राजिम कुंभ कल्प के सरस मेला में सजी आत्मनिर्भर महिलाओं की मेहनत और हुनर

गरियाबंद। राजिम कुंभ कल्प मेला 2026 में हर ओर कुछ न कुछ खास देखने को मिल रहा है। इस वर्ष मेले में आयोजित संभागीय सरस मेला स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं के लिए आगे बढ़ने और आत्मनिर्भर बनने का अवसर प्रदान कर रही है। यहां उपलब्ध उत्पादों की शुद्धता, गुणवत्ता और ताजगी लोगों को आकर्षित कर रही है। मिलावट के इस दौर में सरस मेला मेला भ्रमण पर आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। बिंद्रानवागढ़ से आई गौरी गणेश स्वसहायता समूह की सदस्य सविता दीदी अपने स्टॉल पर बड़ी पापड़, शहद, बांस से बने टोकरी, गुलदस्ता, सूपा, झाड़ू सहित अनेक घरेलू उत्पादों की बिक्री कर रही हैं। उन्होंने बताया कि पहले वे घर की चारदीवारी तक ही सीमित थीं और दुनियादारी से लगभग अनजान थीं। ग्राम संगठन बिहान की बहनों ने उन्हें समूह से जोड़ा, जिसके बाद आज वे समूह के माध्यम से कार्य कर नियमित आय अर्जित कर रही हैं। सविता दीदी ने कहा कि बिहान महिलाओं को आगे बढ़ने का अवसर प्रदान करने वाला सशक्त माध्यम बन गया है।इसी तरह प्रगति संगठन, धवलपुर की महिलाएं भी अपने स्टॉल के माध्यम से अचार, पापड़ और अन्य घरेलू उत्पादों की बिक्री कर रही हैं। समूह की महिलाओं ने बताया कि मेले के शुरुआत से ही ग्राहकों की लंबी कतार लग रही है, वहीं आगामी दिनों में भी भीड़ बढ़ने की उम्मीद है। उन्होंने बताया कि उनके समूह में 10 महिलाएं हैं, जो अलग-अलग उत्पाद तैयार कर बाजार में उपलब्ध कराती हैं। इससे होने वाली आमदनी उनके लिए आर्थिक संबल साबित हो रही है और उनकी आर्थिक स्थिति सुदृढ़ हो रही है।

सरस मेला के संभागीय नोडल अधिकारी पतंजलि मिश्रा (डीपीएम) ने बताया कि इस मेले के माध्यम से विभिन्न क्षेत्रों में आजीविका से जुड़ी महिलाओं को बेहतर मंच और बाजार उपलब्ध हो रहा है। उन्होंने कहा कि इससे महिलाओं को अपने उत्पादों की बिक्री का अवसर मिलेगा, जिससे उनकी आय में वृद्धि होगी और महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण को मजबूती मिलेगी।

सरस मेला में बिक्री के लिए रखे गए अधिकांश उत्पादों की कीमतें अन्य स्थानों की तुलना में थोड़ी अधिक बताई जा रही हैं। छांटा निवासी शंकर लाल साहू ने बताया कि वे लकड़ी और बांस से बने फर्नीचर देख रहे थे, जिसकी बनावट और फिनिशिंग उन्हें काफी पसंद आई, हालांकि कीमत अधिक होने के कारण मोलभाव करना पड़ा। वहीं लोहारी, गरियाबंद से आए एक युवक ने बताया कि वे हर वर्ष कुंभ मेला देखने राजिम आते हैं और इस बार भी दुकानों की संख्या काफी अधिक है। मेले में घूमने का उन्हें भरपूर आनंद मिल रहा है। पीपरछेड़ी, गरियाबंद के उबेलाल और हेमंत ने कहा कि आजीविका मिशन बिहान के माध्यम से गांव की महिलाओं को आगे बढ़ने का अवसर मिला है और आज वे शहर की महिलाओं के साथ कंधे से कंधा मिलाकर आगे बढ़ रही हैं।

संभागीय सरस मेला में दर्जनों स्टॉल लगाए गए हैं, जिनमें खाद्य सामग्री के भी कई स्टॉल शामिल हैं। यहां अरसा रोटी, बड़ा, सोहारी जैसे पारंपरिक छत्तीसगढ़ी व्यंजन लोगों को खूब लुभा रहे हैं। एक स्टॉल संचालक ने बताया कि छह बड़े की कीमत मात्र 30 रुपये रखी गई है, जिसे लोग गर्मागरम चख रहे हैं। छत्तीसगढ़ की प्रसिद्ध अरसा रोटी का स्वाद लेने के लिए लोग विशेष रूप से सरस मेला पहुंच रहे हैं। इसी क्रम में आजीविका मिशन के अंतर्गत छत्तीसगढ़ हैंडिकैप्ड वेलफेयर सोसाइटी द्वारा संचालित संकल्प सेवा संस्थान की महिलाएं भी स्टॉल लगाकर उत्पादों की बिक्री कर रही हैं। संस्था की सदस्य सुनीता साहू ने कहा कि बिहान उनके लिए वरदान साबित हुआ है। इससे महिलाएं आत्मनिर्भर बन रही हैं और आर्थिक रूप से सशक्त हो रही हैं।

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