जबलपुर। मध्य प्रदेश में बिजली की मांग लगातार बढ़ रही है। 10 अक्टूबर को प्रदेश की अधिकतम मांग 15,990 मेगावाट थी, जो 15 अक्टूबर 2026 को बढ़कर 17,313 मेगावाट हो गई। छह दिन में मांग 1,323 मेगावाट बढ़ी।

इसी दौरान ताप, जल और नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों से बिजली की उपलब्धता में भी इजाफा हुआ। हालांकि, मांग के मुकाबले आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए केंद्रीय बिजली उत्पादन इकाइयों, बैंकिंग, अनुबंधित खरीद और रियल टाइम ट्रेडिंग का सहारा लिया जा रहा है।


ताप विद्युत उत्पादन 10 अक्टूबर के 3,037 मेगावाट से बढ़कर 15 अक्टूबर को 3,642 मेगावाट पहुंच गया। बीच में 13 अक्टूबर को यह घटकर 3,166 मेगावाट रहा था। हाइडल उत्पादन 1,432 से बढ़कर 2,091 मेगावाट हो गया। 12 और 13 अक्टूबर को यह करीब 1,450 मेगावाट के आसपास था। सौर और अन्य नवीकरणीय स्रोतों से बिजली 1,120 से बढ़कर 1,803 मेगावाट हुई।

7,536 मेगावाट बिजली उपलब्ध हुई

15 अक्टूबर को ताप, जल और नवीकरणीय स्रोतों से कुल 7,536 मेगावाट बिजली उपलब्ध हुई। शेष मांग के लिए एनटीपीसी से बिजली, बैंकिंग व्यवस्था, अनुबंधित खरीद और रियल टाइम ट्रेडिंग समेत अन्य स्रोतों पर निर्भरता बनी हुई है।


संतुलन बनाए रखना चुनौती

आंकड़ों के अनुसार, 10 से 15 अक्टूबर के बीच मांग 8.27 प्रतिशत बढ़ी, जबकि इन तीनों स्रोतों से संयुक्त उत्पादन लगभग 50 प्रतिशत बढ़ा। यह बढ़ोतरी मुख्य रूप से 14 और 15 अक्टूबर के आंकड़ों में दिखती है। इसे प्रदेश की कुल बिजली आपूर्ति में समान अनुपात की वृद्धि नहीं माना जा सकता, क्योंकि आपूर्ति में अन्य स्रोतों का योगदान भी है। मांग और उपलब्धता के बीच संतुलन बनाए रखना चुनौती बना हुआ है।