सीबीआई कोलकाता ने 13 करोड़ की धोखाधड़ी पर की एफआईआर

सीबीआई की कोलकाता स्थित आर्थिक अपराध शाखा ने नेशनल बैंक फॉर एग्रीकल्चर एंड रूरल डेवलपमेंट (नाबार्ड) बैंक भोपाल के साथ हुई करीब 13 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी के मामले में आरोपी तायल बंधुओं के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है।
यह कार्रवाई भोपाल स्थित नाबार्ड के डीजीएम नंदू जे नायक की शिकायत पर की गई है। इस मामले के मास्टरमाइंड सेंधवा के निमाड़ एग्रो पार्क के संचालक अर्पित कुमार तायल, निकुंज तायल, अशोक कुमार तायल और अंकित कुमार तायल हैं।
सीबीआई की एफआईआर के अनुसार, आरोपियों ने वर्ष 2019 में ग्राम जानली में एक एग्रो प्रोसेसिंग क्लस्टर स्थापित करने के नाम पर नाबार्ड से 13.99 करोड़ रुपए का लोन लिया था। इस प्रोजेक्ट की कुल लागत 31 करोड़ रुपए से अधिक आंकी गई थी, जिसमें फूड प्रोसेसिंग मंत्रालय की ओर से 10 करोड़ रुपए की सरकारी मदद भी मिलनी थी।
सीबीआई की प्रारंभिक जांच में यह खुलासा हुआ है कि आरोपियों ने बैंक अधिकारियों के साथ मिलकर ही लोन घोटाले की साजिश रची थी। प्रोजेक्ट के लिए बुनियादी ढांचा खड़ा करने के बजाय आरोपियों ने अपनी ही दूसरी कंपनियों के साथ फर्जी समझौते किए ताकि बैंक से लोन की किस्तें जारी कराई जा सकें। जैसे ही बैंक ने वर्ष 2020 और 2021 के दौरान पांच किस्तों में पैसा जारी किया, आरोपियों ने उस रकम को प्रोजेक्ट में लगाने के बजाय दूसरे बैंक खातों में ट्रांसफर कर रकम हड़प ली।
2024 में एनपीए हुआ खाता तो खुली असलियत
सीबीआई के अनुसार, लोन चुकाने के बजाय बार-बार संचालक प्रोजेक्ट की टाइम लिमिट बढ़ाने की बात कहकर बैंक के अफसरों को गुमराह करते रहे। समय सीमा बढ़ने के बाद भी प्रोजेक्ट पूरा ही नहीं हुआ। इसके बाद 29 सितंबर 2024 को यह लोन खाता एनपीए में तब्दील हो गया। इसके बाद बैंक ने ऑडिट कराने के बाद सीबीआई को कार्रवाई के लिए खत लिखा।
जांच में पाया गया है कि इन चारों ने सरकारी धन का दुरुपयोग कर नाबार्ड को लगभग 12.99 करोड़ रुपए की मूल राशि और 44 लाख रुपए के ब्याज का नुकसान पहुंचाया। अब सीबीआई ने इन चारों पार्टनर्स समेत अज्ञात सरकारी कर्मचारियों के खिलाफ धोखाधड़ी, आपराधिक साजिश, दस्तावेजों की जालसाजी के आरोप में आईपीसी की धारा 420, 409, 467 और 468 के अलावा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 सी के तहत एफआईआर दर्ज कर ली है।
चार दिनों में दूसरा मामला
चार दिन पहले नाबार्ड गुजरात के साथ 11 करोड़ की लोन धोखाधड़ी का मामला भी उजागर हुआ था। इसमें नाबार्ड गुजरात के साथ एमपी की कंपनी पार्वती एग्रो प्रोडक्ट के निदेशकों और बैंक अफसरों ने मिलीभगत कर सूरत के मंगरोल में एक मल्टीप्रोडक्ट प्रोसेसिंग यूनिट स्थापित करने के नाम पर बैंक से 11 करोड़ का लोन लेकर हड़प लिया था।
कंपनी ने सूरत के गुजरात एग्रो इंफ्रास्ट्रक्चर मेगा फूड पार्क में काजू, फ्रोजन फ्रूट, पल्प और रेडी-टू-ईट भोजन जैसी छह यूनिट लगाने का दावा किया था। इस मामले में भी सीबीआई कोलकाता की ईओबी यूनिट ने कंपनी के संचालकों रितेश जोशी और रघुनाथ पाटिल के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी। ये कंपनी एग्रीकल्चर डेवलपमेंट, फूड प्रोडक्ट, पीवीसी और इरिगेशन पाइप आदि का निर्माण करती है।





