बार-बार KYC की टेंशन खत्म, सरकारी डेटाबेस से तुरंत होगा वेरिफिकेशन, जानिए कैसे

नई दिल्ली: बैंकिंग और फाइनैंस से जुड़े कामों के लिए अब आपको बार-बार KYC की झंझट नहीं झेलनी होगी। मामले से जुड़े लोगों का कहना है कि सरकार फरवरी के आखिर तक सेंट्रल केवाईसी रेकॉर्ड्स रजिस्ट्री (CKYCRR 2.0) का नया और बेहतर वर्जन लाने जा रही है। इसे डिजिलॉकर से जोड़ा जाएगा, जिससे आपके दस्तावेजों का वेरिफिकेशन तुरंत और सीधे सरकारी डेटाबेस से हो सकेगा।

  1. क्या है अहम?
    मामले से जुड़े लोगों का कहना है कि सबसे बड़ा बदलावडिजिलॉकर(DigiLocker) के साथ इसका पूरी तरह जुड़ना होगा। इससे सरकारी दस्तावेज जारी करने वाली संस्थाओं के जरिए सीधे और तुरंत डॉक्यूमेंट्स की जांच और वेरिफिकेशन हो सकेगा। उम्मीद है कि इससे ग्राहकों के लिए समय-समय पर होने वाले KYC अपडेट की प्रक्रिया आसान हो जाएगी। बैंकों, बीमा कंपनियों, म्यूचुअल फंड और अन्य संस्थानों में बार-बार होने वाले वेरिफिकेशन से छुटकारा मिलेगा।
  2. कैसे होगा वेरिफिकेशन?
    डिजिलॉकर क्लाउड-आधारित एक सुरक्षित प्लैटफॉर्म है, जहां दस्तावेज और सर्टिफिकेट स्टोर और वेरीफाई किए जाते हैं। अधिकारियों ने ET को बताया कि CKYCRR 2.0 के तहत, संस्थानों द्वारा अपलोड किए गए दस्तावेजों की जांच सीधे उन अथॉरिटीज से की जाएगी जिन्होंने वे डॉक्यूमेंट जारी किए हैं। फिलहाल, रिपोर्ट करने वाली संस्थाएं CKYC डेटाबेस में रजिस्टर मोबाइल नंबर के जरिए KYC रेकॉर्ड खोज सकती हैं, जिससे ग्राहकों के रेकॉर्ड तक पहुंचना आसान हो गया है। अपग्रेड होने वाली इस रजिस्ट्री में AI का इस्तेमाल करके फोटो मिलान किया जाएगा ताकि दो रेकॉर्ड न बनें। PAN, ड्राइविंग लाइसेंस और आधार डेटाबेस के जरिए सीधे एपीआई (API) आधारित वेरिफिकेशन भी हो सकेगा। यह सिस्टम संस्थानों को डुप्लीकेट केवाईसी रेकॉर्ड की रिपोर्ट करने, उन्हें बंद करने या आपस में जोड़ने की सुविधा भी देगा।
  3. प्रक्रिया को सरल बनाने पर जोर
    साल 2025-26 के बजट में सरकार ने KYC नियमों को सरल बनाने और समय-समय पर इसे अपडेट करने के लिए एक आसान तरीका लाने का ऐलान किया था। तब से कुछ कदम उठाए जा चुके हैं। इनमें व्यक्तिगत और कानूनी संस्थाओं के KYC रेकॉर्ड डाउनलोड करने के लिए ऐक्स्ट्रा सिक्योरिटी (ऑथेंटिकेशन) जोड़ना शामिल है।
  4. क्या है तैयारी?
    सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, CERSAI ने CKYC रजिस्ट्री पर लगभग 8,000 संस्थाओं और ‘सिक्योरिटी इंटरेस्ट रजिस्ट्री’ पर करीब 6,000 संस्थाओं को जोड़ा है।

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