कर्नल सोफिया कुरैशी के विरुद्ध अपमानजनक टिप्पणी करने वाले मंत्री विजय शाह पर चलता रहेगा केस

भोपाल। कर्नल सोफिया कुरैशी के विरुद्ध अपमानजनक टिप्पणी करने वाले मध्य प्रदेश सरकार के जनजातीय कार्य विभाग के मंत्री विजय शाह के मामले में राज्य सरकार अभियोजन की स्वीकृति दे या नहीं, पर केस चलता रहेगा। कभी न कभी पुलिस को संबंधित न्यायालय में चालान प्रस्तुत करना होगा। तब इस पर कोर्ट के निर्णय के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।

वरिष्ठ वकीलों का कहना है कि चूंकि एफआइआर दर्ज है, इसलिए विधिक कार्रवाई तो होगी ही। यदि अभियोजन स्वीकृति नहीं मिलती तो कोई भी व्यक्ति हाई कोर्ट में याचिका (रिट पिटीशन) लगा सकता है।

पूर्व महाधिवक्ता विवेक तन्खा ने क्या कहा?

पूर्व महाधिवक्ता विवेक तन्खा कहते हैं कि सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि सरकार अभियोजन की स्वीकृति दे। इस कारण ऐसा नहीं लगता कि सरकार स्वीकृति नहीं देगी। अभियोजन स्वीकृति नहीं मिलती तो केस थाने में लंबित रहेगा। जब विजय शाह मंत्री पद पर नहीं रहेंगे तो अभियोजन स्वीकृति की आवश्यकता ही नहीं होगी और केस अपने आप फिर चालू हो जाएगा।

मामले में नौ फरवरी को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई

पूर्व अतिरिक्त महाधिवक्ता अजय गुप्ता कहते हैं कि स्वीकृति मिले या नहीं, दोनों परिस्थितियों को कोर्ट में चुनौती दी जा सकती है। सरकार स्वीकृति देती है तो शाह चुनौती दे सकते हैं। मामले में नौ फरवरी को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होनी है।

त्यागपत्र लेने के पक्ष में नहीं भाजपा

आदिवासी वर्ग से होने के कारण मंत्री विजय शाह से भाजपा त्यागपत्र लेने के पक्ष में नहीं है और न ही सरकार उनके विरुद्ध अभियोजन की अनुमति देना चाहती है। इसी वजह से प्रदेश भाजपा संगठन और सत्ता इस मामले में निर्णय के लिए पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व की ओर देख रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने दिल्ली प्रवास के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से भेंट कर इस विषय पर चर्चा कर चुके हैं।

दिल्ली के बड़े कानूनविदों से राय

सूत्रों का कहना है कि दिल्ली के बड़े कानूनविदों से विजय शाह मामले में राय ली जा रही है। अटार्नी जनरल से भी इस बारे में सलाह लेकर राज्य सरकार सुप्रीम कोर्ट में अपनी रिपोर्ट सौंपेगी। यह भी बताया गया है कि राज्य सरकार कानूनी पहलुओं का हवाला देकर नौ फरवरी को होने वाली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट से और समय की मांग कर सकती है।

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