विदेशी निवेशकों ने की जमकर बिकवाली, लेकिन देसी निवेशकों ने संभाल लिया शेयर बाजार

भारतीय शेयर बाजार 2025 में कैसा रहा, इसे समझने के लिए सेंसेक्स और निफ्टी के आंकड़ों के बाहर भी देखना पड़ेगा। इस साल निवेशकों का व्यवहार विभिन्न वर्गों में साफ तौर पर बंटा रहा। विदेशी संस्थागत निवेश (Flls) लगातार बिकवाली करते रहे, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने जमकर खरीदारी की।
MF का सहारा
इस साल सबसे ज्यादा शोर विदेशी निवेशकों के भारतीय बाजार से बाहर निकलने पर मचा। उनकी पसंद अमेरिका, चीन, जापान और दूसरे देश थे। उन्होंने लगातार पैसा निकाला। यानी वे भारतीय बाजार में ऊंचे वैल्यूएशन से असहज थे। FIIs ने पूरे साल में करीब 1.80 लाख करोड़ के शेयर बेचे। बाजार को अगर MF का सहारा नहीं मिला होता, बड़ी उथल- पुथल देखने को मिलती
बदलती तस्वीर
2025 में सबसे बड़ा स्ट्रक्चरल बदलाव यह देखने को मिला कि NSE में सूचीबद्ध कंपनियों में हिस्सेदारी के मामले में घरेलू संस्थागत निवेशकों ने विदेशी संस्थागत निवेशकों को पीछे छोड़ दिया। यह एक ऐतिहासिक घटना है, जो भारतीय निवेशकों के आत्मविश्वास को दिखाती है। 10 साल पहले FIIs की हिस्सेदारी 21% और DIIs की 11% थी। मार्च 2025 में Flls का प्रतिशत घटकर 17.50 रह गया है, जबकि DIIs का बढ़कर 18.10% पर घरेलू संस्थागत निवेशक अब ऐसी स्थिति में हैं, जहां उन्हें नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
कमजोर और मजबूत
हर 3 से 5 साल में बाजार की चाल बदलती है और एक नया चक्र शुरू होता है। हर बार जब ऐसा होता है, तो रिटेल ट्रेडर्स का एक बड़ा हिस्सा मोमेंटम के जाल में फंस जाता है। 2025 में भी ऐसा ही हुआ मीडिया, रियलिटी, रेलवे, इंफ्रास्ट्रक्चर और एनर्जी से जुड़े शेयरों का प्रदर्शन कमजोर रहा। इसके उलट, जो सेक्टर पहले पिछड़े माने जाते थे, उन्होंने अच्छा प्रदर्शन किया जैसे फाइनैंशल सर्विसेज, मेटल्स और ऑटो ।
रेलवे में नुकसान
2025 में रेलवे से जुड़े शेयरों की वैल्यू लगभग 1.32 लाख करोड़ रुपये घटी। साल 2024 में IRFC रिटेल इन्वेस्टर्स का चहेता था, लेकिन 2025 में यह 17% नीचे गया। इसी तरह से एनर्जी सेक्टर के शेयर भी नीचे आए। Suzion में 16% और रिलायंस पावर में 14% की गिरावट आई।
घाटे का इंतजार
2025 में 120 से ज्यादा स्टॉक ऐसे रहे, जिनमें 25% से अधिक की गिरावट आई। अगर हम ऐसे स्टॉक्स के 2024 और 2025 के खरीदने-बेचने से जुड़े आंकड़ों पर नजर दौड़ाएं तो पता चलता है कि बहुत थोड़े निवेशक सही समय पर मार्केट से निकल पाए। जिन्होंने 2024 में तब पैसा लगाया था जब की कीमत ऊंची थी, उनमें से ज्यादातर इसी इंतजार में हैं कि बेचने का सही समय कब आएगा।
गोल्ड की चांदी
2025 ने निवेशकों का व्यवहार बदल दिया। स्मॉल कैप स्टॉक्स के बारे में अभी तक माना जाता था कि इसमें तो मुनाफा होना ही है, रिस्क बहुत कम है। लेकिन, उसका यह रुतबा छिन चुका है। जिन स्टॉक्स में बड़े करेक्शन देखने को मिले, उनमें से ज्यादातर स्मॉल और माइक्रो कैप हैं। तो निवेशकों ने यह सीखा कि मार्केट में धारणाओं के आधार पर नहीं उतरते। फिर, इस समय सिल्वर और गोल्ड के दाम में आश्चर्यजनक तेजी देखने को मिल रही है। इस वजह से लोग धड़ाधड़ पैसा लगा रहे हैं इन दोनों में अधिकतर निवेशक यही मान रहे हैं कि इससे भविष्य में मुनाफा होना तय है।
सबसे बड़ी जीत
अतीत की तुलना में इस बार रिटेल इन्वेस्टर्स ने जबरदस्त धैर्य और साहस दिखाया। साल के शुरुआती तीन महीने अस्थिरता वाले थे। कई स्टॉक में 30 से 50% की गिरावट आई, लेकिन वे इन शेयरों में बने रहे। SIP से आंकड़े बता रहे है कि लंबी अवधि के निवेश का ट्रेंड बढ़ रहा है। 2025 का संदेश यही रहा कि भारतीय बाजार को दौड़ने के लिए अब विदेशी पूंजी की जरूरत नहीं है।





