कंगाल पाकिस्तान बन रहा ‘गुलाम’, शहबाज शरीफ ने क्यों कही इज्जत गंवाने की बात, 5 कारणों से समझिए

इस्लामाबाद: पाकिस्तान फिलहाल डिफॉल्ट होने से बच गया है लेकिन यह ऐसी स्थिति में पहुंच गया है जहां आर्थिक आजादी बहुत दूर की चीज दिखाई देती है। कर्ज लेकर अपना खर्च चलाने वाला पाकिस्तान अब गहरी आर्थिक समस्या से जूझ रहा है और आर्थिक गुलामी की तरफ बढ़ रहा है। इस्लामाबाद को अब केवल चीन का सहारा है लेकिन यह काफी नहीं है। चीन का समर्थन वित्तीय तनाव को कम कर सकता है लेकिन यह देश की दम तोड़ रही अर्थव्यवस्था में जान नहीं डाल सकता। पाकिस्तान से बहुराष्ट्रीय कंपनियां दूर जा रही हैं और IMF अपने कार्यक्रमों के लिए कड़ी शर्तें थोप रहा है। इन सबसे बीच देश में चरमपंथी हिंसा में वृद्धि ने इस बोझ को बढ़ा दिया है।
शहबाज शरीफ ने सुनाया कर्ज का किस्सा
शहबाज शरीफ का एक वीडियो सामने आया है जिसमें उन्होंने स्वीकार किया कि कर्ज लेने के लिए सामने वाले की गलत ख्वाहिशों को पूरा करना पड़ता है। शहबाज ने कहा, ‘मैं किस तरह से आपको बताऊं कि किस तरीके से उन दोस्त मुमालिक को कर्जे देने के लिए दरख्वास्त दी। उन दोस्त मुमालिक ने हमें मायूस नहीं किया लेकिन आप जानते हैं कि जो कर्ज लेने जाता है, उसका सिर झुका हुआ होता है।’ शरीफ ने यह भी बताया कि वह और आर्मी चीफ आसिम मुनीर कई देशों में कर्ज मांगने गए थे। आइए पाकिस्तान के संकट को 5 पॉइंट में समझते हैं।
1- कर्ज लेकर चल रहा पाकिस्तान का खर्च
पाकिस्तान की इकोनॉमी पूरी तरह से कर्ज पर चल रही है। सार्वजनिक कर्ज देश की जीडीपी के 70-80 फीसदी के दायरे तक पहुंच गया है। देनदारियों को बार-बार उधार और IMF के नेतृत्व वाले कार्यक्रमों के माध्यम से रीफाइनेंस किया जाता है। पाकिस्तान भले ही देनदारियों को आगे बढ़ा दे लेकिन यह समय उसे अपनी स्वायत्तता की कीमत पर मिलता है। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ का कबूलनामा बताता है कि दूसरे देशों से कर्ज मांगते समय पाकिस्तान को कंप्रोमाइज करना पड़ा था।
2- पाकिस्तान की गिरती अर्थव्यवस्था
पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था संकट के दौर से गुजर रही है। विश्व बैंक ने अनुमान लगाया है कि जून 2025 को समाप्त होने वाले वित्तीय वर्ष में अर्थव्यवस्था में 3 फीसदी की वृद्धि हुई है। 2026 में भी इसी गति से बढ़ने का अनुमान लगाया है। वहीं, IMF ने 2026 में पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था के लिए 3.2% की वृद्धि का अनुमान जाहिर किया है।
3- पाकिस्तान का निर्यात संकट
पाकिस्तान का एक्सपोर्ट लगातार कमजोर हो रहा है। विश्व बैंक के अनुसार, पाकिस्तान की जीडीपी में एक्सपोर्ट का हिस्सा 2024 में 10.4% प्रतिशत हो गया है। 1990 के दशक में यह 16% हुआ करता था। स्टेट बैंक ऑफ ऑफ पाकिस्तान के अनुसार, पड़ोसी देशों से व्यापार घाटा 44% पहुंच गया है। मौजूदा वित्तीय वर्ष के पहली छमाही में बांग्लादेश, अफगानिस्तान और श्रीलंका के साथ पाकिस्तान के व्यापार में निगेटिव ग्रोथ दर्ज की गई है।
4- मल्टीनेशनल कंपनियां छोड़ रहीं देश
पिछले कई सालों में मल्टीनेशनल कंपनियां लगातार पाकिस्तान छोड़ रही हैं। बीते साल 2025 के अक्टूबर में प्रॉक्टर एंड गैंबल ने घोषणा की कि वह पाकिस्तान में निर्माण और कमर्शियल ऑपरेशन बंद कर देगी। यह अकेली कंपनी नहीं है। पाकिस्तान छोड़कर जाने वालों में एली लिली, शेल, माइक्रोसॉफ्ट, उबर, यामाहा और टेलीनॉर जैसे बड़े नाम शामिल हैं। फॉर्मास्युटिकल सेक्टर को सबसे ज्यादा झटका लगा है। पाकिस्तान में 48 मल्टीनेशनल कंपनियां थीं, लेकिन आज उनमें आधी भी नहीं रह गई हैं।
5- चरमपंथी हिंसा से टूट रहा पाकिस्तान
पाकिस्तान ने साल 2025 में आतंकवादी हमलों में 34% की वृद्धि देखी। पाकिस्तान इंस्टीट्यूट फॉर पीस स्टडीज के अनुसार, 2025 में 699 आतंकवादी हमले दर्ज किए गए। इनमें कम से कम 1034 लोग मारे गए और 1366 घायल हुए। मरने वालों में 42 फीसदी से ज्यादा सुरक्षा कर्मी और पुलिस जवान थे। इन आतंकवादी हमलों ने निवेशकों को डरा दिया है। पाकिस्तान अब सुरक्षित स्थान नहीं रह गया है। हाल ही में अमेरिका ने अपनी ट्रैवेल गाइडलाइन में पाकिस्तान को खतरनाक देश की श्रेणी में रखा था। वहीं, देश के लिए अपने सीमित संसाधनों को विकास से हटाकर सुरक्षा के लिए लगाना पड़ रहा है, जो एक दोहरा बोझ है।





