रानी कमलापति रेलवे स्टेशन के आईएचओ शेड पर 10 करोड़ खर्च, फिर भी गलत निर्माण, सुविधा की जगह बना समस्या

भोपाल। रानी कमलापति रेलवे स्टेशन पर लगभग 10.90 करोड़ रुपये की लागत से बनाया गया आईएचओ (इंटरमीडिएट ओवरहॉलिंग) शेड अब रेलवे की इंजीनियरिंग लापरवाही का उदाहरण बन गया है। जिस सुविधा को आधुनिक कोच मेंटेनेंस और समय बचाने के उद्देश्य से तैयार किया गया था, वही अब संचालन में बड़ी बाधा बन रही है। हैरानी की बात यह है कि तत्कालीन जीएम ने इसका उद्घाटन भी कर दिया है।

रेलवे के जानकारों का कहना है कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी इस तरह की खामियां सामने आना रेलवे की कार्यप्रणाली और निर्माण कार्यों की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। इतना बड़ा तकनीकी बदलाव निर्माण के दौरान कैसे हो गया और इसे समय रहते सुधारा क्यों नहीं गया, यह भी जांच का विषय है। यदि समय रहते इस तकनीकी गलतियों को ठीक कर लिया जाता तो इस तरह की परेशानियों का सामना नहीं करना पड़ता, ऐसे में अब यह शेड रेलवे के लिए सुविधा के बजाय परेशानी का कारण बना रहेगा।

आईएचओ शेड की कनेक्टिविटी में तकनीकी गलती ने कार्य क्षमता प्रभावित की

योजना के अनुसार आईएचओ शेड को प्लेटफार्म नंबर-5 से सीधे जोड़ा जाना था, ताकि कोचों को बिना अतिरिक्त शंटिंग के सीधे मरम्मत के लिए भेजा जा सके और समय की बचत हो। इससे ट्रेनों के संचालन पर भी कोई असर नहीं पड़ता। लेकिन निर्माण के दौरान इसे लाइन नंबर-6 से जोड़ दिया गया, जिससे व्यवस्था प्रभावित हो गई। अब शेड का मूल उद्देश्य कोचों की मरम्मत और निरीक्षण को तेज व सुगम बनाना पूरी तरह पूरा नहीं हो पा रहा है।

कोच मरम्मत के लिए शेड पर पहुंचने में लगेगा समय

वर्तमान व्यवस्था में लाइन नंबर-6 पिट लाइन से जुड़ी है, जहां पहले से कई कोच और ट्रेनें खड़ी रहती हैं। ऐसे में किसी कोच को आईएचओ शेड तक ले जाने से पहले ट्रैक खाली कर गाड़ियों को दूसरी लाइन पर शिफ्ट करना पड़ता है। यही प्रक्रिया वापसी में भी दोहरानी होती है। जहां पहले यह काम 15 मिनट में हो सकता था, अब इसमें 2 से 2.5 घंटे लग रहे हैं, जिससे संचालन पर अतिरिक्त दबाव बढ़ रहा है।

आधुनिक ट्रैक सिस्टम की जगह पुरानी तकनीक, कर्मचारियों पर बढ़ा बोझ

इस परियोजना में एक बड़ी खामी सामने आई है। यहां आधुनिक आटोमैटिक ट्रैक सिस्टम लगाया जाना था, जिससे कोचों की मूवमेंट और पोजिशनिंग स्वतः नियंत्रित होती और मैन्युअल हस्तक्षेप कम होता। लेकिन इसके बजाय पुरानी तकनीक वाला हैंडलर सिस्टम लगा दिया गया। इससे न केवल आधुनिक सुविधा का उद्देश्य अधूरा रह गया, बल्कि कर्मचारियों पर काम का दबाव भी बढ़ गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि प्लेटफॉर्म नंबर-5 से सही कनेक्टिविटी और ऑटोमैटिक सिस्टम लगाया जाता, तो यह शेड अत्याधुनिक मेंटेनेंस केंद्र बन सकता था, जिससे ट्रेनों का संचालन अधिक सुचारू होता।

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