने थे, लेकिन मैच में 7 ओवर का ही खेल बाकी था। मुंबई के लिए लालचंद राजपूत ने धुआंधार नॉटआउट 23 रन बनाए, लेकिन टीम 7 ओवर में 43 रन तक ही पहुंच सकी और मैच ड्रॉ हो गया था।
दोबारा साल 2004 में यादगान बना सचिन के लिए 11 दिसंबर
सचिन के लिए 11 दिसंबर का दिन दोबारा साल 2004 में यादगार बना था, जब उन्होंने बांग्लादेश के खिलाफ ढाका टेस्ट में शतक ठोका था। इसके साथ ही उन्होंने महान बल्लेबाज और अपने आयडल सुनील गावस्कर के सबसे ज्यादा 34 टेस्ट शतक के रिकॉर्ड की बराबरी कर ली थी। सचिन ने इस पारी में 208 रन बनाए थे, जिसकी मदद से भारत ने यह टेस्ट मैच एक पारी और 140 रन के अंतर से जीता था।





