अली खामेनेई सिर्फ नाम के सुप्रीम लीडर? ईरान में प्रदर्शन कुचलकर सेना IRGC ने सत्ता पर कसा शिकंजा

तेहरान: ईरान में इस महीने की शुरुआत में भारी विरोध प्रदर्शन देखने को मिले हैं। करीब तीन हफ्ते तक हजारों लोग सड़कों पर रहे, जो सत्ता परिवर्तन की मांग कर रहे थे। ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के नेतृत्व वाले शासन ने काफी जद्दोजहद के बाद इस विरोध को दबाया है। ईरान में फिलहाल प्रदर्शन नहीं हैं लेकिन अटकलबाजियों का दौर जारी है। इस प्रदर्शन ने तेहरान में सत्ता पर पकड़ में बदलाव की चर्चा को भी बढ़ाया है। अयातुल्ला अली खामेनेई ईरानी सत्ता का प्रमुख चेहरा बने हुए हैं लेकिन इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) हालिया विरोध को दबाने के बाद ज्यादा बड़ी ताकत बनकर उभरी है।

फर्स्टपोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान इस समय उथल-पुथल से गुजर रहा है। ऐसे में यह सवाल उठना लाजिमी है कि तेहरान में असली ताकत किसके हाथ में है। कई विश्लेषकों का मानना है कि खामेनेई नहीं बल्कि इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) देश की सत्ता में फैसले लेने और भविष्य तय करने वाली सबसे बड़ी ताकत बन गई है।

1979 में हुआ IRGC का जन्म

ईरान की साल 1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद IRGC वजूद में आया। ये शुरुआत में एक खास सैन्य दल था लेकिन अब विशाल संगठन बन गया है। इसकी पकड़ ईरान के सुरक्षा क्षेत्र के साथ-साथ राजनीतिक और आर्थिक क्षेत्र में बेहद गहरी है। सत्ता पर IRGC की बढ़ती पकड़ को देखते हुए किसी भी राजनीतिक बदलाव पर इसका सीधा असर होगा।

IRGC के पास ना सिर्फ अपनी थल सेना, नौसेना और वायु सेना के डिवीजन हैं। बल्कि एक शक्तिशाली खुफिया विंग भी है। IRGC के पूर्व कमांडर अब संसद, सरकारी संस्थाओं, महत्वपूर्ण उद्योगों और मीडिया संगठनों में ऊंचे पदों पर बैठे हैं। इस प्रभाव से नागरिक शासन और सैन्य सत्ता के बीच की रेखा धुंधली हो गई है।

ईरान में सत्ता के केंद्रीयकरण

IRGC की बढ़ी ताकत ने ईरान के आंतरिक शक्ति संतुलन को बदल दिया है। राष्ट्रपति और कैबिनेट के पास प्रशासनिक अधिकार हैं लेकिन रणनीतिक दिशा ये संगठन ही ले रहा है। ईरानी व्यवस्था के आलोचकों का कहना है कि IRGC की ताकत ने चुनी हुई सरकार को खिलौना बना दिया है। वहीं समर्थक इसे एक अनुशासित इकाई मानते हैं, जो घरेलू अशांति और विदेशी दबाव दोनों का सामना करने में सक्षम है।

ईरान के हालिया प्रदर्शनों के शुरू होने की वजह आर्थिक थी। ईरान की आर्थिक बदहाली ने IRGC को और मजबूत किया है। वैश्विक प्रतिबंधों और महंगाई ने समय-समय पर राष्ट्रव्यापी विरोध प्रदर्शनों को हवा दी है। खासकर युवा ईरानी सड़कों पर उतरे हैं। बार-बार हुए प्रदर्शनों के बीच IRGC ना सिर्फ टिकी हुई है बल्कि सत्ता पर ज्यादा पकड़ मजबूत करते हुए भी दिखी है

खामेनेई का उत्तराधिकारी कौन

ईरान के सुप्रीम नेता अली खामेनेई की उम्र 90 साल हो गई है। उनके उत्तराधिकार का सवाल अनसुलझा है। विश्लेषकों का तर्क है कि खामेनेई के उत्तराधिकार पर अनिश्चित्ता ने IRGC के महत्व को ज्यादा बढ़ा दिया है। जैसे-जैसे धार्मिक सत्ता के खंडित होने का खतरा बढ़ रहा है। IRGC गार्ड्स को व्यवस्था बनाने और निरंतरता सुनिश्चित करने वाली एकमात्र संस्था के रूप में देखा जा रहा है।

गार्ड्स की प्रभुता उनकी आर्थिक पहुंच से और मजबूत होती है। खतम अल-अंबिया जैसे समूहों के माध्यम से IRGC ईरान के बुनियादी ढांचे, ऊर्जा और निर्माण क्षेत्रों के विशाल हिस्सों को नियंत्रित करता है। प्रतिबंधों ने इस प्रभाव को कम करने के बजाय अक्सर इसे बढ़ाया है। इसने निजी प्रतिस्पर्धियों को किनारे कर दिया है और गार्ड्स से जुड़े नेटवर्क को लाभ दिया है।

ईरान का भविष्य क्या होगा

ईरान में जैसे-जैसे आर्थिक तनाव और असंतोष बढ़ रहा है, सत्ता की रूपरेखा को लेकर भी चिंता गहरा रही है। तेहरान का भविष्य शायद इस बात पर कम निर्भर करेगा कि वरिष्ठ राजनीतिक पदों पर कौन बैठता है। रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने खुद को जिस मजबूती से स्थापित किया है, उससे कहा जा सकता है कि उनका रोल अहम होने वाला है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button