होम लोन ब्याज पर Income Tax छूट 2 लाख के बजाय 5 लाख हो, किसने की मांग?

नई दिल्ली: बजट 2026 अगले रविवार को ही पेश होना है। इसे लेकर रियल एस्टेट सेक्टर (Real Estate Sector) काफी आशान्वित है। रियल एस्टेट डेवलपर्स के संगठन क्रेडाई (CREDAI) और नरेडको (NAREDCO) ने सरकार से होम लोन के ब्याज (Home Loan Interest) पर मिलने वाली डिडक्शन की सीमा को बढ़ाने की मांग की है।

होम लोन पर छूट की सीमा बढ़े

क्रेडाई और नरेडको दोनों संगठनों ने होम लोन पर आयकर में मिलने वाली छूट (Income Tax Deduction) की सीमा बढ़ाने की एक बार फिर से मांग की है। इन्होंने कहा है कि होम लोन पर जाने वाली किस्त में जो ब्याज का हिस्सा होता है, उसकी लिमिट अभी के दो लाख रुपये से बढ़ा कर पांच लाख रुपये की जानी चाहिए।

अफोर्डेबल हाउसिंग की परिभाषा में हो बदलाव

इन संगठनों ने इसके साथ ही अफोर्डेबल हाउसिंग (Affordable House) की परिभाषा में भी बदलाव करने की मांग की है। क्रेडाई के प्रेसिडेंट शेखर पटेल का कहना है कि इस समय 45 लाख रुपये के मकानों को ही अफोर्डेबल हाउस माना जाता है। जबकि इस समय महानगरों या बड़े शहरों में 45 लाख रुपये में आपको ढंग का दो कमरे का मकान नहीं मिलेगा। उनका कहना है कि साल 2017 के बाद इस परिभाषा में कोई बदलाव नहीं हुआ है, जबकि निर्माण सामग्री के साथ ही आवासीय भूमि के दाम में काफी बढ़ोतरी हो चुकी है। इसके साथ ही अफोर्डेबल हाउसिंग पर एक फीसदी का जीएसटी (GST) भी देय होता है।

रेंटल हाउसिंग को बढ़ावा मिले

नरेडको के प्रेसिडेंट प्रवीण जैन का कहना है कि बजट 2026 में रेंटल हाउसिंग (Rental Housing) को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। इसके लिए इनकम टैक्स के नियमों में ढील दी जाए। साथ ही इससे जुड़ी शर्तें भी आसान की जाएं। उन्होंने इसमें मिलने वाले टैक्स हॉलिडे (Tax Holiday) की समय सीमा बढ़ाने की भी मांग की है। NAREDCO ने अपनी बजट सिफारिश में मांग की है IT एक्ट 2025 सेक्शन 142 के तहत रेंटल हाउसिंग प्रोजेक्ट्स में मिलने वाली टैक्स छूट में बड़े बदलाव किए जाएं। जैन का कहना है कि अभी नियमों के मुताबिक अफोर्डेबल रेंटल हाउसिंग के लिए टैक्स छूट तभी मिलती है, जब प्रोजेक्ट केंद्र सरकार द्वारा नोटिफाई किया गया हो। उनका कहना है कि इस तरह की शर्तें ही डेवलपर्स के लिए एक बड़ी बाधा है। यदि सरकार यह शर्त हटा देती है तो डेवलपर्स को रेंटल हाउसिंग प्रोजेक्ट्स शुरू करने में मदद मिलेगी।

स्टैंडर्ड डिडक्शन की लिमिट बढ़े

इस समय रेंटल इनकम पर रिपेयर और मेंटेनेंस के लिए फिलहाल 30 फीसदी का स्टैंडर्ड डिडक्शन मिलता है। NAREDCO ने स्टैंडर्ड डिडक्शन को बढ़ाकर 50% करने का सुझाव दिया है। नरेडको का कहना है कि यदि यह सुधार किए गए तो रेंटल हाउसिंग में निवेश करने वालों को निवेश में बेहतरीन रिटर्न मिलेगा। इससे लोग किराये पर देने के लिए भी ज्यादा मकान खरीदेंगे।

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