मिजोरम की राजधानी आईजोल तक जाने के बाद अब भारतीय रेल जाएगी म्यांमार बॉर्डर तक, पर्यटन के लिहाज से माना जा रहा बेहद अहम

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 13 सितंबर को मिजोरम की राजधानी आईजोल को रेल मार्ग से कनेक्ट करने के साथ ही भारतीय रेल म्यांमार बॉर्डर तक जाएगी। इसके लिए फाइनल लोकेशन सर्वे (FLS) का काम चल रहा है। जल्द ही रेलवे बोर्ड को इसकी डीपीआर सौंपी जाएगी। इसके बनने से जहां भारत को चिकन नेक के साथ ही ट्रांसपोर्ट के लिए एक और विकल्प मिल जाएगा। वहीं इससे नॉर्थ-ईस्ट के राज्यों को भी बड़ा फायदा मिलेगा।

म्यांमार के सितवे बंदरगाह को कनेक्ट करेगा रेल मार्ग

नॉर्थ-ईस्ट फ्रंटियर रेलवे के सीपीआरओ केके शर्मा ने बताया कि कलादान मल्टीमॉडल ट्रांजिट ट्रांसपोर्ट प्रोजेक्ट (KMTTP) के तहत रेलवे मिजोरम टू म्यांमार बॉर्डर रेलवे लाइन पर काम कर रहा है। यह रेलवे लाइन आईजोल के नए बने सायरंग स्टेशन से 223 किलोमीटर दूर मिजोरम के ही हबीचुआ तक जाएंगी। जो की म्यांमार बॉर्डर के पास और इस इलाके में भारत का अंतिम रेलवे स्टेशन भी होगा। यहां से कुछ दूरी तक सड़क बनाई जाएगी। जो फिर बंगाल की खाड़ी के पास तक जाएगी। जिससे यह रेल मार्ग फिर म्यांमार के सितवे बंदरगाह को कनेक्ट करेगा।

ट्रांसपोर्ट लागत और समय में भी आएगी कमी

इस परियोजना को आर्थिक विकास,सामरिक दृष्टि, मिजोरम की अर्थव्यवस्था और पर्यटन के लिहाज से भी बेहद अहम माना जा रहा है। इसके सितवे पोर्ट से कनेक्ट होने के बाद पूर्वोत्तर भारत तक ट्रांसपोर्ट लागत और समय में भी कमी आएगी। म्यांमार का सितवे पोर्ट रखाइन राज्य की राजधानी सितवे में स्थित है। यह बंगाल की खाड़ी में एक गहरे पानी वाला बंदरगाह है। इसे भारत द्वारा कलादान मल्टीमॉडल ट्रांजिट ट्रांसपोर्ट परियोजना के तहत विकसित किया गया था। इसका उद्देश्य पूर्वोत्तर राज्यों को बंगाल की खाड़ी से कनेक्ट करना है। इसके कनेक्ट होने के बाद भारत को फिर बांग्लादेश से अलग पूर्वोत्तर राज्यों तक एक मजबूत अलग से कनेक्टिविटी मिलेगी। इससे भूटान और बांग्लादेश के बीच बने चिकन नेक नाम से जाने जाने वाले सिलीगुड़ी कॉरिडोर पर निर्भरता भी कम हो जाएगी।

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