बिहार कैबिनेट में नीतीश के बाद JDU का नंबर-2 नेता कौन? 1985 से है मुख्यमंत्री की दोस्ती

पटना: बिहार मंत्रिमंडल में नीतीश कुमार के बाद जदयू का नेता नम्बर-2 कौन है? इसका उत्तर है विजय कुमार चौधरी । नवम्बर 2025 में जब नीतीश कुमार ने दसवीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी, तब उप मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और विजय कुमार सिन्हा के बाद चौथे क्रम पर विजय कुमार चौधरी ने मंत्री पद की शपथ ली थी। यानी मंत्रिपरिषद में नीतीश कुमार के बाद जदयू नेता के रूप में उनकी रैंकिंग नम्बर दो है। इन्हें नीतीश कुमार का अत्यंत निकट सहयोगी और मित्रवत माना जाता है। निरीक्षण या अन्य सरकारी कार्यक्रमों के दौरान ये अक्सर नीतीश कुमार के साथ नजर आते हैं। इन्हें जदयू का थिंक टैंक माना जाता है। सरकार और संगठन की नीतियों को तैयार करने में इनकी अहम भूमिका होती है।

कैसे हुई नीतीश कुमार से दोस्ती ?

विजय कुमार चौधरी कैसे नीतीश कुमार के इतने विश्वसनीय और मित्रवत सहयोगी बने? इसका किस्सा भी नीतीश कुमार ने खुद बयान किया था। 2015 में जब नीतीश-लालू की सरकार बनी तो विजय कुमार चौधरी को निर्विरोध विधानसभा अध्यक्ष चुना गया था। इस मौके पर नीतीश कुमार ने सदन में कहा था, ‘मेरा इनसे (विजय चौधरी) 1985 से ही जुड़ाव रहा है। मैं उस समय लोक दल से विधायक था और ये कांग्रेस के विधायक थे। सदन में जब आम आदनी के मुद्दे पर बहस होती थी, तब विजय कुमार चौधरी हमारे जैसे विरोध दल के नेता का भी समर्थन कर देते थे। पार्टी लाइन से ऊपर उठ कर ये मानवीय मूल्यों के तहत अपनी बात रखते थे। इनमें कुछ अलग बात थी। मैं उन दिनों को कभी नहीं भूल सकता। एक दूसरे के विरोधी दलों में रहते हुए भी मेरी इनसे निकटता बन गयी थी।’

विधायक पिता के निधन के बाद आये राजनीति में

नीतीश कुमार की तरह ही विजय कुमार चौधरी भी पढ़ने में बहुत जहीन विद्यार्थी थे। 1979 में पटना विश्वविद्यालय से एमए करने के बाद इन्होंने बैंक पीओ का एक्जाम क्रैक किया था। तिरुवनंतपुरम स्थित स्टेट बैंक ऑफ इंडिया में वे प्रोबेशनरी ऑफिसर के रूप में काम कर रहे थे। तभी उनके पिता जगदीश प्रसाद चौधरी का 1982 में आकस्मिक निधन हो गया। उनके पिता दलसिंहसराय से कांग्रेस के विधायक थे। पिता के निधन के बाद उन्होंने नौकरी से इस्तीफा दे दिया और घर लौट आये। इस दरम्यान जब दलसिंहसराय में उपचुनाव की घोषणा हुई तो कांग्रेस ने विजय कुमार चौधरी को उम्मीदवार बना दिया। यह उपचुनाव जीत कर वे विधायक बने। 1985 में फिर इस सीट से चुनाव जीता। इसी टर्म में उनकी दोस्ती नीतीश कुमार से हुई।

2005 में आये जदयू में, पहला चुनाव हार गये

2005 में जब नीतीश कुमार ने बिहार में ‘जंगल राज’ के खिलाफ जंग का एलान किया तो उन्होंने अपने मित्र विजय कुमार चौधरी को याद किया। वे कांग्रेस छोड़ कर जदयू में शामिल हो गये। नीतीश कुमार ने उन्हें अक्टूबर 2005 के विधानसभा चुनाव में सरायरंजन सीट से जदयू का उम्मीदवार बनाया। लेकिन इस चुनाव में वे राजद के रामचंद्र सिंह निषाद से हार गये। इस हार के बाद भी नीतीश कुमार को उनकी योग्यता पर पूरा भरोसा था। उन्हें 2008 में जदयू का महासचिव और मुख्य प्रवक्ता बनाया गया। 2010 के विधानसभा चुनाव में विजय कुमार चौधरी को कामयाबी मिली। नीतीश कुमार ने उन्हें मंत्री बनाया। इसके बाद वे नीतीश मंत्रिपरिषद का स्थायी चेहरा बन गये। निकटता धीरे-धीरे प्रगाढ़ दोस्ती में बदल गयी।

सभी दलों के प्रिय नेता

विजय कुमार चौधरी को शिष्ट, मिलनसार और विद्वान नेता के रूप में जाना जाता है। संसदीय प्रक्रिया का उन्हें गहरा ज्ञान है। वे सभी दलों के लिए एक प्रिय नेता हैं। 2015 में भाजपा, नीतीश कुमार के खिलाफ थी लेकिन जदयू के विधायक विजय कुमार चौधरी के लिए सम्मान की भावना रखती थी। जब विधानसभा अध्यक्ष पद के लिए विजय कुमार चौधरी को उम्मीदवार बनाया गया तो भाजपा ने भी उनकी समर्थन कर दिया। इस तरह वे निर्विरोध स्पीकर बनने में सफल रहे थे।

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