फ्लिपकार्ट डील में टाइगर ग्लोबल को देना होगा टैक्स, सुप्रीम कोर्ट ने पलटा हाई कोर्ट का फैसला

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने इनकम टैक्स विभाग के उस फैसले को सही ठहराया है, जिसमें कहा गया था कि अमेरिकी निवेश कंपनी टाइगर ग्लोबल को 2018 में फ्लिपकार्ट से बाहर निकलते समय हुए मुनाफे (कैपिटल गेंस) पर भारत में टैक्स देना होगा। जस्टिस जे बी पारदीवाला और जस्टिस आर महादेवन की बेंच ने दिल्ली हाई कोर्ट के अगस्त 2024 के फैसले को गुरुवार को पलट दिया। हाई कोर्ट ने टाइगर ग्लोबल के पक्ष में फैसला सुनाते हुए टैक्स की मांग को रद्द कर दिया गया था। टाइगर ग्लोबल ने फ्लिपकार्ट में अपनी 1.6 बिलियन डॉलर की हिस्सेदारी वॉलमार्ट को बेची थी।
- कोर्ट ने क्या कहा?
सुप्रीम कोर्ट ने कहा, जब यह तथ्य सामने आ गया है कि जिन शेयरों को बेचकर कंपनी ने मुनाफा कमाया, उन्हें कानून के खिलाफ जाकर एक खास व्यवस्था के तहत ट्रांसफर किया गया था। ऐसी स्थिति में कंपनी टैक्स छूट (DTAA के आर्टिकल 13(4) के तहत) का दावा नहीं कर सकती। - क्यों है अहम?
सुप्रीम कोर्ट का ये फैसला अमेरिकी कंपनी के लिए एक बड़े झटके के तौर पर देखा जा रहा है। ET के मुताबिक, यह फैसला उन सभी के लिए बड़ा सबक है जो मॉरीशस या सिंगापुर के रास्ते भारत में पैसा लगाते हैं। कोर्ट का यह फैसला भारतीय टैक्स विभाग के लिए बड़ी जीत है। - क्या है पूरा विवाद?
टाइगर ग्लोबल ने अक्टूबर 2011 से अप्रैल 2015 के बीच फ्लिपकार्ट सिंगापुर के शेयर खरीदे थे। बाद में इन शेयरों को लक्जमबर्ग की एक कंपनी ‘फिट होल्डिंग्स SARL’ को ट्रांसफर कर दिया गया। साल 2018 में जब वालमार्ट ने भारतीय ई-कॉमर्स कंपनी फ्लिपकार्ट में बड़ी हिस्सेदारी खरीदी, तब टाइगर ग्लोबल इस से बाहर निकल गई थी।टाइगर ग्लोबल ने फरवरी 2019 में अथॉरिटी फॉर अडवांस रूलिंग्स (AAR) का दरवाजा खटखटाया था। AAR ने तब अपने फैसले में कहा था कि टाइगर ग्लोबल ग्रुप का ढांचा यह दिखाता है कि यह कंपनी और इसकी मालिक कंपनियां केवल टैक्स बचाने की एक योजना का जरिया भर थीं।AAR ने यह भी माना था कि इस कंपनी का असली कंट्रोल और मैनेजमेंट मॉरीशस में नहीं, बल्कि अमेरिका स्थित TGM LLC के पास था। दिल्ली हाई कोर्ट ने फैसले में कहा था कि TGM LLC केवल एक इन्वेस्टमेंट मैनेजर के तौर पर काम कर रही थी और उसे पैरेंट या होल्डिंग कंपनी नहीं माना जा सकता। - क्या थी आपत्ति?
भारत में इनकम टैक्स विभाग ने इस पर सवाल उठाए। विभाग का कहना था कि अमेरिकी कंपनी टाइगर ग्लोबल ने मॉरीशस की कंपनी को सिर्फ टैक्स बचाने के लिए एक मुखौटे की तरह इस्तेमाल किया है। विभाग का मानना था कि मॉरीशस में इस कंपनी का कोई असली वजूद नहीं है। टाइगर ग्लोबल ने टैक्स छूट के लिए मॉरीशस सरकार से मिला टैक्स रेजिडेंसी सर्टिफिकेट (TRC) भी दिखाया, लेकिन टैक्स विभाग ने उसे मानने से इनकार कर दिया था।





