पर भ्रम फैलाने वालों पर सुप्रीम कोर्ट सख्त; सरकार ने नहीं मांगा समय, 4 फरवरी को होगी अगली सुनवाई

भोपाल। अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) को 27 प्रतिशत आरक्षण देने के मामले में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई चल रही है। गुरुवार को भी मामले की सुनवाई हुई। इस दौरान सरकार की ओर से एडिशनल सालिसिटर जनरल केएम नटराज, स्टैंडिंग काउंसिल मृणाल एलकर, हरमीत सिंह रूपराह, अतिरिक्त महाधिवक्ता धीरेंद्र सिंह परमार और शासकीय अधिवक्ता राजन चौरसिया उपस्थित रहे।हालांकि सुप्रीम कोर्ट की बेंच केवल इस सप्ताह के लिए होने के कारण मामला चार फरवरी को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया। सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से न तो सुनवाई आगे बढ़ाने का निवेदन किया गया और न ही किसी प्रकार का समय मांगा गया।
गलत सूचना फैलाई गई
इसके बावजूद मीडिया में यह तथ्य प्रसारित किया गया कि सरकार की ओर से समय मांगा गया है। इस पर शुक्रवार को एडिशनल सालिसिटर जनरल केएम नटराज ने आपत्ति दर्ज कराई। न्यायालय ने इस पर गंभीरता से संज्ञान लेते हुए आगामी सुनवाई के दौरान इस विषय पर विचार करने को कहा है।
सरकार ओबीसी आरक्षण को लेकर गंभीर नहीं
दरअसल, गुरुवार को कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी, पूर्व मुख्यमंत्री कमल नाथ और प्रदेश महिला कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष विभा पटेल ने आरोप लगाया कि सरकार ओबीसी आरक्षण को लेकर गंभीर नहीं है। आरोप लगाया गया कि सरकार के वकील या तो सुनवाई में उपस्थित नहीं होते या फिर समय बढ़ाने की मांग करते हैं।
जल्द ही आंदोलन की घोषणा की जाएगी
ओबीसी महासभा की कोर कमेटी के सदस्य एवं याचिकाकर्ता लोकेंद्र गुर्जर ने भी इसी प्रकार के आरोप लगाए और कहा कि जल्द ही आंदोलन की घोषणा की जाएगी। इन बयानों के बाद इंटरनेट मीडिया पर तथ्य प्रसारित हुए, जिससे गलत संदेश गया।
जबकि गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट की बेंच केवल इसी सप्ताह के लिए बैठी थी और न्यायालय ने कहा कि इस मामले की सुनवाई अगले बुधवार यानी चार फरवरी को की जाएगी। सुनवाई के दौरान न तो सरकार की ओर से समय मांगा गया और न ही सुनवाई आगे बढ़ाने का कोई निवेदन किया गया।
क्या सरकार के वकील न्यायालय में उपस्थित नहीं हुए
यह भी गलत तथ्य प्रसारित किए गए कि सरकार के वकील न्यायालय में उपस्थित नहीं हुए, जबकि सरकार के वकील पूरी तैयारी के साथ न्यायालय में मौजूद थे। शुक्रवार को एडिशनल सालिसिटर जनरल केएम नटराज ने न्यायालय के समक्ष यह तथ्य रखे कि मीडिया में गलत जानकारियां प्रसारित की जा रही हैं। इसे न्यायालय ने गंभीरता से लेते हुए चार फरवरी को होने वाली सुनवाई में इस विषय पर संज्ञान लेने को कहा है।





