ग्लोबल इलेक्ट्रॉनिक्स मार्केट में कैसे लीडर बनेगा भारत? नीति आयोग ने बताया फॉर्म्यूला

नई दिल्ली: इलेक्ट्रॉनिक्स भारत का दूसरा बड़ा एक्सपोर्ट सेक्टर बन चुका है, लेकिन इसका फोकस काफी हद तक असेंबली आधारित मैन्युफैक्चरिंग पर बना हुआ है। दुनिया में इलेक्ट्रॉनिक्स का बड़ा केंद्र बनने के लिए भारत को कंपोनेंट्स की मैन्युफैक्चरिंग और वैल्यू एडिशन पर जोर लगाना होगा। नीति आयोग ने शुक्रवार को जारी एक रिपोर्ट में यह बात कही। आयोग ने ट्रेड वॉच क्वॉर्टली में कहा कि ग्लोबल इलेक्ट्रॉनिक्स डिमांड में भारत का हिस्सा साल 2015 से 2024 के बीच 17.2% CAGR से बढ़ा है, जबकि इसी दौरान ग्लोबल ग्रोथ 4.4% रही।
भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स एक्सपोर्ट करीब 42.1 बिलियन डॉलर का है, जबकि ग्लोबल मार्केट 4.6 ट्रिलियन डॉलर का है। भारत ने मोबाइल फोन, कंस्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स और कम्युनिकेशन इक्विपमेंट्स के मामले में अच्छा दमखम दिखाया है। इसमें कहा गया कि ग्लोबल इलेक्ट्रॉनिक्स ट्रेड बहुत हद तक पूर्वी एशिया में केंद्रित है और चीन, ताइवान, साउथ कोरिया और वियतनाम इंटीग्रेटेड सर्किट्स और सेमीकंडक्टर जैसे हाई-टेक कंपोनेंट्स बनाने में आगे हैं।
इलेक्ट्रॉनिक गुड्स का एक्सपोर्ट
वहीं, भारत मुख्य रूप से मोबाइल फोन, कंस्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स और कम्युनिकेशन इक्विपमेंट्स असेंबली करते हुए फिनिश्ड इलेक्ट्रॉनिक्स गुड्स का सप्लायर बना हुआ है। भारत में वैल्यू एडिशन, टेक्नोलॉजिकल लर्निंग और सप्लाई चेन इंटीग्रेशन के मोर्चे पर कमजोरी है। रिपोर्ट में सलाह दी गई कि भारत को कॉस्ट डिसएडवांटेज दूर करने, फ्री ट्रेड एग्रीमेंट्स का फायदा उठाने और स्ट्रैटेजिक कंपोनेंट्स की मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने की जरूरत है, जिससे इलेक्ट्रॉनिक्स गुड्स एक्सपोर्ट बढ़ सके।





