जेपी के आईसीयू के मरीज को दवाएं नहीं मिलीं:गुस्साए परिजन ने दवा की सिलिप फाड़ी

भोपाल, भोपाल के जयप्रकाश अस्पताल में इलाज के लिए आने वाले मरीजों को अब बेसिक दवाओं के लिए भी भटकना पड़ रहा है। गुरुवार को हालात ऐसे रहे कि अस्पताल में मल्टीविटामिन और अमोक्सिसिलिन जैसी सामान्य दवाएं तक उपलब्ध नहीं थीं। डॉक्टरों द्वारा लिखी गई दवाएं अस्पताल में न मिलने के कारण मरीजों और उनके परिजनों को बाहर मेडिकल स्टोर का सहारा लेना पड़ा। सबसे चिंताजनक बात यह है कि प्रबंधन स्टॉक में दवाएं होने का दावा कर रहा है, जबकि मरीजों को खाली हाथ लौटना पड़ रहा है। इससे अस्पताल की दवा वितरण व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

आईसीयू में भर्ती आयोध्या ने निवासी लोकेश के परिजन रमेश कश्यप ने बताया कि डॉक्टर ने कुछ दवाएं लिखीं, जो अस्पताल में ही मिलनी चाहिए थीं। जब वे दवा लेने पहुंचे तो उन्हें बताया गया कि दवाएं उपलब्ध नहीं हैं। इसके बाद वे एक काउंटर से दूसरे काउंटर तक भटकते रहे। जहां जाते थे वहां मौजूद स्टाफ उन्हें दूसरे काउंटर पर जाने को कह देता था। दवा कहीं से भी नहीं मिली। इससे नाराज होकर उन्होंने दवा का पर्चा ही फाड़ दिया।

मेडिसिन विभाग में दिखाने आए संजय सिंह ने बताया कि डॉक्टर ने अमोक्सिसिलिन लिखी थी, लेकिन दवा खिड़की पर यह उपलब्ध नहीं थी। स्टाफ ने साफ कह दिया कि दवा खत्म हो गई है और बाहर से खरीद लें। इसी तरह ऑर्थोपेडिक विभाग में आईं पिंकी मालवीय को भी मल्टीविटामिन नहीं मिली और उन्हें बाजार से दवा खरीदनी पड़ी।

नहीं मिलीं जरूरी यह दवाएं

जेपी अस्पताल में गुरुवार को कई मरीजों को उस समय परेशानी का सामना करना पड़ा, जब उन्हें अस्पताल की दवा खिड़की से जरूरी दवाएं नहीं मिलीं। अमोक्सिसिलिन और मल्टीविटामिन जैसी दवाएं, जो सामान्य तौर पर हर सरकारी अस्पताल में उपलब्ध रहती हैं, यहां खत्म बताई गईं। मरीजों को अलग-अलग काउंटर पर भेजा गया, लेकिन कहीं भी दवा उपलब्ध नहीं हो सकी।

दिव्यांग अभ्यर्थियों को कराया घंटों इंतजार

शिक्षक भर्ती प्रक्रिया के तहत दिव्यांग अभ्यर्थियों का मेडिकल चेकअप अस्पताल परिसर में किया जा रहा है, लेकिन यहां की अव्यवस्थाओं ने उनकी परेशानी बढ़ा दी। सुबह 9 बजे बुलाए गए अभ्यर्थियों को घंटों इंतजार करना पड़ा, जबकि बैठने तक की कोई उचित व्यवस्था नहीं थी।

अभ्यर्थी पूर्णिमा ने बताया कि वह सुबह मेडिकल चेकअप के लिए पहुंचीं, लेकिन चार घंटे बीत जाने के बाद भी उनकी बारी नहीं आई। उन्होंने कहा कि इतनी लंबी प्रतीक्षा उन्हें परीक्षा के दौरान भी नहीं करनी पड़ी थी। उनका कहना है कि व्यवस्था इतनी धीमी है कि अभी और इंतजार करना पड़ सकता है।

अपने बेटे मनीष चौहान का मेडिकल कराने आए लक्ष्मण सिंह उर्फ छोटे लाल चौहान ने बताया कि मेडिकल बोर्ड को पहले से पता था कि दिव्यांग अभ्यर्थियों का मेडिकल होना है। इसके बावजूद कोई विशेष व्यवस्था नहीं की गई। उन्होंने कहा कि कम से कम बैठने की सुविधा तो होनी चाहिए थी, लेकिन अभ्यर्थियों को जमीन पर बैठकर इंतजार करना पड़ा।

हर दिन सैकड़ों मरीज प्रभावित

अस्पताल में रोजाना 100 से ज्यादा मरीजों को इन सामान्य दवाओं की जरूरत होती है। दवाएं नहीं मिलने के कारण मरीजों को बाहर से महंगे दामों पर खरीदना पड़ रहा है। इससे उनका इलाज खर्च बढ़ रहा है, खासकर उन मरीजों के लिए जिनका इलाज लंबे समय तक चलता है।

मामले में सिविल सर्जन डॉ. संजय जैन का कहना है कि अस्पताल के स्टॉक में सभी दवाएं उपलब्ध हैं। उन्होंने कहा कि वे स्टाफ से इस बारे में चर्चा करेंगे कि मरीजों को दवाएं क्यों नहीं मिल पा रहीं। हालांकि मरीजों के अनुभव कुछ और ही कहानी बता रहे हैं, जिससे दवा वितरण व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं।

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