भारत जैसे देशों को संभालनी होगी विश्व व्यवस्था, दिल्‍ली को नजरअंदाज करना गलती, कनाडा के PM का बड़ा बयान

दावोस: स्विट्जरलैंड के दावोस में कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने अपने भाषण से दुनिया का ध्यान खींचा है। वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में कार्नी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों पर निशाना साधते हुए नए वर्ल्ड ऑर्डर की बात की है। इसमें उन्होंने भारत-चीन जैसे देशों के रोल पर खासतौर से बात की है। उन्होंने कहा है कि भारत जैसी ‘मध्यम शक्तियों’ को एकजुट होने की जररूत है क्योंकि अमेरिकी नेतृत्व वाली मौजूदा विश्व व्यवस्था कमजोर पड़ गई है। ट्रंप के ग्रीनलैंड पर कब्जे के मुद्दे पर कार्नी उन नेताओं में शामिल हैं, जिनकी ओर से इस पर काफी सख्त रुख दिखाया गया है।

मार्क कार्नी ने बुधवार को फोरम में अपने जोरदार भाषण में साफ कहा कि अमेरिका के नेतृत्व वाली विश्व व्यवस्था टूट रही है। अमेरिका ने दशकों से वैश्विक राजनीति को संभाला है लेकिन अब यह बदलाव से आगे बढ़ते हुए टूट की तरफ रही है। कार्नी के इस भाषण की चर्चा इसलिए भी है क्योंकि उन्होंने खुद ही इसे लिखा था।

चीन-भारत का लिया नाम

कनाडा के पीएम मार्क कार्नी ने इस दौरान खासतौर से भारत, चीन और दक्षिण अमेरिकी देशों के ब्लॉक मर्कोसुर का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इन देशों और यूरोपियन यूनियन को नजरअंदाज करना एक गलती है। यह अपने रिश्तों को ठीक से मैनेज नहीं करना है। आज आपको कनेक्शन का एक जाल चाहिए।

पीएम बनने से पहले कनाडा और इंग्लैंड के केंद्रीय बैंकों के गवर्नर रह चुके कार्नी ने तर्क दिया कि नियम-आधारित अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था के कमजोर पड़ने से कमजोर मुश्किल में है। एक ऐसा निजाम बन रहा है, जहां ताकतवर की नीति को कमजोर को सहना पड़ता है। उन्होंने ट्रंप की टैरिफ नीतियों की ओर इशारा करते हुए यह कहा है।

अमेरिका से उम्मीद छोड़ दीजिए

कार्नी ने अमेरिका का नाम लिए बिना कहा कि बड़ी ताकतों को खुश करने से कुछ नहीं होगा। उन्होंने कहा, ‘छोटे और मध्यम आकार के देशों को यह उम्मीद नहीं करनी चाहिए कि नियमों का पालन करने से उन्हें सुरक्षा मिलेगी। अब ऐसा नहीं होने वाला है। ऐसे में अब मध्यम शक्तियों को एक साथ काम करना चाहिए क्योंकि यदि आप मेज पर नहीं हैं तो फिर आप मेनू पर हैं

कार्नी ने इस दौरान कहा कि बड़ी शक्तियां फिलहाल अकेले काम कर सकती हैं लेकिन मध्यम शक्तियों के पास ऐसा करने की क्षमता नहीं है। ऐसे में उनके पास एकजुट होकर ही आगे बढ़ने का विकल्प है। हमें ये भी ध्यान रखन चाहिए कि आधिपत्यवादी शक्तियों के साथ द्विपक्षीय बातचीत अक्सर अधीनता स्वीकार करते हुए संप्रभुता का प्रदर्शन मात्र रह जाती है।

कार्नी के भाषण में भारत का जिक्र

मार्क कार्नी का भाषण खासतौर से भारत के लिए अहम है क्योंकि उन्होंने दिल्ली को नए ग्लोबल ऑर्डर में अहम माना है। कार्नी ने सिर्फ अमेरिका विरोधी रुख ही नहीं अपनाया है बल्कि जमीन पर भी वह वॉशिंगटन पर कनाडा की निर्भरता कम करने में लगे है। कनाडा फिलहाल भारत के साथ मुक्त व्यापार समझौते पर बातचीत कर रहा है। यह अमेरिका पर अत्यधिक निर्भरता को कम करने के व्यापक प्रयास का हिस्सा है।

कनाडा के प्रधानमंत्री ने दावोस में अपने कई देशों के साथ रिश्ते सुधारने पर भी बात की। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ दिनों में हमने चीन और कतर के साथ नई रणनीतिक साझेदारी पूरी की है। हम भारत, आसियान, थाईलैंड, फिलीपींस और मर्कसोर के साथ मुक्त व्यापार समझौते पर बातचीत कर रहे हैं। हम वैश्विक समस्याओं को हल करने में मदद करने के लिए कुछ और कर रहे हैं।

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