इम्तिहान से ठीक पहले वाली रात जागकर पूरी किताब खत्म करने का अनुभव ज्यादातर लोगों ने कभी न कभी झेला ही होगा. यही हाल दफ्तर में अगले दिन होने वाली किसी बड़ी प्रेजेंटेशन से पहले होता है. रात के दो तीन बजे तक लगता है कि सब कुछ दिमाग में बैठ चुका है, लेकिन सुबह जब पर्चा सामने आता है या प्रेजेंटेशन शुरू होती है, तो सिर बिल्कुल खाली हो जाता है.
ज्यादातर लोग इसे घबराहट या तनाव समझ लेते हैं. लेकिन मेडिकल साइंस का कहना है कि यह दिक्कत आपके दिमाग की कमजोरी नहीं, बल्कि उस नींद का नतीजा है जिसे आपने पढ़ाई या काम के चक्कर में कुर्बान कर दिया.
दिमाग में यादें कैसे पक्की होती हैं?
दिनभर हम जो कुछ भी नया सीखते हैं, दिमाग के न्यूरॉन्स एक दूसरे से जुड़कर बारीक कनेक्शन (साइनेप्स) तैयार करते हैं.
लेकिन यह कनेक्शन अपने आप पक्का नहीं होता. इसे लंबे समय तक टिकने वाली मेमोरी में बदलने के लिए दिमाग की कोशिकाओं को कुछ खास प्रोटीन्स बनाने पड़ते हैं. सबसे खास बात यह है कि इन प्रोटीन्स को तैयार करने और कनेक्शन को मजबूत करने का ज्यादातर काम दिमाग तब करता है जब हम गहरी नींद में होते हैं.
रिसर्च में क्या नया सामने आया?
वैज्ञानिक जर्नल साइंस सिग्नलिंग में छपी एक स्टडी ने इस प्रक्रिया के जैविक कारण को स्पष्ट किया है.
दिमाग के भीतर 'mTOR' नाम का एक खास मॉलिक्यूलर पाथवे होता है, जो याददाश्त को मजबूत करने वाले प्रोटीन्स के प्रोडक्शन को कंट्रोल करता है. जब लैब में चूहों को सोने नहीं दिया गया, तो वैज्ञानिकों ने देखा:
नींद न मिलने से यह mTOR पाथवे तुरंत लड़खड़ा गया.
कोशिकाओं में याददाश्त को पक्का करने वाले जरूरी प्रोटीन्स का बनना धीमा पड़ गया.
इसके चलते कुछ ही घंटे पहले सीखी गई चीजें दिमाग में स्थायी रूप से दर्ज नहीं हो पाईं.
रिसर्च में यह भी देखा गया कि जब इस पाथवे को लैब में सही किया गया, तो नींद की कमी के बावजूद याददाश्त बेहतर हो गई. इससे साफ हुआ कि कम सोने का सीधा असर दिमाग की नई चीजें याद रखने की बायोकेमिस्ट्री पर पड़ता है.
जागने का समय बढ़ाने से दिमाग तेज नहीं होता
अक्सर लोग सोचते हैं कि चार घंटे सोकर अगर चार घंटे ज्यादा पढ़ लिया जाए, तो तैयारी बेहतर होगी. हकीकत में ऐसा नहीं होता.
नींद पूरी न होने पर दिमाग की नई जानकारी को प्रोसेस और स्टोर करने की क्षमता 40 फीसदी तक गिर जाती है. न्यूरोलॉजिस्ट्स के मुताबिक किसी भी वयस्क के दिमाग को सही तरीके से काम करने के लिए रोजाना 7 से 9 घंटे की uninterrupted नींद की जरूरत होती है.
अगर रात में यह जरूरी नींद नहीं मिली, तो पढ़ी हुई चीजें दिमाग में सिर्फ कुछ देर के लिए रहेंगी, अगली सुबह के लिए सुरक्षित नहीं बचेंगी.