एकनाथ शिंदे पहुंचे दिल्ली, PM मोदी से करेंगे मुलाकात, BJP-शिवसेना के बीच चल रहे मनमुटाव को लेकर शिकायत करने की संभावना

मुंबई: शिवसेना नेता और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे सोमवार को दिल्ली पहुंच गए हैं। यहां वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह से मिलने वाले हैं। हालांकि इस मुलाकात के पीछे का सटीक कारण अभी तक रहस्य बना हुआ है। इस दौरे के संबंध में कोई आधिकारिक जानकारी नहीं है। इसके बावजूद यह अटकलें लगाई जा रही हैं कि राज्य के भीतर बीजेपी और शिवसेना के बीच चल रहा आपसी मनमुटाव ही इस दौरे की मुख्य वजह है।

किससे मिलेंगे शिंदे?
एकनाथ शिंदे सोमवार शाम दिल्ली के लिए रवाना हुए थे। वह मंगलवार को संसद पहुंच गए हैं। दरअसल बीजेपी और शिवसेना दोनों ने ही नगर निगम चुनावों में महत्वपूर्ण सफलता हासिल की। कुछ क्षेत्रों में शिवसेना का उम्मीदवार मेयर चुना गया, जबकि अन्य क्षेत्रों में बीजेपी के उम्मीदवार ने यह पद हासिल किया। इसके बाद जिला परिषद (डिस्ट्रिक्ट काउंसिल) के चुनाव हुए। इन चुनावों में भी बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी। हालांकि शिवसेना ने भी काफी सफलता हासिल की। इन चुनावों के दौरान कई निर्वाचन क्षेत्रों में बीजेपी और शिवसेना ने गठबंधन के रूप में चुनाव लड़ा था। हालांकि नतीजों के बाद यह आरोप लगाए गए कि शिवसेना को जानबूझकर सत्ता से बाहर रखा जा रहा है।

शिवसेना-बीजेपी के बीच मनमुटाव
इन घटनाओं के बाद शिवसेना ने आरोप लगाया कि जिला परिषद चुनावों में भी उन्हें कई क्षेत्रों में सत्ता से व्यवस्थित रूप से बाहर रखा जा रहा था और उनके साथ भेदभावपूर्ण व्यवहार किया जा रहा था। स्थानीय शिवसैनिकों ने इस बात पर गहरी नाराजगी व्यक्त की है कि रायगढ़ में बहुमत होने के बावजूद शिवसेना को समझौता करने के लिए मजबूर होना पड़ा। जबकि फलटण में पार्टी को पूरी तरह से दरकिनार कर दिया गया और सत्ता से बाहर रखा गया। खबरों के अनुसार, रायगढ़ की स्थिति के संबंध में ‘वर्षा’ बंगले पर एकनाथ शिंदे और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के सुनील तटकरे के बीच तीखी बहस हुई थी। इसके चलते यह माना जाता है कि शिंदे ने इन मुद्दों का कोई ठोस समाधान खोजने के प्रयास में दिल्ली की यह अचानक यात्रा की है।
KDMC में बीजेपी को ‘सदन के नेता’ का पद
कल्याण-डोंबिवली नगर निगम (KDMC) की आम सभा की बैठक पिछले दो महीनों से रुकी हुई थी। जो कि आखिरकार सोमवार को आयोजित की गई। जैसा कि उम्मीद थी कि सदन के नेता का पद बीजेपी के खाते में गया। मेयर हर्षाली थविल ने इस पद के लिए बीजेपी पार्षद वरुण पाटिल के चयन की घोषणा की। इसके अलावा इस नए प्रशासन के तहत गठित पहली स्थायी समिति में प्रमुख और वरिष्ठ नेताओं को नियुक्त किया गया है। जहां नगर निगम में अभी शिवसेना, बीजेपी और मनसे सत्ता में हैं। वहीं शिवसेना (ठाकरे गुट) विपक्ष की बेंचों पर बैठी है।

स्थायी समिति के लिए 16 सदस्यों को चुना
अपनी-अपनी संख्या बल के आधार पर स्थायी समिति के लिए 16 सदस्यों को चुना गया है। इसमें शिवसेना को आठ सीटें, बीजेपी को सात और ठाकरे गुट को एक सीट मिली है। चुने गए सदस्यों में शिवसेना का प्रतिनिधित्व करने वाले गजानन पाटिल, विकास म्हात्रे, जयवंत भोईर, मल्लेश शेट्टी, नवीन गावड़ी, महेश गायकवाड़ और विजया पोटे हैं। साथ ही मनसे सदस्य गणेश लांडगे शामिल हैं।

महायुति में आतंरिक विवाद नहीं
बीजेपी का प्रतिनिधित्व करने वाले दीपेश म्हात्रे, मंदार हाल्बे, दया गायकवाड़, मनीषा गायकवाड़, उपेक्षा भोईर, मुकुंद पेडणेकर और नंदू म्हात्रे शामिल हैं। वहीं ठाकरे गुट का प्रतिनिधित्व विशाल गरवे कर रहे हैं। स्थायी समिति में राजनीतिक दिग्गजों की एक मजबूत टीम के शामिल होने के साथ अध्यक्ष पद के लिए कड़ी टक्कर होने की उम्मीद है। चूंकि बीजेपी ने यह दावा किया है कि महायुति के भीतर कोई आंतरिक विवाद नहीं है, इसलिए अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या यह प्रतिष्ठित पद अंत बीजेपी को ही मिलेगा।

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