रेसिडेंशियल रियल एस्टेट मार्केट का डॉन कौन? नाइट फ्रैंक की रिपोर्ट से हुआ खुलासा

नई दिल्ली: साल 2025 में रेसिडेंशियल रियल एस्टेट मार्केट (Residential Real Estate Market) का डॉन कौन? इस सवाल का जवाब आ गया है। नाइट फ्रैंक इंडिया (Knight Frank India) की एक रिपोर्ट के अनुसार मुंबई ने साल 2025 में भारत के सबसे बड़े आवासीय रियल एस्टेट बाजार के रूप में अपनी जगह पक्की कर ली है। साथ ही, ऑफिस लीजिंग (ऑफिस किराए पर लेने) के मामले में पिछले एक दशक के दौरान यह शहर दूसरे सबसे बड़े आंकड़े को छुआ है।

इस रिपोर्ट से हुआ खुलासा

नाइट फ्रैंक इंडिया की ‘इंडिया रियल एस्टेट: ऑफिस एंड रेसिडेंशियल मार्केट, जुलाई-दिसंबर 2025 (H2 2025)’ रिपोर्ट पिछले दिनों ही आई है। इसके अनुसार, साल 2025 के दौरान मुंबई में कुल 9.8 मिलियन वर्ग फुट ऑफिस स्पेस किराए पर लिया गया। हालांकि, यह पिछले साल की तुलना में 5% कम था। लेकिन तब भी पिछले दस सालों में यह दूसरा सबसे मजबूत साल रहा। साल की दूसरी छमाही (H2 2025) में, 4.3 मिलियन वर्ग फुट ऑफिस स्पेस किराए पर लिया गया।

रेसिडेंशियल मार्केट में क्या हाल

रेसिडेंशियल मार्केट की बात करें तो, मुंबई में साल 2025 के दौरान कुल 97,188 मकान बिके। यह पिछले साल की तुलना में 1% ज्यादा है। साल की दूसरी छमाही (H2 2025) में 50,153 यूनिट्स की बिक्री हुई, जो 3% की बढ़ोतरी है। इस साल मकानों की औसत कीमत में 7% की बढ़ोतरी हुई। अब यह बढ़ कर 8,856 रुपये प्रति वर्ग फुट हो गई। मकान की कीमतों में वृद्धि लगातार खरीदारों की मांग और सीमित सप्लाई का नतीजा है।

महंगे मकानों को तवज्जो

नाइट फ्रैंक इंडिया की इस रिपोर्ट से यह भी पता चलता है कि लोग अब सस्ते मकानों की बजाय महंगे मकानों को ज्यादा तवज्जो दे रहे हैं। रिपोर्ट का कहना है कि खासकर 2 से 5 करोड़ रुपये के बीच के मकानों की मांग बढ़ी है। इस रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर, जैसे कि मेट्रो लाइन 3 और मुंबई ट्रांस हार्बर लिंक का चालू होना, बाहरी और उपनगरीय इलाकों में घरों की मांग को बढ़ा रहा है।

वैश्विक कंपनियों की नजर मुंबई पर

नाइट फ्रैंक इंडिया के इंटरनेशनल पार्टनर, सीनियर एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर, रिसर्च, एडवाइजरी, इंफ्रास्ट्रक्चर एंड वैल्यूएशन, गुलाम जिया ने कहा, "मुंबई का ऑफिस मार्केट लंबे समय से स्थिर बना हुआ है। साल 2025 में पिछले एक दशक में ऑफिस लीजिंग का दूसरा सबसे बड़ा आंकड़ा दर्ज किया गया। सबसे खास बात GCCs का तेजी से बढ़ना है। इस साल उनकी बाजार हिस्सेदारी लगभग तीन गुना हो गई है, क्योंकि वैश्विक कंपनियां उच्च-स्तरीय विश्लेषण और साझा सेवाओं के लिए मुंबई की गहरी प्रतिभा पूल का लाभ उठा रही हैं।"

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