रामानंद सागर ने झेला था विभाजन का दंश, PAK से कश्मीर का वो सफर, जब 4 दिन से भूखे परिवार ने देखी रोटी

छोटे पर्दे पर राज करने वाला टीवी शो ‘रामायण’ तो आप सभी ने देखा होगा। 25 दिनों के अंदर इसे 8,50,00,00,000 व्यूज मिले थे। और इसका नाम गिनीज वर्ल्ड रेकॉर्ड्स में भी दर्ज है। ये सबसे ज्यादा देखा जाने वाला शो है, जिसे बनाया था रामानंद सागर ने। जिनकी आज 29 दिसंबर को जयंती है। उनका 1917 में पाकिस्तान में जन्म हुआ था और 12 दिसंबर 2005 में देहांत हो गया था। उनके काम के बारे में तो आपने कई किस्से सुने। लेकिन उनके बारे में बहुत कम जानते हैं आज हम आपको उनके एक लेखक की पाकिस्तान से भारत आने और छा जाने की कहानी सुनाने जा रहे हैं।
रामानंद सागर ने अपने जीवन में कई शोज बनाए, जिसमें ‘रामायण’, ‘लव कुश’, ‘श्री कृष्णा’ अहम थे और सुपरहिट रहे थे। उनका असली नाम चंद्रमूली चोपड़ा है। उनके पिता का नाम लाला दीनानाथ चोपड़ा था, जिनकी दो पत्नियां थीं। पहली पत्नी, जो रामानंद सागर की मां थीं, की मौत हो गई थी और दूसरी पत्नी शांति देवी चोपड़ा हैं से विधु विनोद चोपड़ा का जन्म हुआ था। ऐसे में रामानंद और विधु विनोद चोपड़ा रिश्ते में सौतेले भाई हैं।
रामानंद सागर थे लेखक और पत्रकार
रामानंद सागर को लिखने का बहुत शौक था। इसलिए उन्होंने पत्रकार के रूप में विभाजन से पहले लाहौर के ‘डेली मिलाप’ अखबार में काम किया। वहां, वह सम्पाद बने। लेखक के रूप में उन्हें पहचान मिलने लगी तो फिल्ममेकर महबूब खान ने उन्हें एक मूवी का ऑफर दिया कि वह उसके लिए लिखें। लेकिन रामानंद सागर ने मना कर दिया क्योंकि उनको एक्टिंग करनी थी, जिसमें लेखनी से ज्यादा पैसा था।
रामानंद सागर को मिला एक्टिंग का ऑफर
रामानंद सागर ने एक इंटरव्यू में बताया था कि उस जमाने में एक्टर्स को राइटर्स से ज्यादा पैसे मिलते थे। इसीलिए लेखक दूसरे काम भी करते थे, जिससे घर चल सके। अब उनकी लेखनी के चर्चे मशहूर थे। फिल्ममेकर वहीउद्दीन जियाउद्दीन अहमद भी चाहते थए कि रामानंद सागर उनके साथ काम करें। लेकिन उन्होंन इनको भी मना कर दिया। लेकिन बाद में मालूम हुआ उनको एक्टिंग का शौक है तो वहीउद्दीन ने एक फिल्म बनाई, जिसका नाम ‘पृथ्वीराज-संयुक्ता’ रखा। उसमें पृथ्वीराज कपूर और मीना शौरी को कास्ट किया और रामानंद को अभिमन्यू का रोल ऑफर किया। जिसे करने के लिए वह राजी हो गए।
भारत-पाक के युद्ध पर रामानंद ने लिखी नॉवल
रामानंद सागर ने वहीउद्दीन के साथ काम करने के लिए उनकी टीम मको जॉइन कर लिया। एक बार जब वह परिवार से मिलने के लिए लाहौर आए तो पता चला कि भारत-पाकिस्तान का बंटवारा हो गया है। अब इस के बाद साम्प्रदायिक हिंसा होने लगी। सब शहर जलने लगे। फिल्ममेकर अब बीवी-बच्चों को लेकर अमृतसर की तरफ बढ़े तो वहां भी हिंसा होती देखी। इसके बाद साथ में मौजूद कुछ और लोगों ने जम्मू की तरफ बढ़ने के लिए कहा। परिवार के साथ वह भी टंगमर्ग पहुंचे और वहां ठिकाना बनाया। और भारत-पाकिस्तान के बीच हुए युद्ध पर नॉवेल लिखी, जिसका नाम ‘और इंसान मर गया’ रखा। इसमें आंखों देखा हाल लिखा।
रामानंद सागर का परिवार 4 दिन भूखा रहा
रामानंद सागर के परिवार को इस विस्थापन के दौरान काफी दुख झेलना पड़ा था। वह सभी कई-कई दिन भूखे भी रहते थे। और जब खाने को मिलता तो आंखे नम हो जाती थीं। उनके बेटे प्रेम सागर उस वक्त बहुत छोटे थे। 4 दिन भूखे रहने के बाद जब उन्होंने किसी दूसरे से रोटी मांगी तो मां ने बहुत पीटा था। और ये देखकर रामानंद सागर डर गए थे कि इससा बच्चे पर मानसिक रूप से गलत असर होगा। इसलिए जब वह कश्मीर से दिल्ली आए तो उन्होंने पत्नी के कुछ गहने बेचे और उससे सबके लिए खूब खाने की चीजें लेकर आए। और तीन-चार दिनों तक उनका पेट भरा।
रामानंद सागर का संदूक और बीजू पटनायक
बेटे प्रेम सागर ने ‘मुंबई मिरर’ को दिए इंटरव्यू में भारत के विभाजन के बारे में बताया था कि कैसे भारतीय वायु सेना ने मदद की थी। क्योंकि परिवार कश्मीर में फंस गया था और मुंबई जाने की प्लानिंग कर रहा था। उन्होंने बाया था कि रनवे टूट गया था था। इसलिए उड़ीसा से पूर्व मुख्यमंत्री बीजू पटनायक, जो कि पायलट थे, उन्होंने एयरपोर्ट के दो चक्कर लगाए थे। और तीन दिनों से जो शरणार्थियों की भीड़ इंतजार कर रही थी, वह विमान देखते ही उनकी तरफ दौड़ पड़ी थी। इस दौरान रामानंद की पत्नी चार महीने की प्रेग्नेंट थी थीँ। साथ में एक बड़ा बक्सा भी था, जिसमें उनकी कई किताबें और ‘बरसात’ फिल्म की स्क्रिप्ट थी।
प्लेन में रामानंद सागर के संदूक को भी भेजा गया
प्रेम सागर ने बताया कि बीजू पटनायक ने ने साफ कहा था कि प्लेन में सिर्फ इंसान चढ़ेंगे। कोई बक्सा नहीं जाएगा। और उसे लात मारकर नीचे गिरा दिया था। उनको लगा कि इसमें सोना है। लेकिन जब वो नीचे गिरा और खुला तो उसमें से कागज-किताबें निकलीं। ये देख वह हैरान रह गए। रामानंद ने कहा कि वह इस बॉक्स के साछ ही जाएंगे। अगर उनका संदूक नहीं जाएगा तो परिवार का भी कोई सदस्य नहीं जाएगा। जिसके बाद उन्हें उसके साथ भेजा गया।
‘रामायण’ की प्लानंग रामानंद सागर ने नहीं की
‘रामायण’ बनाने की कहानी भी दूरदर्शन को रामानंद ने सुनाई थी। बताया था कि कैसे प्रोफेसर चंद्रशेखर पांडे हर रविवार को एक-दो घंटेतुलसीदास कृत ‘रामचरित मानस’ सुनाते थे। और ये 6 महीने में पूरी हो जाती थी, जिसके बाद सभी उसे पढ़ते थे। उन्होंने कहा था, ‘कुल मिलाकर बात ये है कि मुझे 20-25 सालों से रामायण में डुबोया जा रहा था। इसलिए मैं कहता हूं कि रामायण की प्लानिंग मैंने नहीं, किसी और ने की है।’





