ऑपरेशन सिंदूर में फेल हुए चीनी हथियार, दौड़े-दौड़े चीन जा रहे पाकिस्‍तानी विदेश मंत्री, निशाने पर तालिबान-हिंदुस्‍तान दोस्‍ती भी

इस्‍लामाबाद: ऑपरेशन सिंदूर में चीनी हथियारों के फेल होने के बाद पाकिस्‍तान घबरा गया है। अब अचानक से पाकिस्‍तान के विदेश मंत्री इशाक डार चीन के दौरे पर जा रहे हैं। इशाक डार चीन में चीनी विदेश मंत्री वांग यी से मुलाकात करेंगे। इस दौरे पर इशाक डार चीन को ऑपरेशन सिंदूर के प्रभाव और चीनी हथियारों के फेल होने के बारे में बताएंगे। साथ ही चीन और पाकिस्‍तान मिलकर भारत के खिलाफ नई रणनीति बनाने पर काम करेंगे। भारत के हमले के दौरान चीन हर तरह से पाकिस्‍तान की सपोर्ट कर रहा था लेकिन इसके बाद भी मुनीर आर्मी भारतीय सेना के हमलों को रोकने में फेल साबित हुई थी।

भारत ने यह भी कहा है कि ऑपरेशन सिंदूर अभी भी जारी है। चीन ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान कहा था कि वह पाकिस्‍तान के संप्रभुता की रक्षा करेगा। चीन ने 4 दिनों तक चले सीमित युद्ध के दौरान पाकिस्‍तान को राफेल और सुखोई की जोड़ी से निपटने के लिए पीएल-15 मिसाइल दी थी जो जे-10 सी फाइटर जेट में इस्‍तेमाल की गई। पाकिस्‍तान की सरकार ने हड़बड़ी में प्‍लान किए गए इस दौरे की जानकारी दी है। इस दौरे पर वांग यी और डार दोनों ही मिलकर भारत के साथ तनाव पर अपनी रणनीति बनाएंगे। भारत और पाकिस्‍तान में अभी सीजफायर है लेकिन भारत ने साफ कहा है कि ऑपरेशन सिंदूर अभी जारी है।

तालिबान पर दबाव डालना चाहता है चीन

पाकिस्‍तान के विदेश मंत्री ऐसे समय पर चीन पहुंच रहे हैं जब तालिबान के विदेश मंत्री भी बीजिंग पहुंच रहे हैं। माना जा रहा है कि चीन अब तालिबान और पाकिस्‍तान के बीच दोस्‍ती कराने में जुट गया है। इससे पहले ऑपरेशन सिंदूर के दौरान तालिबान ने खुलकर भारत का सपोर्ट किया था। इसके बाद पहली बार भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने तालिबान के विदेश मंत्री आमिर खान मुत्‍ताकी से फोन पर बात की थी। इसके बाद पाकिस्‍तान के रक्षा मंत्री ख्‍वाजा आसिफ ने रविवार को एक बयान जारी करके दावा किया था कि अफगानिस्‍तान और इजरायल के अलावा भारत का किसी देश ने सपोर्ट नहीं किया।

पहलगाम आतंकी हमले और ऑपरेशन सिंदूर के बाद से ही भारत और पाकिस्‍तान में तनाव अपने चरम पर है। ऐसे में चीन की कोशिश है कि पाकिस्‍तान को तालिबान के मोर्चे पर राहत दिलाई जाए। पाकिस्‍तान को डर सता रहा है कि उसके खिलाफ दूसरा मोर्चा खुल सकता है। वहीं चीन का अफगानिस्‍तान पर काफी ज्‍यादा प्रभाव है और वह करोड़ों डॉलर का निवेश कर रहा है। इसी प्रभाव का इस्‍तेमाल चीन अब तालिबान के खिलाफ करना चाहता है। चीन और पाकिस्‍तान के बीच मुलाकात के दौरान द्विपक्षीय संबंधों की समीक्षा होगी। चीन ने सीपीईसी के तहत करीब 60 अरब डॉलर का निवेश पाकिस्‍तान में किया है। चीन लगातार पाकिस्‍तान को लोन दे रहा है और हथियार दे रहा है।

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