गिग वर्कर्स का शोषण नहीं हो रहा है, शरारती तत्व हड़ताल पर थे: दीपिंदर गोयल

नई दिल्ली: जोमैटो (Eternal) के CEO Deepinder Goyal ने एक बड़ा खुलासा किया है। उन्होंने कहा कि गिग वर्कर्स मतलब कि डिलीवरी पार्टनर्स का शोषण नहीं हो रहा है। उनका यह भी कहना है ‘हमारे डिलीवरी पार्टनर कल (31 दिसंबर) हड़ताल पर नहीं जाना चाहते थे।’ कुल डिलीवरी पार्टनर्स में से महज 0.1% शरारती तत्वों ने ही हड़ताल का आह्वान किया था।

हड़ताल के पीछे कौन?

मंगलवार को उन्होंने एक के बाद एक कर कई ट्वीट्स किया। इस ट्वीट में Zomato के सीईओ ने बताया कि हड़ताल के पीछे कौन था। उन्होंने डिलीवरी की पूरी प्रक्रिया भी समझाई, जैसे सामान उठाना, पैक करना और फिर ग्राहक तक पहुंचाना। Goyal ने कहा, ‘हमारे ज़्यादातर डिलीवरी पार्टनर कल हड़ताल पर नहीं जाना चाहते थे। मैंने ट्वीट में जिन 0.1% शरारती तत्वों का ज़िक्र किया था, वे उन लोगों से जबरदस्ती पार्सल छीन रहे थे जो काम करना चाहते थे। वे उन्हें पीट रहे थे और उनकी बाइकें खराब करने की धमकी दे रहे थे। इसी वजह से स्थानीय पुलिस को खुद ही बीच में आना पड़ा।’

शेषण नहीं हो रहा है

उनका साफ कहना था: "गिग वर्कर्स (जैसे डिलीवरी पार्टनर) का शोषण नहीं हो रहा है। क्रिसमस और नए साल की पूर्व संध्या पर गिग वर्कर्स के विरोध प्रदर्शन के बारे में बात करते हुए, Goyal ने आरोप लगाया कि कंपनी से निकाले गए कुछ राइडर्स ने दूसरों को काम करने से रोककर काम में बाधा डाली।" उन्होंने दावा किया कि इन लोगों को पहले बार-बार गलत काम करने और धोखाधड़ी के कारण प्लेटफॉर्म से हटा दिया गया था। वे कंपनी पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहे थे ताकि उन्हें वापस काम पर रख लिया जाए। Goyal का मानना है कि शायद कुछ राजनीतिक लोग भी इसमें शामिल थे जो मीडिया में सुर्खियां बटोरना चाहते थे।

10 मिनट में डिलीवरी कैसे संभव

Goyal ने समझाया कि 10 मिनट में डिलीवरी का वादा कैसे पूरा होता है। उन्होंने बताया कि सामान उठाने और पैक करने में लगभग 2.5 मिनट लगते हैं। बाकी बचे आठ मिनट में डिलीवरी पार्टनर औसतन 2 किलोमीटर की दूरी 15 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तय करता है। उन्होंने यह भी माना कि इतनी जल्दी डिलीवरी शायद ‘सोचने में मुश्किल’ लगे, लेकिन यह कोई धोखा नहीं है। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि लाखों राइडर्स स्वेच्छा से इस प्लेटफॉर्म पर काम करना चुनते हैं, क्योंकि उन्हें अच्छी राशि मेहनताने में मिलती है। कभी-कभी तो अपनी पक्की नौकरी से भी ज़्यादा।

वर्षांत पर गिग वर्कर्स की हड़ताल थी?

गिग वर्कर्स यूनियनों का दावा है कि 31 दिसंबर 2025 को देश भर में 2 लाख से ज़्यादा डिलीवरी राइडर्स ने इस हड़ताल में हिस्सा लिया। हमारे सहयोगी ET की एक रिपोर्ट के अनुसार, 31 दिसंबर को फूड डिलीवरी और क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर रिकॉर्ड तोड़ ऑर्डर आए। गिग वर्कर्स की हड़ताल का इन पर कोई असर नहीं दिखा। Eternal के मालिकाना हक़ वाली Zomato और Blinkit, जो फूड डिलीवरी और क्विक कॉमर्स में सबसे आगे हैं, ने मिलकर नए साल की पूर्व संध्या पर बुधवार को अब तक के सबसे ज़्यादा 75 लाख से ज़्यादा ऑर्डर डिलीवर किए। यह बात कंपनी के फाउंडर और CEO दीपिंदर गोयल ने खुद बताई। इसी तरह, फूड डिलीवरी कंपनी Swiggy, उसकी क्विक कॉमर्स यूनिट Instamart, Zepto और दूसरे प्लेटफॉर्म्स पर भी ऑर्डर्स की संख्या में भारी उछाल देखा गया।

हड़ताल का आह्वान क्यों

यूनियनों ने बेहतर वेतन, सुरक्षित काम करने की जगहें और सामाजिक सुरक्षा लाभों की मांग करते हुए हड़ताल का आह्वान किया था। उन्होंने 10 मिनट की डिलीवरी पर भी रोक लगाने की मांग की थी, क्योंकि उनका कहना है कि डिलीवरी का समय पूरा करने के लिए तेज़ी से भागने से राइडर्स की जान खतरे में पड़ती है।

गोयल का क्या है कहना

Goyal ने यह भी बताया कि डिलीवरी पार्टनर को हर डिलीवरी के लिए एक निश्चित राशि मिलती है, और अगर वे ज़्यादा डिलीवरी करते हैं तो उनकी कमाई बढ़ जाती है। उन्होंने कहा कि कंपनी का लक्ष्य डिलीवरी पार्टनर्स की कमाई को बढ़ाना है, न कि उन्हें कम पैसे देना। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि कंपनी अपने डिलीवरी पार्टनर्स को किसी भी तरह से नुकसान पहुंचाने की कोशिश नहीं कर रही है। बल्कि, वे यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि सभी को सुरक्षित और उचित तरीके से काम करने का मौका मिले। Goyal ने कहा कि वे डिलीवरी पार्टनर्स की चिंताओं को समझते हैं और उनसे लगातार बात कर रहे हैं। वे मिलकर ऐसे समाधान निकालना चाहते हैं जो सभी के लिए फायदेमंद हों। उन्होंने यह भी कहा कि वे भविष्य में ऐसी किसी भी हड़ताल को रोकने के लिए और बेहतर कदम उठाएंगे।

गिग वर्कर्स किसे कहते हैं

गिग वर्कर्स ( Gig Workers ) ऐसे व्यक्ति होते हैं जो नौ पांच की पक्की नौकरी के बजाय अस्थायी, लचीले समय अवधि वाले या फ्रीलांसर के रूप में काम करते हैं। जोमैटो, स्विगी, ब्लिंकिट आदि जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म के डिलीवरी पार्टनर्स या Ola, Uber जैसे कैब प्लेटफॉर्म के लिए काम करने वाले लोग गिग वर्कर्स ही कहलाते हैं। इन्हें हर काम के लिए अलग-अलग पेमेंट मिलता है। ये लोग कंपनी के पक्के कर्मचारी नहीं होते। इसलिए इन्हें नियमित वेतन, भत्ते, या अन्य कर्मचारी लाभ (जैसे पेंशन, छुट्टी) नहीं देना पड़ता है। ऐसे वर्कर्स जितना काम करते हैं, उतना मेहनताना मिलता है।

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