एसीएस मंडलोई ने राजौरा से मांगे 33.79 करोड़:बिजली बकाया न दिया तो केंद्र का अनुदान लोन में कन्वर्ट होगा, कोयला सप्लाई पर भी असर

अपर मुख्य सचिव ऊर्जा विभाग नीरज मंडलोई ने जल संसाधन विभाग के अपर मुख्य सचिव डॉ राजेश राजौरा से 33.79 करोड़ रुपए मांगे हैं। राजौरा से यह राशि प्रदेश की तीनों ही विद्युत वितरण कंपनियों के जल संसाधन विभाग पर बकाया राशि चुकाने के लिए मांगे गए हैं।
साथ ही कहा गया है कि समय पर बिल न चुकाने से आरडीएसएस में केंद्र से मिलने वाला अनुदान लोन में कन्वर्ट हो जाएगा। वहीं, पेमेंट न होने से कोयले की आपूर्ति पर भी असर पड़ने की बात कही गई है। सबसे अधिक बकाया राशि 16. 29 करोड़ रुपए पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के क्षेत्र में है। राजगढ़ जिले से जल संसाधन विभाग को सबसे अधिक 4.55 करोड़ रुपए चुकाना है।
एसीएस मंडलोई ने पत्र लिखकर कहा है कि बिजली कंपनियों द्वारा जल संसाधन विभाग के दफ्तरों और अन्य जल संरचनाओं के लिए कनेक्शन दिए गए हैं। इन बिजली कनेक्शनों की बकाया राशि लगातार बढ़ती जा रही है। नियमित भुगतान नहीं किए जाने से यह बकाया राशि मई 2025 की स्थिति में बढ़कर 33.79 करोड़ रुपए तक पहुंच गई है।
पत्र में लिखा है कि केंद्र सरकार द्वारा बिजली लाइन लॉस कम करने के लिए रिवेम्पड डिस्ट्रीब्यूशन सेक्टर स्कीम (आरडीएसएस) योजना के तहत 60 फीसदी अनुदान दिया जा रहा है। इसमें प्रावधान है कि सभी सरकारी विभागों और संबद्ध कार्यालयों व स्थानीय निकायों से बिजली बिल वितरण कंपनियों को भुगतान कराया जाए।
शर्तों की पूर्ति न होने पर केंद्र सरकार से आरडीएसएस के तहत मिलने वाली अनुदान की राशि को लोन में कन्वर्ट कर दिया जाएगा। इसका सीधा असर बिजली कम्पनियों के इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रमोशन और कॉमर्शियल साल्वेंसी पर पड़ना तय है।
कोयला कंपनियों को पेमेंट न हुआ तो जनरेशन पर होगा असर
इसके साथ ही बिजली बिल का भुगतान नहीं होने से बिजली जनरेट करने वालों को समय पर भुगतान नहीं होगा और प्रदेश की जेनको प्रोडक्शन यूनिट्स के लिए कोयला कम्पनियों को भुगतान में भी दिक्कत आएगी। इसका असर प्रदेश की बिजली सप्लाई व्यवस्था पर पड़ सकता है जिससे दिक्कत होगी।
मंडलोई ने राजौरा को लिखे पत्र में इन हालातों के मद्देनजर जल संसाधन विभाग के कार्यालयों के बकाया बिलों का शीघ्र भुगतान कराने के लिए कहा है। साथ ही बिजली के मासिक बिल के नियमित भुगतान करने के लिए संबंधित अधिकारियों को निर्देश देने के लिए भी कहा गया है ताकि बजट की उपलब्धता रहे और बिल का भुगतान होता रहे।
यह है तीनों कम्पनी क्षेत्रों में जल संसाधन पर बकाया
- पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कम्पनी में 21 जिलों पर 611 कनेक्शनों पर 16.29 करोड़
- मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कम्पनी में 16 जिलों पर 466 कनेक्शनों का 11.41 करोड़
- पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कम्पनी में 15 जिलों पर 189 कनेक्शनों का 6.10 करोड़
- तीनों ही बिजली कम्पनियों में कुल 1266 कनेक्शनों का 33.79 करोड़
तीनों कम्पनियों में इन जिलों पर सबसे अधिक पेमेंट बाकी
- पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कम्पनी में जल संसाधन विभाग के कार्यालयों पर सबसे अधिक बकाया राशि 3.80 करोड़ रुपए टीकमगढ़ जिले में 36 बिजली कनेक्शनों पर है। इसके बाद रीवा जिले में 33 बिजली कनेक्शन पर 3.11 करोड़ और शहडोल जिले में 27 कनेक्शनों पर 2.91 करोड़ रुपए बाकी है।
- मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कम्पनी के अंतर्गत सबसे अधिक बकाया राशि 39 बिजली कनेक्शनों पर 4.55 करोड़ रुपए राजगढ़ जिले पर है। इसके बाद भिंड जिले के 34 कनेक्शनों पर 2.43 करोड़ रुपए बकाया है। वहीं तीसरे स्थान पर 30 कनेक्शनों वाले सीहोर का नाम है जिस पर 1.98 करोड़ का बिल बाकी है।
- पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कम्पनी क्षेत्र में सबसे अधिक बकाया राशि मंदसौर जिले पर 2.94 करोड़ रुपए है। यहां 36 कनेक्शनों का बिल बाकी बताया गया है। इसके बाद आगर जिले में 9 कनेक्शनों पर 1.62 करोड़ और धार जिले में 33 बिजली कनेक्शनों पर 92 लाख रुपए बाकी है।





