इलेक्ट्रॉनिक हैंड से 23 साल बाद फिर चला सकेंगे वाहन:अब तक 328 लोगों को मिले नए हाथ, आज भोपाल में कैंप का आखिरी दिन

साल 2003 में सिरोंज में अपने खेत में काम करते समय महेंद्र सिंह करंट की चपेट में आ गए। इस हादसे में उनके दोनों हाथ जल गए। अब साल 2026 में करीब 23 साल बाद उन्हें नए हाथ मिलने जा रहे हैं। महेंद्र का कहना है कि यह बेहद भावुक पल है। 23 साल बाद ऐसा होगा कि वे वाहन तक चला सकेंगे। दोनों हाथ ना होने से वे अपने दैनिक कार्यों के लिए भी परिवार पर आश्रित थे। अब यह हाथ लगने से अपने काम खुद कर सकेंगे।
अकेले महेंद्र ही नहीं बल्कि मध्यप्रदेश में स्वास्थ्य विभाग ने विशेष कैंप आयोजित कर अब तक 328 लोगों को इलेक्ट्रॉनिक हैंड लगाए जा चुके हैं। मंगलवार को हथाईखेड़ा सिविल अस्पताल में इस विशेष कैंप के जरिए नए आर्टिफिशियल हाथ दिए जाएंगा। अब तक अकेले भोपाल में 142 लोग इस कृत्रिम हाथ के लिए रजिस्ट्रेशन करा चुके हैं।
सीएमएचओ बोले- अब लोग खुद से पानी पी सकेंगे
सीएमएचओ डॉ. मनीष शर्मा ने कहा कि इलेक्ट्रॉनिक कृत्रिम हाथ NHM (राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन) के जरिए उन लोगों को लगाए जा रहें हैं, जिनके कोहनी के नीचे से हाथ नहीं हैं। इसके जरिए वे रोजमर्रा के कार्य कर सकेंगे। दूसरों पर उनकी निर्भरता भी कम होगी। इस हाथ की मदद से व्यक्ति ग्लास पकड़ सकता है, गाड़ी चला सकता है और यह दो साल की बैटरी की वारंटी के साथ दिया जा रहा है। दो दिन में इसे एक बार चार्ज करने की जरूरत पड़ेगी। अभी जो लोग पानी पीने तक के लिए दूसरों की मदद मांगते थे, वे इस तरह के सभी काम खुद कर सकेंगे।
करंट ने छीने सबसे ज्यादा हाथ भोपाल में जो पीड़ित इलेक्ट्रॉनिक हैंड लगवाने आए उसमें सबसे ज्यादा वो लोग हैं, जिनका करंट ने हाथ छीन लिया। इसके बाद दूसरे नंबर पर एक्सीडेंट और हादसे में लोगों ने हाथ गवाएं। वहीं, तीसरे नंबर पर जन्मजात हाथ ना होने की बात सामने आई।
इंदौर होगा पांचवां शहर, जहां लगेगा कैंप NHM यह विशेष कैंप प्रदेश के 5 शहरों में लगाए जाएंगे। अब तक रीवा, बैतूल, सागर और भोपाल में कैंप का आयोजन किया जा चुका है। अब इसके बाद पांचवां शहर इंदौर होगा, जहां यह विशेष शिविर लगाया जाएगा। अधिकारियों के अनुसार अब तक सबसे ज्यादा इलेक्ट्रॉनिक हैंड 142 भोपाल में लगाए गए हैं।





