27 जिलों में ग्रामीण बाजार शुरू:घर बैठे मिलेंगे डिंडोरी-मंडला के मिलेट्स… बुकिंग के लिए बन रहा पोर्टल

भोपाल, मप्र में पहली बार डिंडोरी, मंडला जैसे दूरस्थ जिलों में स्वसहायता समूहों द्वारा तैयार किए गए मिलेट्स आपको घर बैठे मिलेंगे। इसके लिए स्टेट रुरल लाइवहुड मिशन द्वारा एक पोर्टल तैयार कर रहा है, जिस पर 350 से अधिक उत्पाद सूचीबद्ध किए जाएंगे।
इन उत्पादों को अभी मप्र के पहले ग्रामीण बाजार ( जो कि राजधानी के भोपाल हाट में संचालित है) की 40 दुकानों से बेचा जा रहा है। लेकिन इतनी कम दुकानों में मप्र की बहुत कम महिलाएं अपना उत्पाद बेच पाती हैं। इसी बात को ध्यान में रखकर पहली बार ग्रामीण बाजार का विकेंद्रीकरण करने की तैयारी है।
मप्र आजीविका मिशन ने भोपाल के साथ एक साल में 27 जिलों के भीतर ऐसे ग्रामीण बाजार तैयार कर दिए हैं, लेकिन सभी उत्पाद सभी जगह नहीं मिल पाते, इसलिए मिशन द्वारा दो तरह से काम किया जा रहा है। पहला उत्पादों की सूची तैयार करके पोर्टल पर अपलोड करने की तैयारी और दूसरा इनको घर-घर पहुंचाने के लिए इंडिया पोस्ट से अनुबंध करना। यह काम अगले दो से तीन महीने में पूरे जाएंगे।
डिंडोरी, मप्र के डिंडोरी, बालाघाट, मंडला सहित 7 जिलों में कोदो-कुटकी, ज्वार, बाजरा और मक्का जैसे मिलेट्स का बड़े पैमाने पर उत्पादन होता है, जिनकी बाजार में अच्छी मांग है। लेकिन उपभोक्ताओं तक पहुंचाने की कोई प्रभावी व्यवस्था नहीं थी।
मिलेट्स के साथ अशोकनगर की चंदेरी साड़ी, उज्जैन की बटिका प्रिंट साड़ी, शिवपुरी का मूंगफली तेल, मुरैना का सरसों तेल व नरसिंहपुर, नर्मदापुरम और हरदा की दालें भी जोड़ी गई हैं। स्वसहायता समूहों के डेयरी उत्पादों के लिए आउटलेट खोले जाएंगे। ‘पलाश के संग होली के रंग’ अभियान के तहत 15 फरवरी के बाद पलाश रंग हाट में उपलब्ध होंगे।
बचे माल के लिए वेयरहाउस बनाएंगे
मेले या मार्ट पर बचे सामान को सुरक्षित रखने और दूसरी जगह पहुंचाने के लिए छोटे वेयरहाउस से अनुबंध किया जाएगा। प्रत्येक जिले में स्वसहायता समूहों के उत्पाद स्टोर होंगे और आर्डर मिलने पर यही से डिलीवर किए जा सकेंगे।
डिमांड के हिसाब से उत्पादन रखेंगे
मप्र में स्वसहायता समूहों द्वारा बनाए जाने वाले उत्पादों की डिमांड बढ़ रही है। पहले हमने आजीविका मार्ट शुरू किए थे, जिनमें काफी अच्छा प्रतिसाद हमें मिला। अब हम होम डिलीवरी के लिए इंडिया पोस्ट से चर्चा कर चुके हैं। जल्द अनुबंध करके इस पर काम शुरू कर देंगे। हमारा प्रयास है कि मप्र के एक जिले का उत्पाद दूसरे जिले में मिले। बिक्री के आधार पर हम अध्ययन करेंगे कि किस उत्पाद की कहां अधिक डिमांड है। उसी के हिसाब से उस जिले में हम उत्पादों को रखवाएंगे।
– हर्षिका सिंह, सीईओ, मप्र आजीविका मिशन





