भारतीय कामगार से KFC आउटलेट में हुआ नस्लीय भेदभाव! 81 लाख का मिलेगा हर्जाना

लंदन: भारतीय मूल के एक व्यक्ति को लंदन में केएफसी ( KFC ) के एक आउटलेट में नस्लीय भेदभाव का शिकार होना पड़ा। यही नहीं, उसे गलत तरीके से नौकरी से निकाल दिया गया। इसके बाद पीड़ित व्यक्ति ने यूके के एक रोज़गार ट्रिब्यूनल (रोजगार से जुड़े मामलों की अदालत) का दरवाजा खटखटाया। अदालत से उसके पक्ष में फैसला आया। अब पीड़ित व्यक्ति को करीब 67,000 पाउंड (लगभग 81 लाख रुपये) का हर्जाना मिला है।
क्या है मामला
तमिलनाडु के रहने वाले मदेश रविचंद्रन ने ट्रिब्यूनल में शिकायत की थी कि दक्षिण-पूर्व लंदन के वेस्ट विकम (West Wickham) स्थित केएफसी (KFC) आउटलेट में उनके मैनेजर उन्हें लगातार परेशान करते थे। वह अक्सर नस्लीय दुर्व्यवहार का शिकार होते थे। यह घटना 2023 की है, जब वे वहां काम कर रहे थे। ट्रिब्यूनल ने उनकी बातों को सही पाया और कहा कि उनके साथ हुआ भेदभाव ‘पूरी तरह से सही’ था और इसके पुख्ता सबूत भी मिले।
ट्रिब्यूनल ने क्या माना
इस मामले की सुनवाई के बाद, ट्रिब्यूनल के जज पॉल एबॉट (Paul Abbott) ने फैसला सुनाया कि रविचंद्रन के साथ उनके राष्ट्रीयता के कारण बुरा बर्ताव किया गया। जज ने कहा कि रविचंद्रन के छुट्टी के अनुरोधों को ठुकरा दिया गया, जबकि श्रीलंका के तमिल सहकर्मियों को प्राथमिकता दी गई। इतना ही नहीं, रविचंद्रन को बेहद अपमानजनक नस्लीय गालियां भी दी गईं। ट्रिब्यूनल ने दर्ज किया कि मैनेजर ने रविचंद्रन के लिए ‘गुलाम’ (slave) जैसे अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल किया और यह भी कहा कि ‘भारतीय धोखेबाज होते हैं’ (Indians are fraudsters)। जज ने कहा कि यह साफ तौर पर भेदभावपूर्ण और अपमानजनक व्यवहार था। जजमेंट में यह भी लिखा है कि मैनेजर के इस नस्लीय दुर्व्यवहार का मकसद और नतीजा यह था कि रविचंद्रन की गरिमा को ठेस पहुंचे। यूके के रोज़गार कानून के तहत, इस तरह का व्यवहार सीधे नस्लीय भेदभाव माना जाता है।
काम के घंटों को लेकर भी विवाद
रविचंद्रन ने जनवरी 2023 में केएफसी (KFC) आउटलेट में काम करना शुरू किया था और वे सीधे रेस्टोरेंट मैनेजर को रिपोर्ट करते थे। सुनवाई में बताया गया कि अगले कुछ महीनों में उनके और मैनेजर के बीच तनाव बढ़ता गया। यह मामला जुलाई में तब और बढ़ गया जब रविचंद्रन पर एक शिफ्ट के दौरान बहुत ज़्यादा घंटे काम करने का दबाव डाला गया। जज एबॉट ने रविचंद्रन की बात को स्वीकार किया कि उन्होंने इसलिए इस्तीफा दिया क्योंकि मैनेजर लगातार उनसे अनुचित घंटों तक काम करवा रहा था। जब रविचंद्रन ने नोटिस देकर नौकरी छोड़ने की बात कही, तो मैनेजर ने कथित तौर पर नस्लीय गालियां दीं और धमकी भी दी।
कानूनी अधिकार भी नहीं दिया
ट्रिब्यूनल ने यह निष्कर्ष निकाला कि रविचंद्रन को उनके नोटिस पीरियड के दौरान ही ‘तुरंत नौकरी से निकाल दिया गया’ (summarily dismissed) था और उन्हें एक हफ्ते के नोटिस का भुगतान पाने का उनका कानूनी अधिकार भी नहीं दिया गया।
यह दिया आदेश
इस मामले में रविचंद्रन को हर्जाने के तौर पर 62,690 पाउंड दिए गए। इसके अलावा, छुट्टी के भुगतान और रोज़गार से जुड़े अन्य हकों के लिए अतिरिक्त भुगतान के साथ कुल राशि लगभग 66,800 पाउंड हो गई। इस फैसले के साथ ही, ट्रिब्यूनल ने केएफसी (KFC) फ्रेंचाइजी चलाने वाली कंपनी, नेक्सस फूड्स लिमिटेड (Nexus Foods Limited) को आदेश दिया कि वे अपने सभी कर्मचारियों के लिए कार्यस्थल पर भेदभाव-विरोधी प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू करें। इस कार्यक्रम में मैनेजरों को भेदभाव से जुड़ी शिकायतों को संभालने के बारे में खास निर्देश दिए जाएंगे। यह कार्यक्रम छह महीने के अंदर लागू करना होगा।





