मारुति ने निवेशकों को दिया 1.32 लाख करोड़ का झटका, इस साल 25 फीसदी गिर चुका है शेयर

नई दिल्ली: देश की सबसे बड़ी ऑटो कंपनी मारुति सुजुकी के लिए साल की शुरुआत अच्छी नहीं रही है। हालांकि साल के कुछ शुरुआती ट्रेडिंग सेशन में कंपनी का शेयर रेकॉर्ड हाई पर पहुंच गया था। लेकिन उसके बाद इसमें 25 फीसदी गिरावट आ चुकी है। इस दौरान निवेशकों को 1.32 लाख करोड़ रुपये की चपत लगी है। आज कंपनी का शेयर मामूली तेजी के साथ 12602.65 रुपये पर बंद हुआ जबकि 5 जनवरी को यह 17,371.60 रुपये तक पहुंचा था। क्यों गिरा कंपनी का शेयर?

मारुति के शेयर ने इस साल कार बनाने वाली कंपनियों में सबसे खराब प्रदर्शन किया है। महिंद्रा एंड महिंद्रा के शेयरों में 19 फीसदी और हुंडई मोटर इंडिया के शेयरों में इस साल 16 फीसदी गिरावट आई है। टाटा मोटर्स पैसेंजर वीकल्स का शेयर भी 15 फीसदी से अधिक गिरा है। जेफरीज के मुताबिक देश में पैसेंजर वीकल्स की मांग अच्छी बनी हुई है और मारुति का एक्सपोर्ट आउटलुक भी काफी स्ट्रॉन्ग है। लेकिन कंपनी के घरेलू बाजार में हिस्सेदारी सुधारने और मार्जिन को लेकर चिंता है।

आगे कैसी रहेगी चाल?

जेफरीज ने मारुति के ईपीएस अनुमान में वित्त वर्ष 2026 से 2028 के लिए कटौती की है। उसने मारुति के शेयरों को होल्ड रेटिंग देते हुए टारगेट प्राइस 17,500 रुपये से घटाकर 16,000 रुपये कर दिया। वित्त वर्ष 2026 में कंपनी की घरेलू पीवी होलसेल मार्केट में हिस्सेदारी 40 फीसदी से कम है। छोटी कार की डिमांड में कमी से हाल के वर्षों में कंपनी की बाजार हिस्सेदारी कम हुई है। साथ ही कंपनी को कैपेसिटी की कमी का भी सामना करना पड़ रहा है जिससे वह डिमांड पूरी नहीं कर पा रही है।

हालांकि मोतीलाल ओसवाल का मानना है कि मारुति के बारे में ये चिंताएं कुछ ज्यादा ही बढ़ाचढ़ाकर दिखाई जा रही हैं। ब्रोकरेज ने मारुति के शेयरों को बाय रेटिंग देते हुए 17,406 रुपये का टारगेट प्राइस दिया है। उसका कहना है कि कैपेसिटी को लेकर कुछ समस्या है लेकिन अप्रैल 2026 से नई कैपेसिटी जुड़ने के बाद यह समस्या सुलझ जाएगी। कंपनी आगे कई मॉडल लॉन्च करने वाली है जिसका फायदा उसे अगले वित्त वर्ष में देखने को मिलेगा।

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