लंबे समय तक रह सकती है गैस की दिक्कत, ईरानी हमले में कतर की कैपेसिटी तबाह, रिपेयर में लगेंगे 5 साल

नई दिल्ली: भारत की गैस सप्लाई की दिक्कतें आगे और बढ़ सकती हैं। ईरान ने कतर की एक अहम एनर्जी फैसिलिटी पर मिसाइल हमला किया है। यह हमला रास लफान इंडस्ट्रियल सिटी पर किया गया जो राजधानी दोहा से करीब 80 किमी उत्तर में है। यह एक क्रिटिकल एनर्जी हब है जिसमें एलएनजी इन्फ्रास्ट्रक्चर और कई अंतरराष्ट्रीय कंपनियों का ठिकाना है। इस हमले के कारण वहां आग लग गई और काफी नुकसान हुआ। बाद में आग पर काबू पा लिया गया लेकिन इसे पूरी तरह रिपेयर करने में तीन से 5 साल का समय लग सकता है।

कतरएनर्जी के सीईओ साद अल-काबी ने रॉयटर्स के साथ एक इंटरव्यू में कहा कि ईरानी हमले के कारण कतर की करीब 17 फीसदी एलएनजी एक्सपोर्ट कैपेसिटी को नुकसान पहुंचा है। यह नुकसान इतना बड़ा है कि इसे पूरी तरह दुरुस्त करने में 3 से पांच साल का समय लग सकता है। इससे दुनिया में एलएनजी की सप्लाई लंबे समय तक बाधित रह सकती है। कतर भारत का सबसे बड़ा एलएनजी सप्लायर है। । भारत सालाना 2.7 करोड़ टन एलएनजी का आयात करता है, जिसमें से 40 प्रतिशत हिस्सा अकेले कतर से आता है।

किसे होगी दिक्कत?

अल-काबी ने कहा, ‘मैं कभी सपने में भी नहीं सोच सकता था कि रमजान के महीने में एक मुस्लिम देश हम पर इस तरह का हमला करेगा।’ इस नुकसान के कारण कतर को लॉन्ग-टर्म कॉन्ट्रैक्चुअल कमिटमेंट्स को पूरा करने में दिक्कत आ सकती है। कंपनी को कुछ एलएनजी सप्लाई एग्रीमेंट्स पर फोर्स मैज्योर लागू करना पड़ सकता है। इससे खासकर इटली, बेल्जियम, साउथ कोरिया और चीन जैसे देशों को लंबे समय तक डिलीवरी प्रभावित हो सकती है।

कतर दुनिया के अग्रणी एलएनजी एक्सपोर्टर्स में शामिल है। होर्मुज की खाड़ी से जहाजों की आवाजाही बंद है। इस कारण दुनिया की 20 फीसदी तेल और गैस सप्लाई बाधित हुई है। कच्चे तेल की कीमत आज 119 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गई जो चार साल में इसका उच्चतम स्तर है। अगर पश्चिम एशिया में हालात नहीं सुधरते हैं तो इसके नियर टर्म में 150 डॉलर पहुंचने की आशंका है।

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