एयर इंडिया 787 विमान दुर्घटना में आया नया ट्विस्ट, टेक्निकल फेल्योर का रहा है इतिहास?

नई दिल्ली: एयर इंडिया (Air India) के बोइंग 787 विमान का हादसा आपको याद ही होगा। इसके बारे में एक अमेरिकी विमान सुरक्षा समूह (Aviation Safety Group) ने दावा किया है कि पिछले साल भारत में दुर्घटनाग्रस्त हुआ बोइंग 787 ड्रीमलाइनर विमान दुर्घटना से पहले कई तकनीकी खराबी से गुजर रहा था। इनमें एक इन-फ्लाइट फायर की घटना भी शामिल थी। यह जानकारी बीबीसी की एक रिपोर्ट के अनुसार सामने आई है।
बीते साल जून में हुआ था हादसा
टाटा ग्रुप की कंपनी एयर इंडिया द्वारा ऑपरेटेड यह एयरक्राफ्ट पिछले साल 12 जून को दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। विमान ने अहमदाबाद हवाई अड्डे से से लंदन के लिए उड़ान भरा ही था कि कुछ सेकेंड बाद दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। इस हादसे में 260 लोगों की जान गई थी। इस दुर्घटना की आधिकारिक जांच अभी भी जारी है।
क्या हुआ है खुलासा
फाउंडेशन फॉर एविएशन सेफ्टी (FAS) नामक एक समूह ने अमेरिकी सीनेट की स्थायी जांच उपसमिति US Senate Permanent Subcommittee on Investigations को एक प्रजेंटेशन भेजा है। इसमें ऐसे निष्कर्ष बताए गए हैं जो उनके अनुसार उनके हाथ लगे आंतरिक दस्तावेजों पर आधारित हैं। बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, फाउंडेशन का आरोप है कि यह विमान एयर इंडिया के साथ अपनी सेवा के पहले दिन से ही सिस्टम की खराबी का सामना कर रहा था। समूह ने इंजीनियरिंग, निर्माण, गुणवत्ता और रखरखाव से जुड़ी समस्याओं का भी जिक्र किया है। समूह का दावा है कि विमान में बार-बार इलेक्ट्रॉनिक्स और सॉफ्टवेयर की दिक्कतें आईं। सर्किट ब्रेकर ट्रिप हो रहे थे, वायरिंग खराब हो रही थी। इससे शॉर्ट सर्किट भी हो रहे थे। विमान में बिजली का करंट सप्लाई बंद हो रहा था और पावर सिस्टम के पुर्जे सामान्य से ज़्यादा गरम हो रहे थे।
यह भी आरोप
इस रिपोर्ट के मुताबिक यह भी आरोप लगाया गया है कि जनवरी 2022 में, फ्रैंकफर्ट हवाई अड्डे पर उतरते समय विमान के P100 पावर डिस्ट्रीब्यूशन पैनल में आग लग गई थी। फाउंडेशन ने बताया कि उतरने के बाद इस आग से हुए नुकसान का पता चला और यह इतना गंभीर था कि पूरे पैनल को बदलना पड़ा। विमान का P100 पैनल उन पांच यूनिटों में से एक होता है जो इंजन द्वारा उत्पन्न हाई-वोल्टेज बिजली को पूरे विमान में डिस्ट्रीब्यूट करता है।
बिजली पर ज्यादा निर्भरता
आप यदि पहले के यात्री विमानों की तुलना 787 से करें तो इस विमान में बिजली प्रणालियों पर बहुत अधिक निर्भरता है। इस विमान ने शुरुआत में सुरक्षा संबंधी समस्याएं भी देखीं, जिसमें 2013 में जापान एयरलाइंस के एक विमान में बैटरी में आग लगना भी शामिल था, जिसके कारण विमानों को अस्थायी रूप से वैश्विक स्तर पर उड़ान भरने से रोक दिया गया था। बीबीसी की रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि P100 पावर पैनल को 2010 में एक परीक्षण विमान में आग लगने के बाद फिर से डिजाइन किया गया था।
भारत में भी चल रही है जांच
अहमदाबाद दुर्घटना की जांच भारत का विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (AAIB) कर रहा है। इसमें अमेरिकी अधिकारी भी शामिल हैं क्योंकि विमान और इंजन अमेरिका में डिजाइन और निर्मित किए गए थे। दुर्घटना के एक महीने बाद जारी की गई AAIB की प्रारंभिक रिपोर्ट में कहा गया था कि उड़ान भरने के तुरंत बाद विमान के फ्यूल कंट्रोल स्विच को ‘रन’ से ‘कट-ऑफ’ कर दिया गया था, जिससे इंजन को ईंधन मिलना बंद हो गया था। रिपोर्ट में कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डिंग का हवाला दिया गया था जिसमें एक पायलट ने दूसरे से पूछा था कि स्विच क्यों बंद किए गए थे, जिस पर जवाब मिला था कि उसने ऐसा नहीं किया था। इस जानकारी से यह अटकलें लगने लगीं कि पायलट की कार्रवाई के कारण दुर्घटना हुई। पीड़ितों के वकील, सुरक्षा कार्यकर्ता, पायलट समूह और कुछ तकनीकी विशेषज्ञों ने इस पर आपत्ति जताई है। उनका तर्क है कि पायलट की गलती पर ध्यान केंद्रित करना जल्दबाजी हो सकती है और यह संभावित तकनीकी कारणों से ध्यान भटका सकता है।





