होर्मुज में दब गई भारत-पाकिस्तान समेत कई देशों की नस, ईरान युद्ध ने कैसे हिला दी दुनिया की अर्थव्यवस्था

नई दिल्ली: मिडिल ईस्ट में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव ने वैश्विक अर्थव्यवस्था की नींव हिला दी है। इस युद्ध के कारण खाड़ी देशों से होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते तेल, गैस और ईंधन के टैंकर आने में परेशानी हो रही है। क्योंकि ईरान ने वहां से गुजरने वाले ज्यादातर टैंकरों को रोक दिया है। इससे तेल और गैस संकट पैदा हो गया है जिससे भारत समेत कई देश प्रभावित हुए हैं। कच्चे तेल की कीमतें प्रति बैरल 112 डॉलर के ऊपर पहुंच गई हैं। यह युद्ध अगर लंबा चला तो न केवल एक बड़ा ऊर्जा आपूर्ति संकट पैदा कर सकता है, बल्कि पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था पर विनाशकारी प्रभाव डाल सकता है।
होर्मुज बंदिश से भारत पर असर
- भारत अपनी 90% कच्चे तेल की जरूरतों को आयात से पूरा करता है। साथ ही, लगभग 50% एलपीजी (LPG) भी आयात करता है।
- भारत का अधिकांश ऊर्जा आयात होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते होता है, जो संघर्ष के केंद्र में है।
- तेल की कीमतें बढ़ने से भारतीय रुपया रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया है। इससे आर्थिक विकास पर असर पड़ेगा। देश में प्रीमियम पेट्रोल और इंडस्ट्रियल डीजल की कीमतें बढ़ गई हैं।
- रेस्तरां और फैक्ट्री किचन जैसी फूड सर्विस सीधे तौर पर प्रभावित होंगी, जिससे आम आदमी के लिए महंगाई बढ़ सकती है। कई जगह असर दिखाई भी देने लगा है।
G7 देशों की इकनॉमी पर भी खतरा
इस ऊर्जा संकट से G7 देशों की इकनॉमी पर भी खतरा पैदा हो रहा है। इन्हें दुनिया की सबसे मजबूत 7 अर्थव्यवस्थाएं माना जाता है। तेल के संकट ने इन विकसित देशों को भी चिंता में डाल दिया है।
- जर्मनी ऊर्जा पर बहुत ज्यादा निर्भर है। इसका मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर अभी स्थिर हो रहा है, लेकिन वैश्विक मंदी के प्रति संवेदनशील बना हुआ है। राजकोषीय सहायता के लिए सीमित जगह है।
- इटली भी बड़ा मैन्युफैक्चरिंग बेस है। यह देश भी तेल-गैस की खपत पर बहुत अधिक निर्भर है।
- ब्रिटेन पर भी ऊर्जा का संकट मंडरा रहा है। यहां बिजली की कीमतें गैस की कीमतों से जुड़ी हैं। अगर तेल और गैस की कीमतें बहुत ज्यादा बढ़ती हैं तो इससे महंगाई का दबाव बनेगा।
- जापान अपनी 95% तेल की जरूरतों को पश्चिम एशिया से आयात करता है। कमजोर येन के कारण ईंधन लागत बढोगी। इससे जापान में खाने-पीने की चीजों की कीमतें बढ़ जाएंगी।
पाकिस्तान समेत इन पर ज्यादा असर
युद्ध के कारण ईंधन की बढ़ती कीमतों का सबसे ज्यादा असर श्रीलंका, पाकिस्तान और मिस्र जैसे नाजुक अर्थव्यवस्था वाले देशों पर सबसे ज्यादा पड़ेगा। इन देशों में पहले से ही संकटपूर्ण आर्थिक स्थिति है, जो इस नए तनाव से और भी गंभीर हो सकती है।
- श्रीलंका ऊर्जा बचाने के लिए साप्ताहिक सार्वजनिक अवकाश, ईंधन की राशनिंग, और सार्वजनिक सेवाओं में कटौती कर सकता है।
- पहले से ही संकट के कगार पर खड़े पाकिस्तान में ईंधन की कीमतों में और बढ़ोतरी हो सकती है। इससे पहले पाकिस्तान इस संकट के कारण स्कूलों का अस्थाई बंद कर चुका है।
- मिस्र में भी स्थिति बहुत अच्छी नहीं है। ईंधन और भोजन की लागत बढ़ गई है। वहीं पर्यटन और स्वेज नहर के रेवेन्यू पर भी खतरा पैदा हो गया है। मुद्रा भी कमजोर हो रही है। कर्ज चुकाने का दबाव बढ़ रहा है।
खाड़ी देश भी प्रभावित
होर्मुज की नस दबने से खाड़ी देश भी प्रभावित हो रहे हैं। तेल की कीमतों में वृद्धि से उनकी आय बढ़ सकती है, लेकिन तेल के एक्सपोर्ट में परेशानी संकट खड़ा कर देगी। होर्मुज के बंद होने से ऊर्जा निर्यात पूरी तरह ठप हो सकता है और प्रवासी श्रमिकों से आने वाली विदेशी मुद्रा पर जोखिम मंडरा सकता है।





